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Maharajganj News: मत्स्य पालन को बढ़ावा देने पर जोर
Mon, 06 Jan 2025 12:59 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Mon, 06 Jan 2025 12:59 AM IST
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महराजगंज। मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए 18 लाभार्थियों का चयन किया गया है। इस योजना के तहत लाभार्थियों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। योजना का मुख्य उद्देश्य जिले में मछली पालन के व्यवसाय को प्रोत्साहित करना और यहां के मछली उत्पादन को बढ़ाना है।
जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना के माध्यम से सरकार लाभार्थियों को तालाबों की देखभाल, मछलियों की ब्रीडिंग, आहार और अन्य आवश्यक संसाधन प्रदान करेगी। वित्तीय वर्ष 2023-2024 में योजना के तहत 18 लाभार्थियों का चयन किया गया है। इनमें से सात को पहले ही 8,10,080 रुपये की सब्सिडी राशि प्रदान की गई है। योजना के तहत चार वर्ष पुराने पट्टे के तालाब मत्स्य पालन के लिए उपयुक्त माने जाते हैं। योजना में उन लाभार्थियों को 40 प्रतिशत की सब्सिडी देने की व्यवस्था है जिनके पास ऐसे तालाब हैं। परियोजना की लागत चार लाख रुपये प्रति हेक्टेयर निर्धारित की गई है। इसे तालाबों के विकास और मत्स्य पालन के लिए जरूरी सुविधाओं के निर्माण में खर्च किया जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि जिले में मछली की अच्छी किस्मों की उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे न केवल स्थानीय बाजार में ताजे मछली का आयात होगा बल्कि मछली पालन से जुड़े व्यवसायों को भी सीधा लाभ मिलेगा।
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जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना के माध्यम से सरकार लाभार्थियों को तालाबों की देखभाल, मछलियों की ब्रीडिंग, आहार और अन्य आवश्यक संसाधन प्रदान करेगी। वित्तीय वर्ष 2023-2024 में योजना के तहत 18 लाभार्थियों का चयन किया गया है। इनमें से सात को पहले ही 8,10,080 रुपये की सब्सिडी राशि प्रदान की गई है। योजना के तहत चार वर्ष पुराने पट्टे के तालाब मत्स्य पालन के लिए उपयुक्त माने जाते हैं। योजना में उन लाभार्थियों को 40 प्रतिशत की सब्सिडी देने की व्यवस्था है जिनके पास ऐसे तालाब हैं। परियोजना की लागत चार लाख रुपये प्रति हेक्टेयर निर्धारित की गई है। इसे तालाबों के विकास और मत्स्य पालन के लिए जरूरी सुविधाओं के निर्माण में खर्च किया जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि जिले में मछली की अच्छी किस्मों की उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे न केवल स्थानीय बाजार में ताजे मछली का आयात होगा बल्कि मछली पालन से जुड़े व्यवसायों को भी सीधा लाभ मिलेगा।
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