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Maharajganj News: गुरुवाणी, शबद-कीर्तन कर मनाया प्रकाश पर्व किया गया
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गुरु गोविंद सिंह के प्रकाश पर्व पर नौतनवां कस्बा स्थित गुरुद्वारा में गुरुवाणी और शबद-कीर्तन कर?
- फोटो : MAHARAJGANJ
गुरुवाणी, शबद-कीर्तन कर मनाया प्रकाश पर्व
नौतनवां कस्बे में गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा में जुटे श्रद्धालु
नौतनवां। गुरु गोविंद सिंह का 356 वां प्रकाश पर्व बृहस्पतिवार को कस्बे के गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा में सिख समुदाय के लोगों ने धूमधाम से मनाया। गुरुद्वारा में गुरुवाणी, शबद-कीर्तन किया गया।
अमृतसर से पधारे कथावाचक ज्ञानी सतवंत सिंह ने गुरु की महिमा का रसपान कराया। गुरुद्वारा में अमृतसर से आए कीर्तन जत्था भाई सुरेंद्र सिंह तथा हजूरी रागी जत्था नानक सिंह ने गुरुवाणी और शबद-कीर्तन किया।
ज्ञानी सतवंत सिंह ने कथा का रसपान कराते हुए कहा कि गुरु गोविंद सिंह का जीवन लोगों के लिए काफी प्रेरणादायक रहा। उन्होंनें अपने पिता गुरु तेग बहादुर की शहादत के बाद मात्र नौ साल की उम्र में गुरु की जिम्मेदारी ली। उन्होंने छोटी सी उम्र में ही धनुष- बाण, तलवार, भाला आदि चलाने की कला भी सीखी। फिर अपना पूरा जीवन लोगों की सेवा में समर्पित कर दिया।
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उन्होंने कहा कि गुरु गोविंद सिंह के जीवन से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि हमें जीवन में कभी भी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। इस मौके पर अध्यक्ष परमजीत, रविंद्र, मंजीत, रंजीत, सतपाल, रणजीत, सतपाल आदि मौजूद रहे।
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नौतनवां कस्बे में गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा में जुटे श्रद्धालु
नौतनवां। गुरु गोविंद सिंह का 356 वां प्रकाश पर्व बृहस्पतिवार को कस्बे के गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा में सिख समुदाय के लोगों ने धूमधाम से मनाया। गुरुद्वारा में गुरुवाणी, शबद-कीर्तन किया गया।
अमृतसर से पधारे कथावाचक ज्ञानी सतवंत सिंह ने गुरु की महिमा का रसपान कराया। गुरुद्वारा में अमृतसर से आए कीर्तन जत्था भाई सुरेंद्र सिंह तथा हजूरी रागी जत्था नानक सिंह ने गुरुवाणी और शबद-कीर्तन किया।
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ज्ञानी सतवंत सिंह ने कथा का रसपान कराते हुए कहा कि गुरु गोविंद सिंह का जीवन लोगों के लिए काफी प्रेरणादायक रहा। उन्होंनें अपने पिता गुरु तेग बहादुर की शहादत के बाद मात्र नौ साल की उम्र में गुरु की जिम्मेदारी ली। उन्होंने छोटी सी उम्र में ही धनुष- बाण, तलवार, भाला आदि चलाने की कला भी सीखी। फिर अपना पूरा जीवन लोगों की सेवा में समर्पित कर दिया।
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उन्होंने कहा कि गुरु गोविंद सिंह के जीवन से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि हमें जीवन में कभी भी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। इस मौके पर अध्यक्ष परमजीत, रविंद्र, मंजीत, रंजीत, सतपाल, रणजीत, सतपाल आदि मौजूद रहे।