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Maharajganj News: आधार कार्ड में खेल कर माइक्रोफाइनेंस कंपनी से एक झटके में दिला रहे कर्ज

Sat, 21 Jun 2025 12:47 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज Updated Sat, 21 Jun 2025 12:47 AM IST
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By playing with the Aadhar card, microfinance companies are providing loans in one go
महराजगंज। माइक्रो फाइनेंस कंपनी का मकड़जाल जिले में फैला है। दलाल भी गांव-गांव घूम रहे हैं। महिलाओं की जरूरतों को समझकर आसानी से कर्ज दिलाकर रकम लेकर किनारा कस लेते हैं।
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रकम लेने के बाद महिला कर्ज के दलदल से उबर नहीं पाती है। कर्ज लेने के बाद उनकी समस्या तो दूर हो जाती है, लेकिन बढ़ते ब्याज दर से उनको तमाम दुश्वारियां झेलनी पड़ती हैं। दलाल आधार कार्ड में खेलकर कर्ज दिला रहे हैं।
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सूत्रों की माने तो गांव में दलाल अपने नेटवर्क के माध्यम से पता लगाते हैं कि किस महिला को रकम की जरूरत है। बीमारी, बच्चों की पढ़ाई, मकान बनवाने, बाइक खरीदने आदि जरूरतों के बारे में जानकारी होते ही दलाल महिला के पास पहुंच जाते हैं। उसे आसानी से कर्ज देने की बात बताते हैं। जरूरत ऐसी होती है कि बहुत कुछ सोच समझ नहीं पाती हैं। दलाल इसी का फायदा उठाते हैं।
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कर्ज दिलाने के एवज में पांच से 10 हजार रुपये लेते हैं। अगर कोई महिला अपने आधार कार्ड से किसी कंपनी से कर्ज ली है तो दलाल दूसरा आधार बनाकर कंपनी से कर्ज दिलाते हैं। इसमें पहले एक ही आधार पर कई बार कर्ज दिलाया जाता था, लेकिन इसमें नया खेल सामने आया है। आधार पर फोटो, नाम पता सब एक ही रहेगा, लेकिन क्रम संख्या में अंतर होगा।
टीकर गांव की सरस्वती ने बताया कि बेटी की शादी के लिए रकम की जरूरत थी। रिश्तेदारों से उधार मांगी, लेकिन नहीं मिला तो माइक्रोफाइनेंस कंपनी से कर्ज लेकर काम चलाना पड़ा। कर्ज चुकाने के लिए दूसरी कंपनी से कर्ज लेना पड़ा। समझ में नहीं आया की कैसे हो गया। क्योंकि रकम की जरूरत थी, इसलिए बहुत कुछ सोच समझ नहीं सकी। अपना आधार देकर कर्ज ली।
दूसरी कंपनी से 50 हजार रुपये कर्ज ली। इसके बदले में 10 हजार रुपये देना पड़ा। समय से किश्त जमा नहीं होने पर परेशान किया जाता है। परसौनी गांव की अमरावती का कहना है कि दलाल गांव में घूमते रहते हैं। कर्ज लेने के दौरान कोई परेशानी नहीं होती है। वसूली करने के दौरान अपमानित किया जाता है।
कभी-कभी तो घर छोड़कर दूसरे के घर जाना पड़ जाता है। वसूली करने के लिए एजेंट आते हैं तो उनका व्यवस्था बेरूखा होता है। आधार दे दिया जाता है। इसके बाद कर्ज मिल जाता है। इसमें कोई समस्या नहीं होती है। दो लाख पचास हजार रुपये दो कंपनी से कर्ज ली हूं। सुमित्रा, संगीता, निर्जला, शीला, सावित्री ने बताया कि दलाल कर्ज दिलाकर स्वयं रकम लेने के बाद किनारा कस लेते हैं। बाद में वे दिखते भी नहीं हैं। वहीं दलाल आधार बनाने के खेलकर कर्ज दिलाते हैं।

ब्याज के रूप में ली जा रही मोटी रकम
मिठौरा क्षेत्र में माइक्रो फाइनेंस कंपनियों का मकड़जाल फैला हुआ है। ये फाइनेंस कंपनियां महिलाओं के छोटे-छोटे समूह बनाकर उनसे आर्थिक लेनदेन कर रही हैं। महिलाओं से ब्याज के रूप में मोटी रकम ली जा रही है। टिकर, परसौनी शेखुई, पिपरिया गुरु गोबिंद राय, खोस्ट आदि गांव में एक महिला का दो दो तीन तीन आधार कार्ड बना है। नाम पता एक ही है लेकिन आधार कार्ड का नंबर बदल दिया गया है। महिलाओं के 100 से ज्यादा समूह संचालित हैं, जिनसे लगभग 500 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। इन समूहों से जुड़कर आर्थिक लेनदेन कर रही हैं। कंपनियों के एजेंट महिलाओं किस्त की वसूली के दौरान प्रताड़ित करते हैं।
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