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Maharajganj News: बर्फीली हवा से चिलब्लेन्स के रोगी बढ़े, सूजन के साथ फट रही उंगलियां
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मंगलवार को 17 रोगी पहुंचे अस्पताल, लिया परामर्श
जिला अस्पताल में हुआ 621 रोगियों का किया गया उपचार
महराजगंज। बर्फीली हवाओं के कारण धूप खिलने के बाद भी लोगों को राहत नहीं मिल रही है। मौसम साफ होने से रोगियों की संख्या अस्पताल में बढ़ी है। सर्द हवाओं ने चिलब्लेन्स के पीड़ितों की संख्या बढ़ाई है। बीते दिनों तक इसके चार पांच रोगी ही दिखते थे लेकिन मंगलवार चिलब्लेन्स के 17 रोगी ओपीडी में मिले। पीड़ितों को हाथ-पैर की उंगली में सूजन के साथ त्वचा फटने से खुजली व घाव पनपने की समस्या है। चिकित्सकों ने जांच के बाद इसे मौसमी समस्या बताकर एहतियात का परामर्श दिया।
जिला अस्पताल में मंगलवार को 621 रोगियों का उपचार किया गया। सर्वाधिक संख्या मौसमी बीमारियों के मिले। नए रोगियों में चिलब्लेन्स के मरीज रहे जो हाथ व पैर की उंगलियों में सूजन व खुजली को लेकर परेशान थे। इनमें महिलाओं की संख्या सर्वाधिक रही। डाॅ. रंजन मिश्र ने रोगियों की जांच रिपोर्ट व बताए लक्षण के आधार पर दवा का परामर्श व एहतियात के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पिछले दिनों सर्द पछुआ के कारण न्यूनतम तापमान लुढ़कने से यह रोग बढ़ा। ऐसी ठंड व नम मौसम में रक्त वाहिकाओं की यह सामान्य प्रतिक्रिया है। इसमें हाथ पैर की उंगलियों नाक और कानों पर छोटे, खुजलीदार, लाल घाव हो जाते हैं। मौसम सामान्य होने पर यह खुद ठीक हो जाता लेकिन असुविधा महसूस होने पर चिकित्सक से परामर्श लेकर उपचार जरूरी है। अन्यथा खुजली से घाव गहरा हो जाता है और अल्सर का खतरा बढ़ जाता है।
ऐसे करें बचाव
- ठंड और नमी से बचें। जितना हो सके ठंडे मौसम में बाहर जाने से परहेज करें।
- गर्म कपड़े पहनें: कई परतों वाले ढीले कपड़े, गर्म मोजे, ऊनी दस्ताने, टोपी और स्कार्फ प्रयोग करें।
- धीरे-धीरे गर्मी लेने का प्रबंध करें। ठंड से त्वचा को अचानक गर्म न करें।
- हाथ पैर की उंगलियों पर स्नेहन के रूप में जैतून का तेल या ग्लिसरीन का लेप लगाएं।
- असुविधा महसूस होने पर बिना चिकित्सक सलाह के दवा न उपयोग करें।
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जिला अस्पताल में हुआ 621 रोगियों का किया गया उपचार
महराजगंज। बर्फीली हवाओं के कारण धूप खिलने के बाद भी लोगों को राहत नहीं मिल रही है। मौसम साफ होने से रोगियों की संख्या अस्पताल में बढ़ी है। सर्द हवाओं ने चिलब्लेन्स के पीड़ितों की संख्या बढ़ाई है। बीते दिनों तक इसके चार पांच रोगी ही दिखते थे लेकिन मंगलवार चिलब्लेन्स के 17 रोगी ओपीडी में मिले। पीड़ितों को हाथ-पैर की उंगली में सूजन के साथ त्वचा फटने से खुजली व घाव पनपने की समस्या है। चिकित्सकों ने जांच के बाद इसे मौसमी समस्या बताकर एहतियात का परामर्श दिया।
जिला अस्पताल में मंगलवार को 621 रोगियों का उपचार किया गया। सर्वाधिक संख्या मौसमी बीमारियों के मिले। नए रोगियों में चिलब्लेन्स के मरीज रहे जो हाथ व पैर की उंगलियों में सूजन व खुजली को लेकर परेशान थे। इनमें महिलाओं की संख्या सर्वाधिक रही। डाॅ. रंजन मिश्र ने रोगियों की जांच रिपोर्ट व बताए लक्षण के आधार पर दवा का परामर्श व एहतियात के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पिछले दिनों सर्द पछुआ के कारण न्यूनतम तापमान लुढ़कने से यह रोग बढ़ा। ऐसी ठंड व नम मौसम में रक्त वाहिकाओं की यह सामान्य प्रतिक्रिया है। इसमें हाथ पैर की उंगलियों नाक और कानों पर छोटे, खुजलीदार, लाल घाव हो जाते हैं। मौसम सामान्य होने पर यह खुद ठीक हो जाता लेकिन असुविधा महसूस होने पर चिकित्सक से परामर्श लेकर उपचार जरूरी है। अन्यथा खुजली से घाव गहरा हो जाता है और अल्सर का खतरा बढ़ जाता है।
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ऐसे करें बचाव
- ठंड और नमी से बचें। जितना हो सके ठंडे मौसम में बाहर जाने से परहेज करें।
- गर्म कपड़े पहनें: कई परतों वाले ढीले कपड़े, गर्म मोजे, ऊनी दस्ताने, टोपी और स्कार्फ प्रयोग करें।
- धीरे-धीरे गर्मी लेने का प्रबंध करें। ठंड से त्वचा को अचानक गर्म न करें।
- हाथ पैर की उंगलियों पर स्नेहन के रूप में जैतून का तेल या ग्लिसरीन का लेप लगाएं।
- असुविधा महसूस होने पर बिना चिकित्सक सलाह के दवा न उपयोग करें।