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Maharajganj News: जिले के हस्तनिर्मित खादी की बढ़ी डिमांड, मांगा नमूना
Mon, 05 Aug 2024 04:35 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Mon, 05 Aug 2024 04:35 AM IST
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महराजगंज। जिले की खादी देशभर के क्षेत्रों में भी पहचानी जाएगी। स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए यूनिफॉर्म के लिए जनजातीय कार्य मंत्रालय ने यहां से खादी के कपड़े का नमूना मंगाया है। इसको मंजूरी मिलने की भी उम्मीद है।
जिला खादी ग्रामोद्योग अधिकारी रामचंद्र प्रसाद ने बताया कि फरेंदा में हस्तकला से संचालित खादी वस्त्र बनाने का काम चल रहा है। यहां बिना मशीन का बना खादी का तिरंगा झंडा, गमछा, मफलर व खादी के हस्त निर्मित वस्त्र भी बनाए जाते हैं। इसके लिए उक्त केंद्र पर 13 महिलाएं चरखे से सूत तैयार कर सेंटर पर उपलब्ध कराती हैं।
सबसे अधिक आपूर्ति खादी इंडिया को दी जाती है। जो सरकारी उपक्रम है। वहां से विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों, आदि के लिए कपड़े भी तैयार होते हैं। इसके अलावा आम लोगों के लिए भी खादी तैयार की जाती है। जो विभिन्न कारखानों को भेजी जाती है। जहां से रेडीमेड कपड़े तैयार कर बाजारों में बिक्री के लिए उपलब्ध कराए जाते हैं।
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यहां तैयार खादी की विशेषता के चलते काफी कम समय में देशभर में इसको ख्याति हासिल हो चुकी है। बताया कि जनजातीय कार्य मंत्रालय को भी यहां की खादी अच्छी लगी है। सरकार की ओर से जनजातीय क्षेत्रों में संचालित विद्यालयों में बच्चों को यूनिफॉर्म उपलब्ध होती है। मंत्रालय की मंशा है कि खादी कपड़े से तैयार यूनिफॉर्म बच्चों को पहनाई जाए। इसके लिए सेंपल शीघ्र भेजा जाएगा।
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जिला खादी ग्रामोद्योग अधिकारी रामचंद्र प्रसाद ने बताया कि फरेंदा में हस्तकला से संचालित खादी वस्त्र बनाने का काम चल रहा है। यहां बिना मशीन का बना खादी का तिरंगा झंडा, गमछा, मफलर व खादी के हस्त निर्मित वस्त्र भी बनाए जाते हैं। इसके लिए उक्त केंद्र पर 13 महिलाएं चरखे से सूत तैयार कर सेंटर पर उपलब्ध कराती हैं।
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सबसे अधिक आपूर्ति खादी इंडिया को दी जाती है। जो सरकारी उपक्रम है। वहां से विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों, आदि के लिए कपड़े भी तैयार होते हैं। इसके अलावा आम लोगों के लिए भी खादी तैयार की जाती है। जो विभिन्न कारखानों को भेजी जाती है। जहां से रेडीमेड कपड़े तैयार कर बाजारों में बिक्री के लिए उपलब्ध कराए जाते हैं।
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यहां तैयार खादी की विशेषता के चलते काफी कम समय में देशभर में इसको ख्याति हासिल हो चुकी है। बताया कि जनजातीय कार्य मंत्रालय को भी यहां की खादी अच्छी लगी है। सरकार की ओर से जनजातीय क्षेत्रों में संचालित विद्यालयों में बच्चों को यूनिफॉर्म उपलब्ध होती है। मंत्रालय की मंशा है कि खादी कपड़े से तैयार यूनिफॉर्म बच्चों को पहनाई जाए। इसके लिए सेंपल शीघ्र भेजा जाएगा।