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Maharajganj News: नेपाल में जलप्रलय के बाद 80 फीसदी कम हो गए भारतीय पर्यटक
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सूना पड़ा सोनौली बार्डर।
- पहले प्रतिदिन 1000 पर्यटक वाहन जाते थे, अब करीब 200 ही पहुंच रहे नेपाल
-काठमांडो-मुक्तिनाथ की यात्राएं ठप, लुंबिनी -भैरहवा-बुटवल तक सीमित हुआ सफर
सोनौली। नेपाल में आए जल प्रलय का असर भारत-नेपाल पर्यटन कारोबार पर साफ दिखाई देने लगा है। सोनौली सीमा से नेपाल जाने वाले पर्यटक वाहनों की संख्या में करीब 80 फीसदी तक कमी आई है। पहले प्रतिदिन 1000 वाहन सोनौली सीमा से नेपाल जाते थे अब इनकी संख्या महज 200 रह गई है।
जानकारी के अनुसार, नेपाल में जलप्रलय आने के बाद कई मार्ग ध्वस्त हो चुके हैं। सरकार सड़कों की मरम्मत में जुटी है लेकिन इस बीच पर्यटकों की संख्या में भारी कमी दर्ज की गई है। भारतीय पर्यटकों के 80 फीसदी गिरावट के कारण नेपाल पर बुरा प्रभाव पड़ा है।
रोजाना करीब 800 पर्यटक वाहनों की कमी ने सोनौली से लेकर भैरहवा तक पर्यटन कारोबार की कमर तोड़ दी है। सबसे ज्यादा असर काठमांडो, पोखरा और मुक्तिनाथ जाने वाले पर्यटकों संख्या घट गई है। फिलहाल भारतीय पर्यटक अपेक्षाकृत सुरक्षित और नजदीकी पर्यटन स्थलों लुंबिनी, भैरहवा और बुटवल तक ही जा रहे हैं।
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रोजाना 40 से 80 लाख रुपये का कारोबार प्रभावित होने का अनुमान
नेपाल सोतो रुपनदेही के अध्यक्ष श्रीचंद गुप्ता ने बताया कि पर्यटक वाहनों में आई कमी का असर केवल ट्रैवल एजेंसियों तक सीमित नहीं है। होटल, टैक्सी, रेस्टोरेंट, ढाबे, पार्किंग, पेट्रोल पंप, गाइड और सीमा क्षेत्र की दुकानों पर भी इसका असर पड़ा है। स्थानीय कारोबार के आकलन के अनुसार यदि एक पर्यटक वाहन से परिवहन, भोजन, होटल और अन्य पर्यटन सेवाओं में औसतन पांच से 10 हजार रुपये का कारोबार जुड़ा माना जाए तो रोजाना 800 वाहनों की कमी से करीब 40 से 80 लाख रुपये का कारोबार प्रभावित हो रहा है। इस हिसाब से महीने में 12 से 24 करोड़ रुपये के कारोबार पर असर पड़ने का अनुमान है।
रोजगार पर भी पड़ा असर
श्रीचंद गुप्ता ने बताया कि पर्यटकों की संख्या घटने का असर रोजगार पर भी पड़ा है। सोनौली और आसपास के होटल, ट्रैवल एजेंसी, टैक्सी तथा रेस्टोरेंट में काम करने वाले ड्राइवर, गाइड, वेटर और दैनिक मजदूरी करने वाले कर्मचारियों को पहले की तुलना में कम काम मिल रहा है। आशंका है कि यदि लंबी दूरी के नेपाल टूर जल्द शुरू नहीं हुए तो इसका असर सीजनल रोजगार पर और बढ़ सकता है।
लुंबिनी में असर नहीं, अभी ऑफ सीजन
सोनौली पर्यटन व्यवसायी राजेश शुक्ला बताते हैं कि लुंबिनी में फिलहाल बाढ़ का खास असर नहीं है। ऑफ सीजन होने के कारण इस महीने में पर्यटकों की संख्या सामान्य तौर पर भी कम रहती है। हालांकि बाढ़ के बाद थाईलैंड से आने वाले यात्रियों के काठमांडो और मुक्तिनाथ जाने का सिलसिला पूरी तरह बंद हो गया है। उन्होंने बताया कि इस समय श्रीलंका के यात्री लुंबिनी पहुंच रहे हैं। अक्तूबर के बाद थाईलैंड, म्यांमार, वियतनाम, ताइवान, जापान और कंबोडिया समेत बौद्ध देशों से यात्रियों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है।
दशहरे तक कारोबार के पटरी पर आने की उम्मीद
होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष सीपी श्रेष्ठ ने बताया कि उम्मीद है कि प्रमुख सड़क मार्गों की स्थिति सुधरने और पर्यटकों के बीच सुरक्षा का भरोसा लौटने के बाद दशहरे तक पर्यटन कारोबार में सुधार शुरू हो सकता है। इसके बाद अक्तूबर-नवंबर के पर्यटन सीजन में विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। नेपाल सरकार भी बाढ़ के बाद पर्यटन को दोबारा पटरी पर लाने के लिए ''नेपाल कॉलिंग'' अभियान चला रही है। इसके जरिए पर्यटकों को यह संदेश दिया जा रहा है कि बाढ़ से प्रभावित इलाकों के अलावा नेपाल के प्रमुख पर्यटन स्थल पर्यटकों के लिए खुले हैं।
पर्यटन के साथ निर्यात कारोबार भी प्रभावित
बाढ़ का असर केवल पर्यटन कारोबार पर नहीं पड़ा है। सोनौली सीमा से नेपाल जाने वाले मालवाहक वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित हुई है। बाढ़ के बाद सीमा पर ट्रकों की लंबी कतारें लगीं। हालांकि नेपाल में बाढ़ की वजह से जरूरी वस्तुओं की मांग बढ़ने के कारण खाद्य सामग्री, फल-सब्जी और अन्य जरूरी सामान के कारोबार में अलग तरह की गतिविधि देखने को मिल रही है।
अक्तूबर से बौद्ध देशों के पर्यटकों पर नजर
सोनौली के पर्यटन कारोबारियों को अक्टूबर के बाद थाईलैंड, म्यांमार, वियतनाम, ताइवान, जापान और कंबोडिया जैसे बौद्ध देशों से आने वाले पर्यटकों से बड़ी उम्मीद है। इन देशों के पर्यटक लुंबिनी को प्रमुखता से अपनी यात्रा में शामिल करते हैं। विदेशी पर्यटकों का सीजन शुरू होने और सड़क संपर्क सामान्य होने पर सोनौली के पर्यटन कारोबार को दोबारा रफ्तार मिलने की उम्मीद है।
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-काठमांडो-मुक्तिनाथ की यात्राएं ठप, लुंबिनी -भैरहवा-बुटवल तक सीमित हुआ सफर
सोनौली। नेपाल में आए जल प्रलय का असर भारत-नेपाल पर्यटन कारोबार पर साफ दिखाई देने लगा है। सोनौली सीमा से नेपाल जाने वाले पर्यटक वाहनों की संख्या में करीब 80 फीसदी तक कमी आई है। पहले प्रतिदिन 1000 वाहन सोनौली सीमा से नेपाल जाते थे अब इनकी संख्या महज 200 रह गई है।
जानकारी के अनुसार, नेपाल में जलप्रलय आने के बाद कई मार्ग ध्वस्त हो चुके हैं। सरकार सड़कों की मरम्मत में जुटी है लेकिन इस बीच पर्यटकों की संख्या में भारी कमी दर्ज की गई है। भारतीय पर्यटकों के 80 फीसदी गिरावट के कारण नेपाल पर बुरा प्रभाव पड़ा है।
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रोजाना करीब 800 पर्यटक वाहनों की कमी ने सोनौली से लेकर भैरहवा तक पर्यटन कारोबार की कमर तोड़ दी है। सबसे ज्यादा असर काठमांडो, पोखरा और मुक्तिनाथ जाने वाले पर्यटकों संख्या घट गई है। फिलहाल भारतीय पर्यटक अपेक्षाकृत सुरक्षित और नजदीकी पर्यटन स्थलों लुंबिनी, भैरहवा और बुटवल तक ही जा रहे हैं।
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रोजाना 40 से 80 लाख रुपये का कारोबार प्रभावित होने का अनुमान
नेपाल सोतो रुपनदेही के अध्यक्ष श्रीचंद गुप्ता ने बताया कि पर्यटक वाहनों में आई कमी का असर केवल ट्रैवल एजेंसियों तक सीमित नहीं है। होटल, टैक्सी, रेस्टोरेंट, ढाबे, पार्किंग, पेट्रोल पंप, गाइड और सीमा क्षेत्र की दुकानों पर भी इसका असर पड़ा है। स्थानीय कारोबार के आकलन के अनुसार यदि एक पर्यटक वाहन से परिवहन, भोजन, होटल और अन्य पर्यटन सेवाओं में औसतन पांच से 10 हजार रुपये का कारोबार जुड़ा माना जाए तो रोजाना 800 वाहनों की कमी से करीब 40 से 80 लाख रुपये का कारोबार प्रभावित हो रहा है। इस हिसाब से महीने में 12 से 24 करोड़ रुपये के कारोबार पर असर पड़ने का अनुमान है।
रोजगार पर भी पड़ा असर
श्रीचंद गुप्ता ने बताया कि पर्यटकों की संख्या घटने का असर रोजगार पर भी पड़ा है। सोनौली और आसपास के होटल, ट्रैवल एजेंसी, टैक्सी तथा रेस्टोरेंट में काम करने वाले ड्राइवर, गाइड, वेटर और दैनिक मजदूरी करने वाले कर्मचारियों को पहले की तुलना में कम काम मिल रहा है। आशंका है कि यदि लंबी दूरी के नेपाल टूर जल्द शुरू नहीं हुए तो इसका असर सीजनल रोजगार पर और बढ़ सकता है।
लुंबिनी में असर नहीं, अभी ऑफ सीजन
सोनौली पर्यटन व्यवसायी राजेश शुक्ला बताते हैं कि लुंबिनी में फिलहाल बाढ़ का खास असर नहीं है। ऑफ सीजन होने के कारण इस महीने में पर्यटकों की संख्या सामान्य तौर पर भी कम रहती है। हालांकि बाढ़ के बाद थाईलैंड से आने वाले यात्रियों के काठमांडो और मुक्तिनाथ जाने का सिलसिला पूरी तरह बंद हो गया है। उन्होंने बताया कि इस समय श्रीलंका के यात्री लुंबिनी पहुंच रहे हैं। अक्तूबर के बाद थाईलैंड, म्यांमार, वियतनाम, ताइवान, जापान और कंबोडिया समेत बौद्ध देशों से यात्रियों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है।
दशहरे तक कारोबार के पटरी पर आने की उम्मीद
होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष सीपी श्रेष्ठ ने बताया कि उम्मीद है कि प्रमुख सड़क मार्गों की स्थिति सुधरने और पर्यटकों के बीच सुरक्षा का भरोसा लौटने के बाद दशहरे तक पर्यटन कारोबार में सुधार शुरू हो सकता है। इसके बाद अक्तूबर-नवंबर के पर्यटन सीजन में विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। नेपाल सरकार भी बाढ़ के बाद पर्यटन को दोबारा पटरी पर लाने के लिए ''नेपाल कॉलिंग'' अभियान चला रही है। इसके जरिए पर्यटकों को यह संदेश दिया जा रहा है कि बाढ़ से प्रभावित इलाकों के अलावा नेपाल के प्रमुख पर्यटन स्थल पर्यटकों के लिए खुले हैं।
पर्यटन के साथ निर्यात कारोबार भी प्रभावित
बाढ़ का असर केवल पर्यटन कारोबार पर नहीं पड़ा है। सोनौली सीमा से नेपाल जाने वाले मालवाहक वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित हुई है। बाढ़ के बाद सीमा पर ट्रकों की लंबी कतारें लगीं। हालांकि नेपाल में बाढ़ की वजह से जरूरी वस्तुओं की मांग बढ़ने के कारण खाद्य सामग्री, फल-सब्जी और अन्य जरूरी सामान के कारोबार में अलग तरह की गतिविधि देखने को मिल रही है।
अक्तूबर से बौद्ध देशों के पर्यटकों पर नजर
सोनौली के पर्यटन कारोबारियों को अक्टूबर के बाद थाईलैंड, म्यांमार, वियतनाम, ताइवान, जापान और कंबोडिया जैसे बौद्ध देशों से आने वाले पर्यटकों से बड़ी उम्मीद है। इन देशों के पर्यटक लुंबिनी को प्रमुखता से अपनी यात्रा में शामिल करते हैं। विदेशी पर्यटकों का सीजन शुरू होने और सड़क संपर्क सामान्य होने पर सोनौली के पर्यटन कारोबार को दोबारा रफ्तार मिलने की उम्मीद है।