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Maharajganj News: अलग-अलग मामलों में एक दिन की न्यायिक अभिरक्षा की सजा सुनाई
Sat, 19 Jul 2025 01:08 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Sat, 19 Jul 2025 01:08 AM IST
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महराजगंज। न्यायिक मजिस्ट्रेट फरेंदा की अदालत ने शुक्रवार को मारपीट और गाली-गलौज के दो अलग-अलग मामलों में नौ अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए एक-एक दिन की न्यायिक अभिरक्षा की सजा सुनाई है। साथ ही सभी दोषियों पर जुर्माना भी लगाया गया है।
पहला मामला वर्ष 2011 का है। बृजमनगंज थाना क्षेत्र के करमहा गांव से जुड़ा है। इस मामले में राजू, संजय उर्फ सराजुद्दीन, राजेश और मटेलू उर्फ मोहम्मद हकीम पर मारपीट और गाली-गलौज का आरोप लगाया गया था। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायालय ने सभी चारों आरोपियों को दोषी पाया। अदालत ने प्रत्येक को एक दिन की न्यायिक अभिरक्षा की सजा सुनाते हुए 1500-1500 रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया।
दूसरा मामला वर्ष 1990 का है जो कोल्हुई थाना क्षेत्र के घुसवा गांव का है। इस प्रकरण में कपिल देव मिश्रा, हरदेव मिश्रा, केशव, राजेश्वर और अवधेश के खिलाफ मारपीट और गाली-गलौचज का आरोप था। वर्षों तक चले इस मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने सभी पांचों अभियुक्तों को दोषी ठहराया। न्यायालय ने इन सभी को भी एक-एक दिन की न्यायिक अभिरक्षा की सजा सुनाते हुए 1000-1000 रुपये का जुर्माना भरने का आदेश दिया।
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पहला मामला वर्ष 2011 का है। बृजमनगंज थाना क्षेत्र के करमहा गांव से जुड़ा है। इस मामले में राजू, संजय उर्फ सराजुद्दीन, राजेश और मटेलू उर्फ मोहम्मद हकीम पर मारपीट और गाली-गलौज का आरोप लगाया गया था। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायालय ने सभी चारों आरोपियों को दोषी पाया। अदालत ने प्रत्येक को एक दिन की न्यायिक अभिरक्षा की सजा सुनाते हुए 1500-1500 रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया।
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दूसरा मामला वर्ष 1990 का है जो कोल्हुई थाना क्षेत्र के घुसवा गांव का है। इस प्रकरण में कपिल देव मिश्रा, हरदेव मिश्रा, केशव, राजेश्वर और अवधेश के खिलाफ मारपीट और गाली-गलौचज का आरोप था। वर्षों तक चले इस मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने सभी पांचों अभियुक्तों को दोषी ठहराया। न्यायालय ने इन सभी को भी एक-एक दिन की न्यायिक अभिरक्षा की सजा सुनाते हुए 1000-1000 रुपये का जुर्माना भरने का आदेश दिया।
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