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Maharajganj News: खराब दाल चमकाकर धंधेबाज मालामाल
Sun, 09 Feb 2025 01:02 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Sun, 09 Feb 2025 01:02 AM IST
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दाल।
महराजगंज। दालों की चमक पर गए तो सेहत खराब हो जाएगी। खराब गुणवत्ता वाली दाल को चमकदार बनाकर धंधेबाज बाजार में उतार दिए हैं। ज्यादातर दाल गोरखपुर मंडी से आ रही है। पॉलिश करने से दाल की चमक बढ़ जाती है। इससे कोई समझ नहीं पता है।
खराब दाल को ताजा और चमकीला दिखाने के लिए उसमें काफी मात्रा में रंग मिलाकर उसे पॉलिश कर दिया जा रहा है, जिससे इसकी सूरत तो बदल जा रही है, लेकिन इस्तेमाल करने पर यह नुकसानदायक है। पॉलिश की हुई दाल के खेल को समझने के लिए मंडी के जानकारों से संपर्क करना पड़ा। शहर के अलावा निचलौल, फरेंदा, घुघली कस्बों का रूख करने पर सूत्रों से पता चला की दाल में मिलावट और रंगी हुई दाल की बिक्री तेज है।
जिले में उत्पादन से अधिक दाल की खपत है। दाल की निर्भरता पूरी तरह से मध्य प्रदेश व दिल्ली की मंडी पर है। इसका फायदा धंधेबाज उठा रहे हैं। बहराइच से सस्ती दाल लेकर, वहां इनकी छिलाई व रंगाई करके नए पैकेट में डाल देते हैं। धंधेबाज साबुत मूंग को रंगकर साबुत उड़द बना देते हैं। महराजगंज जिले में गोरखपुर मंडी और बहराइच से रंगी दाल अधिक मंगाई जा रही है। व्यापारी बताते हैं कि महराजगंज में अरहर की दाल मध्य प्रदेश से अधिक आती है।
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दिल्ली से मूंंग और उड़द की दाल मंगाई जाती है। इसके अलावा लोकल क्वालिटी की दाल बहराइच से मंगाई जाती है। एक अनुमान के अनुसार, रोजाना 100 टन दाल की खपत होती है। पॉलिश दाल को देखकर हर कोई समझ नहीं पाएगा। चमकदार होने के कारण लोग इसकी ओर आकर्षित होते हैं। शहर से गांव के कस्बे के बाजारों में यह दाल चुनिंदा गोदामों में रखी जा रही है।
मांग के अनुसार इसे बाहर निकाला जाता है। कारोगारी दिनेश कहते हैं कि चंद रुपयों के लाभ के लिए सेहत से खिलवाड़ करना ठीक नहीं है। सभी कारोबारी ऐसा नहीं करते हैं। चंद लोगों के वजह से ईमानदार कारोबारियों की छबि खराब हो रही है।
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खराब दाल को ताजा और चमकीला दिखाने के लिए उसमें काफी मात्रा में रंग मिलाकर उसे पॉलिश कर दिया जा रहा है, जिससे इसकी सूरत तो बदल जा रही है, लेकिन इस्तेमाल करने पर यह नुकसानदायक है। पॉलिश की हुई दाल के खेल को समझने के लिए मंडी के जानकारों से संपर्क करना पड़ा। शहर के अलावा निचलौल, फरेंदा, घुघली कस्बों का रूख करने पर सूत्रों से पता चला की दाल में मिलावट और रंगी हुई दाल की बिक्री तेज है।
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जिले में उत्पादन से अधिक दाल की खपत है। दाल की निर्भरता पूरी तरह से मध्य प्रदेश व दिल्ली की मंडी पर है। इसका फायदा धंधेबाज उठा रहे हैं। बहराइच से सस्ती दाल लेकर, वहां इनकी छिलाई व रंगाई करके नए पैकेट में डाल देते हैं। धंधेबाज साबुत मूंग को रंगकर साबुत उड़द बना देते हैं। महराजगंज जिले में गोरखपुर मंडी और बहराइच से रंगी दाल अधिक मंगाई जा रही है। व्यापारी बताते हैं कि महराजगंज में अरहर की दाल मध्य प्रदेश से अधिक आती है।
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दिल्ली से मूंंग और उड़द की दाल मंगाई जाती है। इसके अलावा लोकल क्वालिटी की दाल बहराइच से मंगाई जाती है। एक अनुमान के अनुसार, रोजाना 100 टन दाल की खपत होती है। पॉलिश दाल को देखकर हर कोई समझ नहीं पाएगा। चमकदार होने के कारण लोग इसकी ओर आकर्षित होते हैं। शहर से गांव के कस्बे के बाजारों में यह दाल चुनिंदा गोदामों में रखी जा रही है।
मांग के अनुसार इसे बाहर निकाला जाता है। कारोगारी दिनेश कहते हैं कि चंद रुपयों के लाभ के लिए सेहत से खिलवाड़ करना ठीक नहीं है। सभी कारोबारी ऐसा नहीं करते हैं। चंद लोगों के वजह से ईमानदार कारोबारियों की छबि खराब हो रही है।