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Maharajganj News: दुश्वारियां....खारिज दाखिल, पैमाइश के लिए घिस रहें एड़ियां
Thu, 07 Mar 2024 12:04 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Thu, 07 Mar 2024 12:04 AM IST
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महराजगंज। तहसीलों में जरूरी काम के लिए लोगों को दुश्वारियां झेलनी पड़ रही हैं। खारिज दाखिल, पैमाइश कराने के लिए लोग चक्कर लगा रहे हैं। यदि आपने किसी भूमि की रजिस्ट्री (बैनामा) कराई है, तो उस पर काबिज होना भी आसान नहीं है। हो सकता है कि आप उस भूमि को सुरक्षित करने के लिए चहारदीवारी बनाने जाएं तो कोई आकर रोक दे। कहने लगे कि आप उसकी भूमि पर कब्जा कर रहे हैं। ऐसे में आप की परेशानी बढ़ सकती है, क्योंकि इसके पीछे भी बड़ा खेल है।
भूमि का बैनामा कराने के बाद खारिज दाखिल की प्रक्रिया होती है। भूमि खरीदने वाले लोगों का नाम चढ़ने के बाद खतौनी जारी होती है। इसके बाद खरीदार जब भूमि पर कब्जा करने पहुंचते हैं, तो उनको कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अक्सर ऐसे प्रकरण सामने आते हैं, जिनमें अगल-बगल के लोग नए भू स्वामी को कब्जा नहीं करने देते हैं।
जिस भूमि की रजिस्ट्री हुई रहती है। उस पर किसी तरह का निर्माण कार्य शुरू होने पर उसमें अपनी भूमि का हिस्सा बताकर काम रोक देते हैं। समस्या आने पर स्थानीय लेखपाल से मिलना पड़ेगा। वह पैमाइश के लिए आने के लिए आपसे कुछ फरमाइश करेंगे। उनकी बात मान लेंगे तो शायद मामला सुलट जाएगा। वरना तहसील के चक्कर काटते-काटते महीनाें गुजर जाएंगे। बुधवार को निचलौल तहसील में खोन्हौली गांव के पलकधारी मिले तो अपनी समस्या बताने लगे। उनकी जमीन बाली गांव के सिवान में है। कागज के मुताबिक मौके पर भूमि कम है। जिसकी पैमाइश कराने के लिए करीब आठ माह से तहसील का चक्कर काट रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार उनका कुछ भी सुनने को तैयार नहीं हैं।
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भूमि का बैनामा कराने के बाद खारिज दाखिल की प्रक्रिया होती है। भूमि खरीदने वाले लोगों का नाम चढ़ने के बाद खतौनी जारी होती है। इसके बाद खरीदार जब भूमि पर कब्जा करने पहुंचते हैं, तो उनको कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अक्सर ऐसे प्रकरण सामने आते हैं, जिनमें अगल-बगल के लोग नए भू स्वामी को कब्जा नहीं करने देते हैं।
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जिस भूमि की रजिस्ट्री हुई रहती है। उस पर किसी तरह का निर्माण कार्य शुरू होने पर उसमें अपनी भूमि का हिस्सा बताकर काम रोक देते हैं। समस्या आने पर स्थानीय लेखपाल से मिलना पड़ेगा। वह पैमाइश के लिए आने के लिए आपसे कुछ फरमाइश करेंगे। उनकी बात मान लेंगे तो शायद मामला सुलट जाएगा। वरना तहसील के चक्कर काटते-काटते महीनाें गुजर जाएंगे। बुधवार को निचलौल तहसील में खोन्हौली गांव के पलकधारी मिले तो अपनी समस्या बताने लगे। उनकी जमीन बाली गांव के सिवान में है। कागज के मुताबिक मौके पर भूमि कम है। जिसकी पैमाइश कराने के लिए करीब आठ माह से तहसील का चक्कर काट रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार उनका कुछ भी सुनने को तैयार नहीं हैं।
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