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Maharajganj News: मोती पालन कर समृद्धि की ओर कदम बढ़ाएंगे जनपद के किसान

Fri, 02 Oct 2026 02:10 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 02 Oct 2026 02:10 AM IST
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Farmers of the district will move towards prosperity through pearl farming.
- जिले में पहली बार मोती संवर्धन योजना का ट्रायल शुरू
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- 11 लोगों ने किया आवेदन, मत्स्य पालन के साथ भी किया जा सकेगा मोती पालन
महराजगंज। किसानों की आय बढ़ाने के लिए जिले में मोती पालन को बढ़ावा देने की तैयारी शुरू हो गई है। प्रदेश सरकार की पहल पर मत्स्य विभाग ने मोती संवर्धन योजना का ट्रायल शुरू किया है। शासन की ओर से जिले में तीन यूनिट लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। योजना के लिए अब तक 11 लोगों ने आवेदन किया है।
शासन की ओर से निर्धारित एक यूनिट में करीब दो हजार सीपों का पालन किया जाएगा। इसके लिए लगभग 1.50 लाख रुपये की लागत आएगी। विभाग के अनुसार एक सीप के संवर्धन और रखरखाव पर औसतन 62 रुपये खर्च आता है। सीपों की खरीद, उनके भीतर न्यूक्लियस यानी नाभिक का रोपण, एंटीबायोटिक उपचार और तालाब में पोषक तत्वों के प्रबंधन जैसी प्रक्रिया शासन से नामित संस्थाओं के माध्यम से कराई जाएगी।
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जानकारों की माने तो सीप के भीतर नाभिक रोपित करने के बाद उसे मोती के रूप में विकसित होने में करीब 16 से 18 महीने का समय लगता है। सीप अपने भीतर प्रवेश किए गए नाभिक से बचाव के लिए नेकर नामक पदार्थ की परतें बनाती है। ये परतें धीरे-धीरे नाभिक के चारों ओर जमा होती जाती हैं और बाद में चमकदार मोती का रूप लेती हैं।
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मछली पालन के साथ भी किया जा सकता है मोती पालन
मोती पालन की खासियत यह है कि इसे मछली पालन के साथ भी किया जा सकता है। तालाब के ऊपरी या मध्य हिस्से में नायलॉन की बैग या टोकरियों में सीपों को लटकाकर उनका पालन किया जाता है। इससे किसान एक ही तालाब से मछली पालन के साथ मोती उत्पादन भी कर सकते हैं।

तालाब के आकार के अनुसार बढ़ेगा निवेश
विभाग के अनुसार खेत तालाब योजना के तहत निर्मित 440 वर्ग मीटर क्षेत्रफल वाले तालाब में भी मोती पालन किया जा सकता है। इसमें करीब दो हजार सीपों का पालन किया जाएगा और अनुमानित लागत लगभग 1.50 लाख रुपये होगी। वहीं, निजी कच्चे तालाब का न्यूनतम क्षेत्रफल 0.500 एकड़ से अधिक और एक एकड़ तक होने पर भी मोती पालन किया जा सकता है। इस श्रेणी के तालाब में करीब पांच हजार सीपों का पालन किया जा सकेगा। इसके लिए अनुमानित लागत करीब 3.50 लाख रुपये होगी।
इसी तरह एक एकड़ से अधिक क्षेत्रफल वाले तालाब में करीब 15 हजार सीपों का पालन किया जा सकता है। इस स्तर पर मोती पालन के लिए अनुमानित लागत करीब 10 लाख रुपये तक आएगी। इस प्रकार तालाब के आकार के अनुसार सीपों की संख्या और निवेश की क्षमता बढ़ाई जा सकती है।


40 प्रतिशत राज्यांश, 60 प्रतिशत लाभार्थी अंश
सहायक निदेशक मत्स्य संजय कुमार ने बताया कि मोती संवर्धन योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को अनुदान दिया जाएगा। योजना में 40 प्रतिशत राज्यांश तथा 60 प्रतिशत लाभार्थी अंश निर्धारित किया गया है। फिलहाल जिले में योजना को ट्रायल के तौर पर संचालित किया जा रहा है। आवेदन करने वाले लोगों में से पात्रता के आधार पर लाभार्थियों का चयन किया जाएगा। जिले में पहली बार मोती पालन की शुरुआत होने से विभाग इसके परिणामों पर नजर रखेगा। चयनित लाभार्थियों को मोती पालन की तकनीकी प्रक्रिया और सीपों के रखरखाव से संबंधित जानकारी भी उपलब्ध कराई जाएगी। ट्रायल सफल रहने पर जिले में इस गतिविधि को आगे बढ़ाने की संभावनाएं तलाशी जा सकती हैं।
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