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Maharajganj News: बकरी का पैसा, गाय की पहचान, पशुपालन विभाग की मिलीभगत से हजम कर गए सरकारी रकम

Sun, 05 Jul 2026 01:34 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो नीलोत्पल दूबे, महराजगंज
नीलोत्पल दूबे, महराजगंज Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Sun, 05 Jul 2026 01:34 AM IST
सार

40 हजार रुपये से लाभार्थी को चार बकरियां व एक बकरा खरीदना होता है। जिले में खेल यहीं से शुरू हुआ। धानी विकास खंड के बी पैक्स बेलसड़ के सभापति प्रदीप ने जिलाधिकारी और मुख्य पशु चिकित्साधिकारी (सीवीओ) को शपथपत्र देकर बताया कि उनके गांव में वर्ष 2022-23 में दो लाभार्थियों को 10-10 हजार रुपये दिए गए। बाकी ब्लॉकस्तरीय अस्पताल के जिम्मेदार खा गए।

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In Maharajganj, government funds were embezzled in collusion with the Animal Husbandry Department.
पशुओं को खिलाए जाने वाली घास की जड़ें

विस्तार

पशुपालन के जरिये अनुसूचित जाति व निराश्रितों के आय सृजन के लिए सरकार की बकरी पालन योजना जिले में कुछ ऐसी परवान चढ़ी कि अनुदानित बकरियां गाय-भैंस में तब्दील हो गईं। धानी विकास खंड में ऐसे ही मामले के उजागर होने से हड़कंप मच गया है। अब विभाग पूरे जिले में जांच कराने की बात कह रहा है।

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जिले में पशु चिकित्सा विभाग की ओर से ग्रामीण क्षेत्र में अनुसूचित, विधवा या निराश्रित परिवारों के आय सृजन के लिए उत्तर प्रदेश बकरी पालन योजना-2022 प्रभावी है। इस योजना के तहत लाभार्थी को चयन के बाद 45 हजार रुपये अनुदान मिलता है। इसमें से 40 हजार रुपये लाभार्थी के बैंक खाते में जाते हैं।
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बाकी पांच हजार स्थानीय पशु चिकित्सा विभाग के पास जमा हो जाता है। इसमें से चार हजार रुपये स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर बकरी के इलाज और उसकी नियमित जांच पर और एक हजार बीमा पर खर्च होता है।
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40 हजार रुपये से लाभार्थी को चार बकरियां व एक बकरा खरीदना होता है। जिले में खेल यहीं से शुरू हुआ। धानी विकास खंड के बी पैक्स बेलसड़ के सभापति प्रदीप ने जिलाधिकारी और मुख्य पशु चिकित्साधिकारी (सीवीओ) को शपथपत्र देकर बताया कि उनके गांव में वर्ष 2022-23 में दो लाभार्थियों को 10-10 हजार रुपये दिए गए।

बाकी ब्लॉकस्तरीय अस्पताल के जिम्मेदार खा गए। लाभार्थियों ने योजना के तहत बकरी खरीदी ही नहीं। अलबत्ता विभाग से मिलकर गांव की गाय व भैंस के कानों में टैग करा दिया। इसके सहारे तीन वर्ष तक दवा, जांच व बीमा के लिए मिलने वाली रकम भी जिम्मेदारों ने ले लिया। बकौल, प्रदीप उन्होंने चार बिंदुओं पर जांच की मांग की है।

कागजों में रिकॉर्ड होता रहा मेंटेन
जिले के 12 विकास खंडों में इस योजना के तहत कुल 77 लाभार्थियों को बकरी पालन पर अनुदान दिया गया। सभापति की शिकायत के मुताबिक, लाभार्थियों व ब्लॉक पशु चिकित्सा विभाग की टीम ने लाभार्थियों से मिलकर अनुदान की राशि आपस में बांट ली।

योजना को पारदर्शी बनाने व बीमा के लिए इयर टैगिंग की अनिवार्यता का काट यह खोज निकाला कि जो टैगिंग अनुदान वाली बकरियों के कान में लगनी थी वह आसपास क्षेत्र के गाय या अन्य मवेशियों के कान में कर दी गई। इससे कागज में बकरियों का कुनबा बना रहा। इतना ही नहीं ब्लॉक चिकित्सकों की टीम कागज में ही गांव भ्रमण व दवा उपलब्ध कराने की अनिवार्यता को भी मेंटेन कर रखा।


निराश्रित वर्ग के लिए संचालित बकरी पालन अनुदान में बकरी की जगह गाय के कान मेें टैगिंग कर गड़बड़ी किए जाने की शिकायत मिली है। धानी ब्लाॅक की शिकायत बी पैक्स सभापति ने की है। उक्त शिकायतों के क्रम में जांच टीम गठित की गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी: डाॅ. एजाज अहमद, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी (सीवीओ), महराजगंज

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