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Maharajganj News: कॅरिअर की चिंता से बिगड़ रहा स्वास्थ्य...शुगर, ब्लड प्रेशर की चपेट में आ रहे युवा
Sat, 16 Dec 2023 12:58 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Sat, 16 Dec 2023 12:58 AM IST
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महराजगंज। हाई ब्लड प्रेशर, शुगर, डिप्रेशन किसी समय में 40 से अधिक उम्र के लोगों की बीमारियां मानी जाती थीं। अब यह युवाओं को चपेट में ले रही हैं। चौकाने वाली बात है की 25 से 35 वर्ष तक के युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। प्रत्येक दिन 25 से 30 युवा जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं।
डॉक्टरों के अनुसार, नौकरी या व्यवसाय में प्रतिस्पर्धा में रहने के लिए उन्हें क्षमता से कहीं ज्यादा काम करना पड़ रहा है जिससे दिनचर्या और खानपान प्रभावित हो रही है। यही वजह है कि युवा वर्ग में शुगर, ब्लड प्रेशर जैसी समस्या देखने को मिल रही है। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी, पढ़ाई के बाद कॅरिअर बनाने की चिंता, नौकरी आदि की परेशानियों ने युवाओं को कम उम्र में ही रोगी बनाना शुरू कर दिया है।
मनोवैज्ञानिक मामलों के जानकार कहते हैं कि युवा वर्ग अपनी योग्यता और क्षमता से अधिक काम करता है और उससे अधिक चाहता है। काम न मिलने से उपजा अवसाद बीमारियों को जन्म दे रहा है तो काम ज्यादा होने का तनाव व अधिक पैसा कमाने की इच्छा भी बीमारी बढ़ाने का काम कर रही है। जिला अस्पताल की ओपीडी में पहुंचे एक निजी कंपनी में काम करने वाले राघवेंद्र ने बताया कि चक्कर एक दिन आ रहा तो सोचा ऐसे ही हो गया होगा, लेकिन आज भी समस्या हुई तो अस्पताल जांच कराने आया। पता चला की बीपी बढ़ गई है। निजी बैंक के कैशियर सत्यजीत रॉय ने बताया कि काम का दबाव ज्यादा रहने के कारण दिनचर्या प्रभावित हो रही है। जांच कराया तो शुगर का स्तर बढ़ा हुआ है।
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अनियमित दिनचर्या भी इस तरह की बीमारियों का बन रहीं कारण
आयुष अनुभाग के डॉ. अनिल कुमार कहते हैं कि केवल तनाव या बेरोजगारी की चिंता ही नहीं फास्टफूड और अनियमित दिनचर्या भी इस तरह की बीमारियों का कारण बन रही हैं। लोग भागदौड़ भरी जिंदगी में खाने की भी परवाह नहीं कर रहे। जो कुछ मिल रहा है, उसे खा रहे हैं। फास्ट फूड की लत भी उन्हें घेर रही है। इसके अलावा दिनचर्या भी अनियमित हो रही है। देर रात तक काम करना, लैपटॉप या मोबाइल फोन पर लगे रहना और सुबह देर से उठना भी युवाओं को बीमार कर रहा है।
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बीमारियों से बचने के लिए करें ये उपाय
-बैलेंस डाइट लें
-रोज 30-40 मिनट शारीरिक व्यायाम करें, सकारात्मक सोच रखें।
-नमक व मीठा कम प्रयोग करें
-वसा युक्त खाने से बचें। सिगरेट, तंबाकू, बीड़ी और अल्कोहल इस्तेमाल न करें।
-जल्दी सोएं और सूर्योदय से पहले उठने की कोशिश करें।
-रात का भोजन सोने से दो घंटा पहले कर लें।
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आजकल युवाओं के खर्च ज्यादा है और आमदनी कम है। नौकरियां नहीं मिलने के कारण युवा बेरोजगार भी हैं। जितनी शिक्षा प्राप्त की है, उसके हिसाब से काम नहीं मिल रहा है, जिससे उन्हें पहले अवसाद और फिर अन्य बीमारियां चपेट में ले रही हैं। हाई बीपी और शुगर तो कॉमन बीमारियां बन चुकी हैं। इसके अलावा अनियमित खानपान भी बहुत बड़ा कारण है। अनियमित और बाहरी खाने से बचें। घर का खाना खाएं और तनाव ज्यादा न लें।
-डॉ. एवी त्रिपाठी, जनरल फिजीशियन, जिला अस्पताल
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पैसा और शोहरत की दौड़ में युवा ज्यादा काम से भी परहेज नहीं करते। दरअसल, पढ़ाई के बाद जब उन्हें मनमाफिक काम या नौकरी नहीं मिलती तो डिप्रेशन उन्हें घेरने लगता है। इसका मुख्य कारण है कि वह पढ़ाई तो करते हैं लेकिन उसकी प्लानिंग नहीं होती। जिसने जो कह दिया, उसे मान लिया और उसकी ओर दौड़ पड़ते हैं। इस चक्कर में युवा अपनी रुचि और क्षमता का भी ध्यान नहीं रखते और कम उम्र में ही शुगर, बीपी आदि बीमारियां उन्हें घेरने लगती हैं। सही तो यह है कि नौवीं क्लास के बाद ही अभिभावक इस पर ध्यान दें और बच्चे की रुचि के अनुसार ही उन्हें अपना कॅरियर चुनने दें।
-डॉ. गुलाब चंद, मनोवैज्ञानिक
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डॉक्टरों के अनुसार, नौकरी या व्यवसाय में प्रतिस्पर्धा में रहने के लिए उन्हें क्षमता से कहीं ज्यादा काम करना पड़ रहा है जिससे दिनचर्या और खानपान प्रभावित हो रही है। यही वजह है कि युवा वर्ग में शुगर, ब्लड प्रेशर जैसी समस्या देखने को मिल रही है। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी, पढ़ाई के बाद कॅरिअर बनाने की चिंता, नौकरी आदि की परेशानियों ने युवाओं को कम उम्र में ही रोगी बनाना शुरू कर दिया है।
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मनोवैज्ञानिक मामलों के जानकार कहते हैं कि युवा वर्ग अपनी योग्यता और क्षमता से अधिक काम करता है और उससे अधिक चाहता है। काम न मिलने से उपजा अवसाद बीमारियों को जन्म दे रहा है तो काम ज्यादा होने का तनाव व अधिक पैसा कमाने की इच्छा भी बीमारी बढ़ाने का काम कर रही है। जिला अस्पताल की ओपीडी में पहुंचे एक निजी कंपनी में काम करने वाले राघवेंद्र ने बताया कि चक्कर एक दिन आ रहा तो सोचा ऐसे ही हो गया होगा, लेकिन आज भी समस्या हुई तो अस्पताल जांच कराने आया। पता चला की बीपी बढ़ गई है। निजी बैंक के कैशियर सत्यजीत रॉय ने बताया कि काम का दबाव ज्यादा रहने के कारण दिनचर्या प्रभावित हो रही है। जांच कराया तो शुगर का स्तर बढ़ा हुआ है।
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अनियमित दिनचर्या भी इस तरह की बीमारियों का बन रहीं कारण
आयुष अनुभाग के डॉ. अनिल कुमार कहते हैं कि केवल तनाव या बेरोजगारी की चिंता ही नहीं फास्टफूड और अनियमित दिनचर्या भी इस तरह की बीमारियों का कारण बन रही हैं। लोग भागदौड़ भरी जिंदगी में खाने की भी परवाह नहीं कर रहे। जो कुछ मिल रहा है, उसे खा रहे हैं। फास्ट फूड की लत भी उन्हें घेर रही है। इसके अलावा दिनचर्या भी अनियमित हो रही है। देर रात तक काम करना, लैपटॉप या मोबाइल फोन पर लगे रहना और सुबह देर से उठना भी युवाओं को बीमार कर रहा है।
बीमारियों से बचने के लिए करें ये उपाय
-बैलेंस डाइट लें
-रोज 30-40 मिनट शारीरिक व्यायाम करें, सकारात्मक सोच रखें।
-नमक व मीठा कम प्रयोग करें
-वसा युक्त खाने से बचें। सिगरेट, तंबाकू, बीड़ी और अल्कोहल इस्तेमाल न करें।
-जल्दी सोएं और सूर्योदय से पहले उठने की कोशिश करें।
-रात का भोजन सोने से दो घंटा पहले कर लें।
आजकल युवाओं के खर्च ज्यादा है और आमदनी कम है। नौकरियां नहीं मिलने के कारण युवा बेरोजगार भी हैं। जितनी शिक्षा प्राप्त की है, उसके हिसाब से काम नहीं मिल रहा है, जिससे उन्हें पहले अवसाद और फिर अन्य बीमारियां चपेट में ले रही हैं। हाई बीपी और शुगर तो कॉमन बीमारियां बन चुकी हैं। इसके अलावा अनियमित खानपान भी बहुत बड़ा कारण है। अनियमित और बाहरी खाने से बचें। घर का खाना खाएं और तनाव ज्यादा न लें।
-डॉ. एवी त्रिपाठी, जनरल फिजीशियन, जिला अस्पताल
पैसा और शोहरत की दौड़ में युवा ज्यादा काम से भी परहेज नहीं करते। दरअसल, पढ़ाई के बाद जब उन्हें मनमाफिक काम या नौकरी नहीं मिलती तो डिप्रेशन उन्हें घेरने लगता है। इसका मुख्य कारण है कि वह पढ़ाई तो करते हैं लेकिन उसकी प्लानिंग नहीं होती। जिसने जो कह दिया, उसे मान लिया और उसकी ओर दौड़ पड़ते हैं। इस चक्कर में युवा अपनी रुचि और क्षमता का भी ध्यान नहीं रखते और कम उम्र में ही शुगर, बीपी आदि बीमारियां उन्हें घेरने लगती हैं। सही तो यह है कि नौवीं क्लास के बाद ही अभिभावक इस पर ध्यान दें और बच्चे की रुचि के अनुसार ही उन्हें अपना कॅरियर चुनने दें।
-डॉ. गुलाब चंद, मनोवैज्ञानिक