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Maharajganj News: नहरें बेपानी, फसल बचाने की जद्दोजहद कर रहे किसान
Wed, 18 Dec 2024 12:45 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Wed, 18 Dec 2024 12:45 AM IST
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परतावल। सूखी नहरें किसानों के लिए मुसीबत बन गई हैं। नहरों में पानी के अभाव में किसान खेतों की सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं। स्थिति यह है कि दिसंबर का महीना भी धीरे-धीरे समाप्ति की ओर है लेकिन परतावल क्षेत्र की मुख्य नहरों सहित सभी रजवाहें और माइनर अभी भी सूखे हैं।
हैरान करने वाली बात यह है कि गेहूं की सिंचाई के लिए जब नहरों में पानी की आवश्यकता है, उस समय नहरों की साफ-सफाई कराई जा रही है। किसान में मजबूरी में पंपिंग सेट के जरिए खेतों की सिंचाई कर रहे हैं।
किसान गेहूं की पहली सिंचाई के लिए परेशान हैं। पानी के अभाव में गेहूं की फसल खराब हो रही है। किसानों का आरोप है कि गेहूं की बुआई का मुख्य समय नवंबर माह में शुरू हो जाता है। प्रथम सिंचाई 21 दिन में हो जानी चाहिए। वर्तमान में गेहूं को पानी की काफी आवश्यकता है, लेकिन नहरों में पानी नहीं छोड़ा जा रहा है। जिससे किसानों की गेहूं की फसल बर्बाद हो रही है। किसानों ने यह भी कहा कि रबी के सीजन में नहरों में पानी छोड़े जाने का शेड्यूल कैसे तय हुआ है यह समझ से परे है।
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मोहन, अखिलेश, रक्षा, सुभाष, राजेन्द्र, सुदामा व अन्य किसानों का कहना है कि सरकार किसानों की आय दोगुनी करने की बात करती है लेकिन समय से फसलों को पानी ही नहीं मिलेगा तो पैदावार कैसे बढ़ेगी। नहर विभाग को शेड्यूल में परिवर्तन करने की आवश्यकता है। गेहूं की बुवाई के लिए विभाग को नवंबर माह में ही पानी छोड़ देना चाहिए।
जिलेदार प्रकाश चंद्र अग्रवाल ने बताया कि रोस्टर के हिसाब से 16 दिसंबर से पानी आने वाला था। कुछ कार्य शेष रह जाने के कारण दो चार दिन विलंब हो सकता है।
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हैरान करने वाली बात यह है कि गेहूं की सिंचाई के लिए जब नहरों में पानी की आवश्यकता है, उस समय नहरों की साफ-सफाई कराई जा रही है। किसान में मजबूरी में पंपिंग सेट के जरिए खेतों की सिंचाई कर रहे हैं।
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किसान गेहूं की पहली सिंचाई के लिए परेशान हैं। पानी के अभाव में गेहूं की फसल खराब हो रही है। किसानों का आरोप है कि गेहूं की बुआई का मुख्य समय नवंबर माह में शुरू हो जाता है। प्रथम सिंचाई 21 दिन में हो जानी चाहिए। वर्तमान में गेहूं को पानी की काफी आवश्यकता है, लेकिन नहरों में पानी नहीं छोड़ा जा रहा है। जिससे किसानों की गेहूं की फसल बर्बाद हो रही है। किसानों ने यह भी कहा कि रबी के सीजन में नहरों में पानी छोड़े जाने का शेड्यूल कैसे तय हुआ है यह समझ से परे है।
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मोहन, अखिलेश, रक्षा, सुभाष, राजेन्द्र, सुदामा व अन्य किसानों का कहना है कि सरकार किसानों की आय दोगुनी करने की बात करती है लेकिन समय से फसलों को पानी ही नहीं मिलेगा तो पैदावार कैसे बढ़ेगी। नहर विभाग को शेड्यूल में परिवर्तन करने की आवश्यकता है। गेहूं की बुवाई के लिए विभाग को नवंबर माह में ही पानी छोड़ देना चाहिए।
जिलेदार प्रकाश चंद्र अग्रवाल ने बताया कि रोस्टर के हिसाब से 16 दिसंबर से पानी आने वाला था। कुछ कार्य शेष रह जाने के कारण दो चार दिन विलंब हो सकता है।