{"_id":"68054b2386df565d5e00ab1d","slug":"bought-dustbins-worth-3400-for-14-thousand-maharajganj-news-c-206-1-sgkp1021-147308-2025-04-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Maharajganj News: 14 हजार में खरीदे 3400 के कूड़ेदान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Maharajganj News: 14 हजार में खरीदे 3400 के कूड़ेदान
Mon, 21 Apr 2025 12:59 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Mon, 21 Apr 2025 12:59 AM IST
विज्ञापन
महराजगंज। नगर पंचायत घुघली में कूड़ेदान की खरीद को लेकर एक बड़ा घोटाला सामने आया है। वर्ष 2018 में 23.52 लाख रुपये की लागत से 200 कूड़ेदान की खरीद में भारी अनियमितताएं पाई गई हैं।
एक कूड़ेदान की खरीद पर 14,160 रुपये खर्च किए गए हैं, जबकि स्थानीय बाजार और ऑनलाइन देखने पर इसकी कीमत 3400 से 3600 दिखाई जा रही है। वरिष्ठ कोषाधिकारी की रिपोर्ट के बाद आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू) को जांच सौंपी गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, निविदा प्रक्रिया में शासनादेशों का पालन नहीं किया गया, ई-टेंडर की अनिवार्यता के बावजूद ऑफलाइन प्रक्रिया अपनाई गई और निविदा का प्रकाशन कम प्रसार वाले दो समाचार पत्रों में किया गया था।
विज्ञापन
रिपोर्ट में यह भी उजागर हुआ कि निविदा में भाग लेने वाली तीनों फर्में तकनीकी रूप से अर्ह नहीं थीं। फिर भी उनकी वित्तीय निविदाएं खोली गईं और सबसे कम दर बताकर कूड़ेदान खरीद का आदेश जारी किया गया। खास बात यह है कि जिस फर्म को निविदा दी गई, उसने किसी अन्य फर्म की एफडीआर लगाई थी, जिससे फर्जीवाड़े और मिलीभगत की आशंका प्रबल हो गई।
साथ ही स्थानीय बाजार और ऑनलाइन दर जो 3400 से लेकर 3600 तक थी उसकी तुलना में कूड़ेदानों की खरीदी गई दर (14,160 प्रति पीस) काफी अधिक पाई गई। अब शासन ने आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू) को जांच सौंपी है। ईओडब्लू के विवेचक डीएन सिंह यादव ने जांच प्रारंभ कर दी है। जांच शुरू होते ही हड़कंप मच गया है। इस घोटाले में संलिप्त अधिकारियों, फर्मों और कर्मचारियों की भूमिका जांच के घेरे में आ चुकी है।
नगर पंचायत घुघली के चेयरमैन संतोष जायसवाल ने बताया कि यह मामला पुराना है। यह गड़बड़ी हमारे कार्यकाल की नहीं है।
विज्ञापन
एक कूड़ेदान की खरीद पर 14,160 रुपये खर्च किए गए हैं, जबकि स्थानीय बाजार और ऑनलाइन देखने पर इसकी कीमत 3400 से 3600 दिखाई जा रही है। वरिष्ठ कोषाधिकारी की रिपोर्ट के बाद आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू) को जांच सौंपी गई है।
विज्ञापन
रिपोर्ट के अनुसार, निविदा प्रक्रिया में शासनादेशों का पालन नहीं किया गया, ई-टेंडर की अनिवार्यता के बावजूद ऑफलाइन प्रक्रिया अपनाई गई और निविदा का प्रकाशन कम प्रसार वाले दो समाचार पत्रों में किया गया था।
विज्ञापन
रिपोर्ट में यह भी उजागर हुआ कि निविदा में भाग लेने वाली तीनों फर्में तकनीकी रूप से अर्ह नहीं थीं। फिर भी उनकी वित्तीय निविदाएं खोली गईं और सबसे कम दर बताकर कूड़ेदान खरीद का आदेश जारी किया गया। खास बात यह है कि जिस फर्म को निविदा दी गई, उसने किसी अन्य फर्म की एफडीआर लगाई थी, जिससे फर्जीवाड़े और मिलीभगत की आशंका प्रबल हो गई।
साथ ही स्थानीय बाजार और ऑनलाइन दर जो 3400 से लेकर 3600 तक थी उसकी तुलना में कूड़ेदानों की खरीदी गई दर (14,160 प्रति पीस) काफी अधिक पाई गई। अब शासन ने आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू) को जांच सौंपी है। ईओडब्लू के विवेचक डीएन सिंह यादव ने जांच प्रारंभ कर दी है। जांच शुरू होते ही हड़कंप मच गया है। इस घोटाले में संलिप्त अधिकारियों, फर्मों और कर्मचारियों की भूमिका जांच के घेरे में आ चुकी है।
नगर पंचायत घुघली के चेयरमैन संतोष जायसवाल ने बताया कि यह मामला पुराना है। यह गड़बड़ी हमारे कार्यकाल की नहीं है।