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Maharajganj News: ब्रांडेड दवाओं के नाम की नकल...महंगे इलाज के बाद भी नहीं घट रहा मर्ज

Mon, 06 Jan 2025 12:37 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज Updated Mon, 06 Jan 2025 12:37 AM IST
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Copying the names of branded medicines...the disease is not reducing even after expensive treatment.
सदर कोतवाली के पास दुकान से दवा खरीदते लोग।
महराजगंज। दवाओं की बिक्री में बड़ा खेल सामने आ रहा है। ब्रांडेड के दाम में जेनेरिक दवाएं बेचकर धंधेबाज मालामाल हो रहे हैं। वहीं मरीजों की दर्द और बीमारी दूर नहीं हो रही है। इस धंधे में कंपनियों से सीधे माल मंगाया जा रहा है।
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बाजार में एक ही कंपनी की एक दवा दो अलग-अलग नाम से बेची जा रही है। एक की कीमत 600 रुपये है तो दूसरी की 2000 रुपये है। हेल्थ इंश्योरेंस वाले मरीजों के मामले में इस्तेमाल होने वाली दवाएं अलग फार्मेसी से बेची जा रहीं हैं, जो गुणवत्ता में कम हैं पर उनकी कीमत ज्यादा वसूली जा रही है।
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सूत्रों की माने तो दवा के धंधेबाजों ने ज्यादा मुनाफा के लिए जाल बिछा रखा है। इसमें सीधे-साधे या अनभिज्ञ ग्राहक आसानी से फंस जाते हैं। सरकार ने सस्ते दाम पर दवाएं उपलब्ध कराने की पहल की तो इसमें भी खेल होने लगा। जेनेरिक दवाएं सस्ती होती हैं और ब्रांडेड महंगी। एक ही दवा के रेट में काफी अंतर होता है। धंधेबाज, जेनेरिक को ही ब्रांडेड बताकर मरीजों को ऊंचे दाम पर बेच दे रहे हैं। मिलते-जुलते नाम और निगरानी नहीं होने से धंधेबाज चांदी काट रहे हैं तो मरीज ठगे जा रहे हैं।
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कंपनियों ने अपने ब्रांड के नाम से मिलती-जुलती सस्ती जेनेरिक दवा बाजार में उतारीं तो मकसद था मरीजों को सस्ती दवा बेचना। मगर, इनकी आकर्षक पैकिंग और उस पर लिखे एमआरपी से धंधेबाजों को फायदा हो रहा है। ग्राहकों को 25 से 30 प्रतिशत छूट का लाभ देकर इस तरह की बड़ी कंपनियों ने अपने ब्रांड के नाम से मिलती-जुलती सस्ती जेनेरिक दवाएं बाजार में उतारी हैं।

यह इसलिए हुआ कि मरीजों को फायदा हो। इसमें धंधेबाजों ने कमाई का जरिया खोज लिया है। ग्रामीण बाजार में यह धंधा ज्यादा चल रहा है। बाजार में नामी दवा कंपनियों ने भी अपने ब्रांड के अलावा जेनेरिक दवाएं बाजार में उपलब्ध कराई हैं। इनकी पहचान सामान्य तौर पर ग्राहक नहीं कर सकते हैं, क्योंकि इन कंपनियों की जेनेरिक दवाइयों की पैकेजिंग भी ब्रांडेड जैसी ही होती है। ी
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