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Maharajganj News: जिंदा भाई को मुर्दा बता करा ली वरासत, पांच पर केस

Sun, 14 Jan 2024 02:45 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज Updated Sun, 14 Jan 2024 02:45 PM IST
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Inherited the living brother by declaring him dead, case against five
महराजगंज।
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फरेंदा थाना क्षेत्र के मौजागढ़ गांव में जिंदा व्यक्ति को मुर्दा बता कर छोटे भाई ने ही जमीन की वरासत करा ली। पीड़ित ने जब इसका विरोध किया तो आरोपी उसे जान से मारने की धमकी देने लगे। उसने थाने में भी गुहार लगाई लेकिन उसकी नहीं सुनी गई, तब पीड़ित ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। अब न्यायालय के आदेश पर पुलिस ने पीड़ित की पत्नी, छोटे भाई सहित पांच आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया है।
फरेंदा के मौजागढ़ गांव के रहने वाले पृथ्वी के अनुसार उसकी पत्नी चंदा देवी उर्फ चन्द्रावती उसे छोड़कर छोटे भाई राजेंद्र के साथ बतौर पत्नी रह रही है। आरोप है कि राजेंद्र उसके हिस्से की जमीन पर जबरन खेती करता है। बार-बार प्रार्थना पत्र देने के बाद 15 जून 2023 को पुलिस ने पृथ्वी और राजेंद्र के बीच समझौता कराया कि मामले का निस्तारण होने तक कोई भी उस जमीन पर खेती नहीं कसेगा। पृथ्वी का आरोप है कि समझौते के बाद भी राजेंद्र ने खेत में धान की रोपाई की। वह थाने पर शिकायत करने पहुंचा तो पुलिस ने उसे भगा दिया। इस पर उसने पूरे प्रकरण की जानकारी के साथ शिकायती पत्र 14 जुलाई 2023 को पुलिस अधीक्षक को भेजा। उस पर भी कोई कार्रवाई न हुई तो वह न्यायालय की शरण में गया। पृथ्वी का आरोप है कि उसके भाई ने उसे मृत बताकर उसकी जमीन की वरासत करा ली है।
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न्यायालय के आदेश पर पुलिस ने आरोपी राजेंद्र, चंदा देवी उर्फ चन्द्रावती, धीरज, उषा, बृजराज निवासी मौजागढ़ थाना फरेंदा के खिलाफ केस दर्ज किया है। थानाध्यक्ष अजित कुमार सिंह ने कहा कि मामले की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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फोटो लगाकर मृत व्यक्ति की जमीन बेच दी थी

10 सितंबर 2022 को निचलौल पुलिस ने फर्जी तरीके से बैनामा करने के मामले में उपनिबंधक सहित 11 लोगों पर केस दर्ज किया था। अखिलेश द्विवेदी गोरखपुर शहर के अलीनगर में रहते है। इनके पिता भालेन्दूदेव एवं चाचा आनंद देव और शशिदेव के नाम से निचलौल शहर में 0.4740 हेक्टेयर भूमि है। पिता भालेन्दूदेव की 7 सितंबर वर्ष 2014 को मौत हो चुकी। इसका फायदा उठाते हुए कुछ लोगों ने 19 जुलाई 2022 को भालेन्दू देव, आंनद देव व शशिदेव के स्थान पर फर्जी फोटो लगाकर उक्त भूमि को अपने नाम से बैनामा करा लिया।
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