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Maharajganj News: हत्या के दोषी को आजीवन कारावास की सजा
Sat, 01 Jul 2023 01:18 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Sat, 01 Jul 2023 01:18 AM IST
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वर्ष 1999 में नहर के किनारे हत्या कर फेंकी गई थी लाश
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। ठूठीबारी थाना क्षेत्र के गडौरा गांव के बेचू को तीन जनवरी 1999 को हुई हत्या के मामले में दोषी पाए जाने पर अपर सत्र न्यायाधीश पवन कुमार श्रीवास्तव ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। 25 हजार रुपये अर्थदंड़ भी लगाया गया है। इस मामले में गांव के चौकीदार इंद्रजीत की तहरीर पर केस दर्ज हुआ था।
सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी संतोष कुमार मिश्र ने बताया कि तीन जनवरी 1999 को विशुनपुर भडेहर गांव के पूरब नहर के पास एक शव मिला था। वादी मुकदमा इंद्रजीत चौकीदार ग्राम विशुनपुर भडेहर ने कोठीभार थाने में तहरीर दी थी। थाने में केस दर्ज होने के बाद प्रकरण की विवेचना शुरू हुई। विवेचक ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। अज्ञात शव का फोटो देखकर उसकी पहचान मृतक के बेटे घनश्याम ने रामलक्षन के रूप में की।
विवेचना के दौरान ही मृतक की हत्या के आरोप में बेचू मोहन, गुलाब, अरविंद व राजेश्वर का नाम प्रकाश में आया। विवेचक ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। विवेचक ने अन्य चश्मदीदों का बयान लेकर आरोपपत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। तत्कालीन मुख्य न्यायिक मजिट्रेट, महराजगंज ने अपने आदेश सात जनवरी .2002 में अभियुक्त बेचू, मोहन, गुलाब, अरविंद व राजेश्वर का मामला परीक्षण के लिए सत्र न्यायालय में भेजा। न्यायालय ने सुनवाई के दौरान अन्य आरोपियों पर दोष सिद्ध नहीं होने पर बरी कर दिया। बेचू को दोषी पाए जाने पर सजा सुनाई गई।
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संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। ठूठीबारी थाना क्षेत्र के गडौरा गांव के बेचू को तीन जनवरी 1999 को हुई हत्या के मामले में दोषी पाए जाने पर अपर सत्र न्यायाधीश पवन कुमार श्रीवास्तव ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। 25 हजार रुपये अर्थदंड़ भी लगाया गया है। इस मामले में गांव के चौकीदार इंद्रजीत की तहरीर पर केस दर्ज हुआ था।
सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी संतोष कुमार मिश्र ने बताया कि तीन जनवरी 1999 को विशुनपुर भडेहर गांव के पूरब नहर के पास एक शव मिला था। वादी मुकदमा इंद्रजीत चौकीदार ग्राम विशुनपुर भडेहर ने कोठीभार थाने में तहरीर दी थी। थाने में केस दर्ज होने के बाद प्रकरण की विवेचना शुरू हुई। विवेचक ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। अज्ञात शव का फोटो देखकर उसकी पहचान मृतक के बेटे घनश्याम ने रामलक्षन के रूप में की।
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विवेचना के दौरान ही मृतक की हत्या के आरोप में बेचू मोहन, गुलाब, अरविंद व राजेश्वर का नाम प्रकाश में आया। विवेचक ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। विवेचक ने अन्य चश्मदीदों का बयान लेकर आरोपपत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। तत्कालीन मुख्य न्यायिक मजिट्रेट, महराजगंज ने अपने आदेश सात जनवरी .2002 में अभियुक्त बेचू, मोहन, गुलाब, अरविंद व राजेश्वर का मामला परीक्षण के लिए सत्र न्यायालय में भेजा। न्यायालय ने सुनवाई के दौरान अन्य आरोपियों पर दोष सिद्ध नहीं होने पर बरी कर दिया। बेचू को दोषी पाए जाने पर सजा सुनाई गई।
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