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Maharajganj News: भैरहवा मेडिकल कालेज के छात्र 15 दिनों से भूख हड़ताल पर
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प्रिंसिपल का इस्तीफा मुख्य शर्त, स्वास्थ्य सेवाएं बाधित
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। भैरहवा स्थित यूनिवर्सल कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज एवं टीचिंग हॉस्पिटल में छात्रों की भूख हड़ताल रविवार 15वें दिन भी जारी रही। छात्र आंदोलन ने अस्पताल में शिक्षण और उपचार सेवाएं पूरी तरह से बंद कर दी है। कॉलेज प्रशासन प्रदर्शनकारी छात्रों की सभी मांगों को मानने को तैयार हैं, लेकिन प्रिंसिपल के इस्तीफे पर सहमति नहीं बन पाई है।
मेडिकल कॉलेज के जनसंपर्क अधिकारी सुशील गुरुंग ने बताया कि छात्रों द्वारा प्राचार्य प्रोफेसर डॉ. लक्ष्मी पाठक के इस्तीफे को पहली शर्त बनाए जाने के बाद वे किसी समझौते पर नहीं पहुंच पाये। कॉलेज छात्रों द्वारा उठाई गई सभी मांगों को पूरा करने के लिए तैयार है, लेकिन हम प्रिंसिपल के इस्तीफे पर फैसला नहीं कर सकते। रेजिडेंट डॉक्टरों ने भी छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया और मरीजों का इलाज नहीं होने से मरीज इलाज सेवाओं से वंचित हो गये।
प्राचार्य नियुक्त होने के बाद डाॅ. पाठक ने एमबीबीएस तीसरे, चौथे और पांचवें वर्ष और इंटर्नशिप छात्रों के लिए नया ड्रेस कोड लागू किया। छात्रों ने विरोध करते हुए कहा कि ड्रेस कोड स्वीकार्य नहीं है। सभी छात्रों के लिए पैंट और सर्ट की व्यवस्था की। छात्राओं ने यह कहते हुए विरोध जताया कि वे लंबे समय तक पैंट और सर्ज पहनकर इंटर्न नहीं कर सकतीं। एमबीबीएस और बीडीएस के करीब 600 छात्रों के विरोध प्रदर्शन में रेजिडेंट डॉक्टरों ने भी अपना समर्थन जताया है। जिसमें दस प्रतिशत भारतीय छात्र भी हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। भैरहवा स्थित यूनिवर्सल कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज एवं टीचिंग हॉस्पिटल में छात्रों की भूख हड़ताल रविवार 15वें दिन भी जारी रही। छात्र आंदोलन ने अस्पताल में शिक्षण और उपचार सेवाएं पूरी तरह से बंद कर दी है। कॉलेज प्रशासन प्रदर्शनकारी छात्रों की सभी मांगों को मानने को तैयार हैं, लेकिन प्रिंसिपल के इस्तीफे पर सहमति नहीं बन पाई है।
मेडिकल कॉलेज के जनसंपर्क अधिकारी सुशील गुरुंग ने बताया कि छात्रों द्वारा प्राचार्य प्रोफेसर डॉ. लक्ष्मी पाठक के इस्तीफे को पहली शर्त बनाए जाने के बाद वे किसी समझौते पर नहीं पहुंच पाये। कॉलेज छात्रों द्वारा उठाई गई सभी मांगों को पूरा करने के लिए तैयार है, लेकिन हम प्रिंसिपल के इस्तीफे पर फैसला नहीं कर सकते। रेजिडेंट डॉक्टरों ने भी छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया और मरीजों का इलाज नहीं होने से मरीज इलाज सेवाओं से वंचित हो गये।
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प्राचार्य नियुक्त होने के बाद डाॅ. पाठक ने एमबीबीएस तीसरे, चौथे और पांचवें वर्ष और इंटर्नशिप छात्रों के लिए नया ड्रेस कोड लागू किया। छात्रों ने विरोध करते हुए कहा कि ड्रेस कोड स्वीकार्य नहीं है। सभी छात्रों के लिए पैंट और सर्ट की व्यवस्था की। छात्राओं ने यह कहते हुए विरोध जताया कि वे लंबे समय तक पैंट और सर्ज पहनकर इंटर्न नहीं कर सकतीं। एमबीबीएस और बीडीएस के करीब 600 छात्रों के विरोध प्रदर्शन में रेजिडेंट डॉक्टरों ने भी अपना समर्थन जताया है। जिसमें दस प्रतिशत भारतीय छात्र भी हैं।
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