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Maharajganj News: शिक्षा हुई महंगी...नर्सरी के बच्चों के प्रवेश पर खर्च हो रहे 20 हजार
Sun, 14 Apr 2024 10:02 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Sun, 14 Apr 2024 10:02 PM IST
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फोटो
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नर्सरी और कक्षा-एक में प्रवेश कराने में 15 से 20 हजार रुपये लग जा रहे, मार्च में इनकम टैक्स के चलते अभिभावकों की जेब पहले से खाली
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। स्कूलों में नए सत्र की शुरुआत हो गई है। प्राइवेट स्कूलों में बच्चों के दाखिले का खर्च इतना बढ़ गया है कि घर के खर्च का बजट बिगड़ जा रहा है। नर्सरी और कक्षा एक में प्रवेश कराने में 15 से 20 हजार रुपये लग जा रहे हैं। मार्च में इनकम टैक्स के चलते अभिभावकों की जेब पहले से खाली थी, अब बच्चों के प्रवेश के लिए उन्हें कर्ज का सहारा लेना पड़ रहा है।
सत्र शुरू होने के साथ ही किताबें, यूनिफॉर्म आदि की खरीदारी शुरू हो गई है। कॉपी-किताबों की खरीदारी के लिए दुकानों पर भीड़ उमड़ने लगी है। किताबों की कीमत में 20 से 50 प्रतिशत तक का इजाफा हो गया है। हर अभिभावक चाहता है कि उसका बच्चा अच्छे स्कूल में पढ़ाई करें, लेकिन दूसरी तरफ उनकी आर्थिक स्थिति आड़े आ रही है। एक तरफ प्राइवेट स्कूल की भारी भरकम फीस तो दूसरी तरफ किताबों के बढ़ रहे दाम ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है।
मार्च में इनकम टैक्स और होली के बाद अब अप्रैल में महंगी किताबों ने उनके माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। अभिभावक आत्माराम गुप्त ने बताया कि महंगाई में बच्चों को पढ़ाना मुश्किल हो गया है। किताब काॅपी के रेट में बढ़ोत्तरी होने से समस्या हो रही है। अभिभावक दिनेश कुमार ने बताया कि बच्चों की पढ़ाई में खर्च वर्तमान में बढ़ गए हैं। ड्रेस से लेकर काॅपी किताब में रकम ज्यादा खर्च हो रहे हैं।
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स्कूल वालों ने एक खास प्रकाशक से किया करार
निजी स्कूलों की ओर से पुस्तक व ड्रेस के लिए अपनी दुकान सेट की गई है। आपको ड्रेस तो कहीं मिल जाएगी, लेकिन लोगो के साथ केवल उसी दुकान पर मिलेंगी, जिसकी स्कूल से अच्छी सेटिंग होगी। ऐसे में 600 रुपये की ड्रेस लोगो के साथ 1200 की हो जाती है। वहीं, अगर बिना लोगों के ड्रेस खरीद ली तो स्कूल वाले उसके साथ प्रवेश नहीं देते। यही हाल किताबों का भी है। इस समय कक्षा दो में प्रवेश के लिए कम से कम पांच से सात हजार की किताब मिल रही है। कारण यह कि वो किताब किसी और दुकान पर नहीं मिलेगी, क्योंकि स्कूल वालों ने एक खास प्रकाशक से अपना करार किया होता है। सेटिंग वाली दुकान को छोड़कर आप किसी और दुकान पर गए तो आपको वह किताब नहीं मिलेगी। यदि हर दुकान की किताब मान्य हो तो अभिभावकों को एक बच्चे के पीछे तीन से चार हजार की बचत हो जाएगी।
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फीस वसूलने के लिए कई तरह की मद निर्धारित
प्राइवेट स्कूलों में अभिभावकों से भारी-भरकम फीस वसूलने के लिए कई तरह की मद निर्धारित है। प्रवेश से लेकर आईडी कार्ड, टाई-बेल्ट, पैरेंट्स टीचर मीटिंग तक का पूरा खर्चा परिजनों से वसूला जा रहा है। प्ले ग्रुप से 12वीं तक की कक्षाओं में फीस का कोई मानक नहीं है। शहर में लगभग 50 प्राइवेट स्कूल हैं, जो अभिभावकों की जेब खाली कर रहे हैं।
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नर्सरी और कक्षा-एक में प्रवेश कराने में 15 से 20 हजार रुपये लग जा रहे, मार्च में इनकम टैक्स के चलते अभिभावकों की जेब पहले से खाली
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। स्कूलों में नए सत्र की शुरुआत हो गई है। प्राइवेट स्कूलों में बच्चों के दाखिले का खर्च इतना बढ़ गया है कि घर के खर्च का बजट बिगड़ जा रहा है। नर्सरी और कक्षा एक में प्रवेश कराने में 15 से 20 हजार रुपये लग जा रहे हैं। मार्च में इनकम टैक्स के चलते अभिभावकों की जेब पहले से खाली थी, अब बच्चों के प्रवेश के लिए उन्हें कर्ज का सहारा लेना पड़ रहा है।
सत्र शुरू होने के साथ ही किताबें, यूनिफॉर्म आदि की खरीदारी शुरू हो गई है। कॉपी-किताबों की खरीदारी के लिए दुकानों पर भीड़ उमड़ने लगी है। किताबों की कीमत में 20 से 50 प्रतिशत तक का इजाफा हो गया है। हर अभिभावक चाहता है कि उसका बच्चा अच्छे स्कूल में पढ़ाई करें, लेकिन दूसरी तरफ उनकी आर्थिक स्थिति आड़े आ रही है। एक तरफ प्राइवेट स्कूल की भारी भरकम फीस तो दूसरी तरफ किताबों के बढ़ रहे दाम ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है।
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मार्च में इनकम टैक्स और होली के बाद अब अप्रैल में महंगी किताबों ने उनके माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। अभिभावक आत्माराम गुप्त ने बताया कि महंगाई में बच्चों को पढ़ाना मुश्किल हो गया है। किताब काॅपी के रेट में बढ़ोत्तरी होने से समस्या हो रही है। अभिभावक दिनेश कुमार ने बताया कि बच्चों की पढ़ाई में खर्च वर्तमान में बढ़ गए हैं। ड्रेस से लेकर काॅपी किताब में रकम ज्यादा खर्च हो रहे हैं।
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स्कूल वालों ने एक खास प्रकाशक से किया करार
निजी स्कूलों की ओर से पुस्तक व ड्रेस के लिए अपनी दुकान सेट की गई है। आपको ड्रेस तो कहीं मिल जाएगी, लेकिन लोगो के साथ केवल उसी दुकान पर मिलेंगी, जिसकी स्कूल से अच्छी सेटिंग होगी। ऐसे में 600 रुपये की ड्रेस लोगो के साथ 1200 की हो जाती है। वहीं, अगर बिना लोगों के ड्रेस खरीद ली तो स्कूल वाले उसके साथ प्रवेश नहीं देते। यही हाल किताबों का भी है। इस समय कक्षा दो में प्रवेश के लिए कम से कम पांच से सात हजार की किताब मिल रही है। कारण यह कि वो किताब किसी और दुकान पर नहीं मिलेगी, क्योंकि स्कूल वालों ने एक खास प्रकाशक से अपना करार किया होता है। सेटिंग वाली दुकान को छोड़कर आप किसी और दुकान पर गए तो आपको वह किताब नहीं मिलेगी। यदि हर दुकान की किताब मान्य हो तो अभिभावकों को एक बच्चे के पीछे तीन से चार हजार की बचत हो जाएगी।
फीस वसूलने के लिए कई तरह की मद निर्धारित
प्राइवेट स्कूलों में अभिभावकों से भारी-भरकम फीस वसूलने के लिए कई तरह की मद निर्धारित है। प्रवेश से लेकर आईडी कार्ड, टाई-बेल्ट, पैरेंट्स टीचर मीटिंग तक का पूरा खर्चा परिजनों से वसूला जा रहा है। प्ले ग्रुप से 12वीं तक की कक्षाओं में फीस का कोई मानक नहीं है। शहर में लगभग 50 प्राइवेट स्कूल हैं, जो अभिभावकों की जेब खाली कर रहे हैं।