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श्यामदेउरवां के एएनएम सेंटर पर नहीं दिखते स्वास्थ्यकर्मी
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श्यामदेउरवां के एएनएम सेंटर पर नहीं दिखते स्वास्थ्यकर्मी
- पेयजल की व्यवस्था नहीं होने से लोगों को होती है परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
परतावल। क्षेत्र के श्यामदेउरवां में एनएनएम सेंटर बेमतलब साबित हो रहा है। यहां महीने में एक से दो दिन ही स्वास्थ्य कर्मी उपस्थित रहते हैं। देखरेख के अभाव में सेंटर संसाधन विहीन हो गया। यहां शुद्ध पेयजल की व्यवस्था भी नहीं है। टीकाकरण कराने आने वाली महिलाओं को दूषित पानी पीना पड़ता है।
ग्रामीण मनीष दूबे, कुलदीप, धनेश, देवेन्द्र, राजकुमार, गुड्डू ने कहा कि सेंटर के बाहर स्थित इंडिया मार्का हैंडपंप के चारो तरफ गंदगी का अंबार लगा हुआ है। जलनिकासी की भी व्यवस्था नहीं है। केंद्र तक जाने के लिए सुगम रास्ता नहीं है। मुख्य दरवाजे के सामने गंदगी फैली हुई है। बारिश के वजह से रास्ता कीचड़युक्त है। केंद्र महीने में एक दो दिन ही खुलता है। जिससे यहां के गर्भवती महिलाओं को सीएचसी परतावल जाना पड़ता है। इस संबंध में स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी वेद प्रकाश चौरसिया ने बताया कि संचारी नियंत्रण अभियान ‘दस्तक’ के तहत एएनएम और आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करने में लगी है। इसके वजह से कर्मचारी सेंटर पर नहीं दिखते हैं। इसके बाद नियमित सेंटर पर कर्मचारियों की उपस्थिति रहेगी।
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- पेयजल की व्यवस्था नहीं होने से लोगों को होती है परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
परतावल। क्षेत्र के श्यामदेउरवां में एनएनएम सेंटर बेमतलब साबित हो रहा है। यहां महीने में एक से दो दिन ही स्वास्थ्य कर्मी उपस्थित रहते हैं। देखरेख के अभाव में सेंटर संसाधन विहीन हो गया। यहां शुद्ध पेयजल की व्यवस्था भी नहीं है। टीकाकरण कराने आने वाली महिलाओं को दूषित पानी पीना पड़ता है।
ग्रामीण मनीष दूबे, कुलदीप, धनेश, देवेन्द्र, राजकुमार, गुड्डू ने कहा कि सेंटर के बाहर स्थित इंडिया मार्का हैंडपंप के चारो तरफ गंदगी का अंबार लगा हुआ है। जलनिकासी की भी व्यवस्था नहीं है। केंद्र तक जाने के लिए सुगम रास्ता नहीं है। मुख्य दरवाजे के सामने गंदगी फैली हुई है। बारिश के वजह से रास्ता कीचड़युक्त है। केंद्र महीने में एक दो दिन ही खुलता है। जिससे यहां के गर्भवती महिलाओं को सीएचसी परतावल जाना पड़ता है। इस संबंध में स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी वेद प्रकाश चौरसिया ने बताया कि संचारी नियंत्रण अभियान ‘दस्तक’ के तहत एएनएम और आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करने में लगी है। इसके वजह से कर्मचारी सेंटर पर नहीं दिखते हैं। इसके बाद नियमित सेंटर पर कर्मचारियों की उपस्थिति रहेगी।
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