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जायजाद में हिस्सा न मिलने की आशंका पर दादा और दादी तो उतारा मौत के घाट

Wed, 11 Oct 2017 12:31 AM IST
Updated Wed, 11 Oct 2017 12:31 AM IST
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जायजाद में हिस्सा न मिलने की आशंका पर दादा और दादी तो उतारा मौत के घाट
महराजगंज। नौतनवां कस्बे के सिद्धार्थनगर कॉलोनी में 16 सितंबर की रात बुजुर्ग दंपती की हत्या उनके दो पोतों ने अपने साथियों के साथ मिल कर की थी। इस सनसनीखेज हत्याकांड के पर्दाफाश का दावा करते हुए पुलिस ने दोनों पोतों समेत पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। एक आरोपी फरार बताया जा रहा है। उनके पास से तीन बाइक और 2.6 लाख रुपये और अन्य सामान बरामद हुए हैं। कोर्ट में पेशी के बाद पांचों को जेल भेज दिया गया। पोतों ने पुलिस को बताया कि दादा-दादी उन्हें पैसे देने में आनाकानी कर रहे थे। कहीं वे संपत्ति से बेदखल न कर दें, इस आशंका में साथियों के साथ मिलकर दोनों को मौत के घाट उतार दिया।
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अराजी महुअवां गांव के मूल निवासी जयराम यादव पत्नी सोहराती के साथ नौतनवां कस्बे के सिद्धार्थनगर कॉलोनी में मकान बनाकर रहते थे। 15 एकड़ जमीन के मालिक जयराम गांव के संपन्न व्यक्ति में शुमार थे। वह ट्रैक्टर-ट्रॉली और कंबाइंड हार्वेस्टर भी चलवाते थे। सारा हिसाब-किताब जयराम यादव ही रखते थे। इनके तीन पुत्र सुबास, शत्रुघ्न और महेंद्र अपने परिवार के साथ गांव पर रहते हैं। सुबास को नेपाल के रुपंदेही जिले के नकहिया में नवासा मिला है। सुबास का लड़का नकहिया में ही रहता है। शत्रुघ्न का पुत्र सुधाकर गलत संगत में पड़ गया था। बताया जाता है कि 2015 में वह एक लड़की के अपहरण में फंस गया। जेल से जमानत पर छूटने के बाद वह शराब पीने लगा था। इसके लिए वह बार-बार पैसों की मांग करता था। अपहरण के मुकदमे में सुलह-समझौते के लिए वह अपने दादा जयराम यादव से बड़ी रकम की मांग कर रहा था। जयराम के रुपये देने से इन्कार करने पर वह उनसे नाराज था। दूसरी तरफ सुबास के पुत्र संत कुमार को आशंका थी कि जयराम यादव उसे अपनी पैतृक संपत्ति से बेदखल कर देंगे। सुधाकर और संत कुमार ने मिलकर जयराम यादव को रास्ते से हटाने की साजिश रची। इसके लिए दोनों ने अपने साथियों के साथ प्लान बनाया और 16 सितंबर की रात बुजुर्ग दंपती की नृशंस हत्या कर दी। अगले दिन सुबह खून से लथपथ दोनोें के शव उनके बिस्तर पर पाए गए थे। इस मामले में सुबास की तहरीर पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर पुलिस जांच में जुटी थी।
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मंगलवार को एसपी आरपी सिंह ने पत्रकारों को बताया कि हत्याकांड के पर्दाफाश के लिए एसओ नौतनवां के साथ ही स्वाट प्रभारी दिलीप कुमार को भी लगाया गया। तफतीश के दौरान जयराम के दोनों पोतों पर शक हुआ। इसके बाद पुलिस ने दोनों पर नजर रखनी शुरू कर दी। इस बीच मुखबिर की सूचना पर एसओ नौतनवां प्रहलाद पांडेय, स्वाट प्रभारी दिलीप कुमार टीम के साथ बीती रात नौतनवां कस्बे के रामेश्वर के बाग के पास पहुंचे। वहां मौजूद पांच लोग पुलिस को देखते ही भागने लगे। पुलिस वालों ने दौड़ाकर पांचों को पकड़ लिया। मृतक के पौत्र संतकुमार पुत्र सुभाष व सुधाकर यादव पुत्र शत्रुघ्न यादव निवासी महुअवां थाना नौतनवां, सुनील चौहान पुत्र रामवेलास वार्ड नंबर 2 घुंडी मुहल्ला थाना नौतनवां, फिरोज पुत्र जमील खान वार्ड नंबर 25 गांधी नगर थाना नौतनवां और संगम गौड़ पुत्र जगदीश गौड़ अब्दुल कलाम नगर नौतनवां को गिरफ्तार कर लिया गया। जबकि इनका एक साथी चकमा देकर फरार हो गया। पूछताछ में मृतक के दोनों पोतों ने बताया कि गांव की पैतृक संपत्ति में हिस्सा को लेकर दिक्कत थी। ऐसा लगा कि जायदाद में हिस्सा नहीं मिलेेगा। इसके बाद दादा और दादी को ठिकाने लगाने के लिए प्लानिंग शुरू कर दी।
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संतकुमार ने बताया कि 16 सितंबर की रात को नौतनवां में दादा जयराम और दादी सोहराती के पास रात 8 बजे पहुंचा। साथी भी घर ही रुके। रात होने पर जब दादा दादी सो गए तो उन्हें मौत की नींद सुला दी। घर रखे 2.6 लाख रुपये और जेवर लेकर भाग निकले। रकम को साथियों में बांट दिया।
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