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Maharajganj News: गृहस्थी चलाने के लिए लिया कर्ज, चुकाने में बिका घर

Thu, 27 Mar 2025 12:43 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज Updated Thu, 27 Mar 2025 12:43 AM IST
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Loan taken to run the household, house sold to pay the loan
महराजगंज। माइक्रो फाइनेंस कंपनी से कर्ज लेकर महिलाएं फंस जा रहीं हैं। पास में रकम नहीं होने से उनको दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बीते दिनों पति की मौत के बाद कर्ज चुकाने के लिए एक महिला को मकान का आधा हिस्सा बेचना पड़ गया, तब जाकर उसे राहत मिली।
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जरूरत होने पर महिलाएं समूह बनाकर कर्ज लेकर काम चला रहीं हैं, लेकिन ब्याज इतना हो जा रहा है की उससे मुक्ति पाने में दुश्वारियां झेलनी पड़ रही हैं। मिठौरा क्षेत्र के पिपरिया गुरु गोविंद राय गांव में अनिता मिलीं। यह समूह बनाकर माइक्रोफाइनेंस कंपनी से कर्ज ली हुई हैं। अब इनको समझ में नहीं आ रहा है कि कर्ज पूरा कैसे होगा। अनिता ने पूरी कहानी बताई तो वसूली करने वाले एजेंटों की कथनी करनी सामने आ गई।
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उन्होंने बताया कि जरूरत पड़ी तो काम चलाने के लिए तीन माइक्रो फाइनेंस कंपनी से दो लाख रुपये कर्ज ली। इसके ब्याज के बारे में पूछा गया तो किसी ने कुछ नहीं बताया। बीते साल का जिक्र करते हुए कहने लगीं की पति दिल्ली में सिलाई करते थे। आमदनी होती थी तो किस्त जमा हो रहा था। उनकी तबीयत खराब हो गई। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
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उनकी मौत के बाद माइक्रो फाइनेंस कंपनी के एजेंट घर आकर धमकाते थे। पति की मौत से उन्हें कोई मतलब नहीं था। ब्याज लेने लेने में उनको जरा भी दया नहीं रहती थी। घर में आमदनी का कोई जरिया नहीं है। जब बहुत परेशान हो गई तो बने घर का आधा हिस्सा बेचकर कर्ज चुकता कर दी। अब जाकर राहत की सांस ली हूं। पड़री खुर्द गांव में तो आयशा, सुनीता, पूनम, गौरी ने आपबीती बताना शुरू किया तो एजेंटों की कार्य प्रणाली समझ में आई। महिलाओं ने बताया कि एक फाइनेंस कंपनी ने महिलाओं को 40-40 हजार रुपये का लोन दिया था। जब लोन के पैसे उनके खाते में आए तो एजेंट ने महिलाओं को चार हजार रुपये दे दिया।

बाकी के पैसे खुद ऐंठ लिए। अब वह रुपये देने में आनाकानी कर रहा है। कंपनी में शिकायत की पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। बसवार गांव की मनोरमा ने बताया कि तीन-चार माइक्रो फाइनेंस कंपनी से दो लाख रुपये कर्ज ली हूं। काम बंद होने से आर्थिक हालत इन दिनों खराब है। इधर माइक्रो फाइनेंस कंपनी वाले किस्त भरने के लिए दबाव डाल रहे हैं। कंपनी के एजेंट किस्त भरने के लिए दबाव बना रहे हैं। प्रत्येक दिन घर पर वसूली एजेंट आते रहे हैं। अगर कभी घर नहीं मिलती हूं तो अपशब्दों की बौछार कर चले जाते हैं।
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