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Maharajganj News: डीजे का शोर... कमजोर हृदय के लोगों के लिए खतरनाक
Thu, 08 Aug 2024 05:10 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Thu, 08 Aug 2024 05:10 AM IST
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बस स्टेशन के पास कावड़ यात्रा के दौरान डीजे की धुन पर थिरकते युवा।
महराजगंज। आस्था की आड़ में डीजे का शोर सेहत के लिए खतरनाक है। सबसे ज्यादा समस्या कमजोर हृदय के लोगों को है। कावड़ यात्रा में मानक से ज्यादा तेज आवाज में गीत बजाना फैशन बन गया है। इसे लेकर सचेत रहने की जरूरत है। तेज आवाज में कानफोडू संगीत के बीच थिरकते युवाओं को सेहत की चिंता नहीं रहती है। वह तेज आवाज से होने वाले नुकसान से अंजान हैं।
सावन में कांवड़ यात्रा के दौरान डीजे की तेज आवाज बीमार लोगों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। कमजोर दिल वाले ह्रदय रोगियों के लिए डीजे की तेज आवाज जानलेवा साबित हो सकती है। डीजे की तेज आवाज पर प्रतिबंध के बाद भी इस पर अंकुश नहीं लगाया जा सका है। डीजे से 120 से 130 डेसीबल तक शोर पैदा होता है जो खतरनाक ध्वनि प्रदूषण की श्रेणी में आता है। इस दौरान ध्वनि में कंपन बेहद अधिक बढ़ जाती है।
यही कंपन हृदय रोगियों के लिए जानलेवा होता है। सबसे खतरनाक तो तब हो जाता है जब डीजे की धुन पर नाचने वाले घंटों एक ही जगह पर खड़े होकर मनोरंजन करते हैं। कांवड़ यात्रा में डीजे बजाना फैशन हो गया है। समय के साथ इसमें भी बदलाव हो गया है। बड़े-बड़े साउंड बाक्स के जरिए बजने वाले गानों की धुन भी कुछ अलग अंदाज की होती है। डीजे की तेज आवाज ऐसी होती है कि घरों की दीवारें, दीवारों पर टंगे बर्तन और जमीन में कंपन सा महसूस होता है।
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बीते दिनों मऊपाकड़ में डीजे की तेज धुन पर थिरकते हुए लोग शहर की सड़कों से गुजरे तो आसपास के लोगों के हृदय की धड़कन बढ़ गई थी। इसी तरह से बागापार में कांवड़ यात्रा के दौरान बीते सोमवार को धीरेंद्र ने बताया कि तेज आवाज से गला सुखने लगा था। भ्रमण के दौरान तीन बार पानी पीना पड़ा था। सावन में कांवड़ यात्रा विशेषकर सोमवार के दिन ही निकल रही है। डीजे की धुन पर थिरकते हुए युवा सेहत को होने वाले नुकसान से अनजान हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि डीजे को लेकर पहले से ही दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। निर्धारित आवाज और साउंड बाक्स लगाने के लिए निर्देश हैं।
120 डेसीबल और इससे ज्यादा ध्वनि प्रदूषण खतरनाक स्तर का है। 120 डेसिबल ध्वनि प्रदूषण होने की स्थिति में हृदय की धड़कन बढ़ जाती है और दिल तेजी से धड़कने लगता है। इससे भय के साथ बेचैनी होने लगती है। हृदय रोगियों को तेज आवाज सुनने से परहेज करना चाहिए।
-डॉ. प्रमोद कुमार, फिजिशियन, जिला अस्पताल
अगर कोई लगातार तेज आवाज की जद में रहता है तो बहरेपन का शिकार हो जाएगा। अल्प अवधि में कोई व्यक्ति इस आवाज को सुनता है तो उसकी रिकवरी हो सकती है। सामान्यतः 80 डेसिबल तक आवाज नार्मल होती है, लेकिन अगर यह बढ़कर 150 तक हो जाए तो खतरनाक है। इससे सेंसरी न्यूयरल हियरिंग लॉस होने लगता है।
-डॉ. अनिरूद्ध कुमार, ईएनटी विशेषज्ञ, जिला अस्पताल
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सावन में कांवड़ यात्रा के दौरान डीजे की तेज आवाज बीमार लोगों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। कमजोर दिल वाले ह्रदय रोगियों के लिए डीजे की तेज आवाज जानलेवा साबित हो सकती है। डीजे की तेज आवाज पर प्रतिबंध के बाद भी इस पर अंकुश नहीं लगाया जा सका है। डीजे से 120 से 130 डेसीबल तक शोर पैदा होता है जो खतरनाक ध्वनि प्रदूषण की श्रेणी में आता है। इस दौरान ध्वनि में कंपन बेहद अधिक बढ़ जाती है।
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यही कंपन हृदय रोगियों के लिए जानलेवा होता है। सबसे खतरनाक तो तब हो जाता है जब डीजे की धुन पर नाचने वाले घंटों एक ही जगह पर खड़े होकर मनोरंजन करते हैं। कांवड़ यात्रा में डीजे बजाना फैशन हो गया है। समय के साथ इसमें भी बदलाव हो गया है। बड़े-बड़े साउंड बाक्स के जरिए बजने वाले गानों की धुन भी कुछ अलग अंदाज की होती है। डीजे की तेज आवाज ऐसी होती है कि घरों की दीवारें, दीवारों पर टंगे बर्तन और जमीन में कंपन सा महसूस होता है।
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बीते दिनों मऊपाकड़ में डीजे की तेज धुन पर थिरकते हुए लोग शहर की सड़कों से गुजरे तो आसपास के लोगों के हृदय की धड़कन बढ़ गई थी। इसी तरह से बागापार में कांवड़ यात्रा के दौरान बीते सोमवार को धीरेंद्र ने बताया कि तेज आवाज से गला सुखने लगा था। भ्रमण के दौरान तीन बार पानी पीना पड़ा था। सावन में कांवड़ यात्रा विशेषकर सोमवार के दिन ही निकल रही है। डीजे की धुन पर थिरकते हुए युवा सेहत को होने वाले नुकसान से अनजान हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि डीजे को लेकर पहले से ही दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। निर्धारित आवाज और साउंड बाक्स लगाने के लिए निर्देश हैं।
120 डेसीबल और इससे ज्यादा ध्वनि प्रदूषण खतरनाक स्तर का है। 120 डेसिबल ध्वनि प्रदूषण होने की स्थिति में हृदय की धड़कन बढ़ जाती है और दिल तेजी से धड़कने लगता है। इससे भय के साथ बेचैनी होने लगती है। हृदय रोगियों को तेज आवाज सुनने से परहेज करना चाहिए।
-डॉ. प्रमोद कुमार, फिजिशियन, जिला अस्पताल
अगर कोई लगातार तेज आवाज की जद में रहता है तो बहरेपन का शिकार हो जाएगा। अल्प अवधि में कोई व्यक्ति इस आवाज को सुनता है तो उसकी रिकवरी हो सकती है। सामान्यतः 80 डेसिबल तक आवाज नार्मल होती है, लेकिन अगर यह बढ़कर 150 तक हो जाए तो खतरनाक है। इससे सेंसरी न्यूयरल हियरिंग लॉस होने लगता है।
-डॉ. अनिरूद्ध कुमार, ईएनटी विशेषज्ञ, जिला अस्पताल