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Maharajganj News: लोन चुकाने में जमीन बिकी, पति की गई जान...किस्त अभी बाकी

Tue, 01 Jul 2025 12:43 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज Updated Tue, 01 Jul 2025 12:43 AM IST
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Land sold to pay off loan, husband died... installment still pending
महराजगंज। गरीबी से लाचार महिलाओं के लिए समूह लोन का मकड़जाल बड़ी मुसीबत साबित हो रहा है। जमीन और घर के जरूरी सामान तक बिक जा रहे हैं लेकिन लोन की किस्त से पीछा नहीं छूट रहा है।
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किस्त का दबाव इनके लिए जानलेवा भी साबित हो रहा है। पनियरा क्षेत्र के बैदा गांव की एक महिला के पति की सदमे में मौत हो चुकी है। वहीं किस्त वसूली के लिए आने वाले एजेंटों की बदसलूकी से बचने के लिए महिलाएं दिन में घर छोड़कर पड़ोसी या रिश्तेदार के यहां रह रहीं हैं।
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पनियरा क्षेत्र के गांवों में माइक्रो फाइनेंस कंपनियों से कर्ज लेने वाली महिलाएं मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना झेल रही हैं। एजेंट कर्ज दिलाने के नाम पर दलालों के जरिये पहले तो भरोसा जीतते हैं, फिर किस्त वसूली के नाम पर गाली-गलौज और धमकी देने लगते हैं। रतपुरवा बैदा, सुचितपुर और मंसूरगंज गांव की पीड़ित महिलाओं ने आरोप लगाया कि एजेंट रोजाना घर पहुंचकर किस्त जमा करने के लिए दबाव बनाते हैं। जब किस्त चुकाने में असमर्थता जताती हैं तो अभद्रता करते हैं। बैदा गांव की कई महिलाओं ने बताया कि वे बेहद गरीबी में जी रहीं हैं।
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रोजमर्रा की जरूरतें भी मुश्किल से पूरी हो पातीं हैं, ऐसे में कई बार समय पर किस्त चुकाना संभव नहीं होता। एजेंट दिन में कई बार घर आकर अपमानित करते हैं। इससे डरकर कई महिलाएं दिन में घर छोड़कर पड़ोसियों या रिश्तेदारों के यहां छिपने को मजबूर हैं।
बैदा गांव की गुड़िया ने बताया कि एक महिला एजेंट के कहने पर उन्होंने समूह में शामिल होकर 50 हजार रुपये का कर्ज लिया। एजेंट ने कर्ज दिलवाने के दौरान 22 प्रतिशत ब्याज की बात छिपाई। जब किस्त चुकाने की बारी आई तो वसूली एजेंट रोजाना घर आकर धमकी देने लगे।
गुड़िया ने कहा कि पांच किस्त का दबाव इतना बढ़ गया है कि वह मानसिक रूप से बीमार महसूस करने लगी हैं। इसी गांव की आरती की कहानी और भी पीड़ादायक है। उन्होंने बताया कि उन्होंने छह किस्तों में समूह से पैसे लिए थे।

धीरे-धीरे ब्याज इतना बढ़ गया कि करीब 15 डिस्मिल जमीन बेचनी पड़ी। कर्ज के बोझ और एजेंटों की धमकी से सहमे उनके पति को हार्ट अटैक आ गया और उनकी मौत हो गई। आरती आज भी एजेंटों के डर से इधर-उधर भागती फिरतीं हैं। सुचितपुर निवासी सिंद्रावती ने बताया कि उन्होंने बेटी की शादी के लिए 1.20 लाख रुपये का कर्ज लिया था। एजेंट ने ब्याज की जानकारी नहीं दी। जब किस्त बढ़ने लगी और राशि अधिक हो गई तो एजेंट गाली-गलौज करने लगे।
जब उन्होंने ब्याज का कारण पूछा तो एजेंट ने कहा हमें तो अपने कमीशन से मतलब है, बाकी आप जानिए।
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