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Maharajganj News: प्रतिबंधित दवा.. पूंजी फंसी तो छोटी दुकानों पर खपाया
Mon, 30 Sep 2024 02:25 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Mon, 30 Sep 2024 02:25 AM IST
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दवा की दुकान का प्रतीकात्मक चित्र।
महराजगंज। पैरासिटामॉल समेत 48 दवाओं पर प्रतिबंध लगने के बाद से थोक विक्रेता दवा खपाने में लगे हैं। छोटे दुकानदारों को छूट पर दवा बिक्री कर अब तक करीब एक करोड़ की दवा का वारा न्यारा कर चुके हैं। इसमें ज्यादातर वे दवाएं हैं, जिनकी एक्सपायरी डेट करीब आ गई थी।
केंद्रीय दवा मानक नियंत्रण संगठन ने पैरासिटामल समेत 48 दवाओं को प्रतिबंधित श्रेणी में शामिल किया है। ऐसे में जिन व्यापारियों के पास ये दवाएं स्टाक में पड़ी हैं वह इसे खपाने के लिए लग गए हैं। एक अनुमान के अनुसार अकेले महराजगंज दवा मंडी की बात करें तो करीब एक करोड़ की दवा खपाई जा चुकी है। थोक कारोबारी फुटकर में आफर का लालच देकर प्रतिबंधित दवा खपा रहे हैं। फंसी हुई पूंजी को निकालने के लिए सभी जरूरी उपाय किए जा रहे हैं।
कंपनी इसे वापस लेने की बात कर रही है, लेकिन इस बारे में कंपनियों की ओर से स्टाकिस्टों को कोई जानकारी नहीं दी गई है। जब तक यह वापस जाएगी लोग करोड़ों की दवा खा चुके होंगे। केंद्रीय दवा मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने देशभर से विभिन्न दवाओं के नमूने मंगाकर जांच कराई। इसकी रिपोर्ट चार दिन पहले सार्वजनिक हुई। जांच में पता लगा कि बुखार की सबसे अधिक विकने वाली दवा पैरासिटामॉल, मधुमेह टाइप वन की सबसे प्रचलित दवा गिलमी प्राइड, ब्लड प्रेशर की दवा टेस्पीसार्टन, गैस की दवा पैनडी समेत 53 दवाएं अधोमानक हैं।
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सूत्रों की माने तो थोक कारोबारी धंधेबाजों के हाथ दवा भेजवा रहे हैं। सीमावर्ती इलाकों में छोटी-छोटी दुकानों पर दवाएं भेजी जा रही हैं। छूट के चक्कर में अधिक मात्रा में दवा छोटे दुकानदार खरीद ले रहे हैं। ज्यादातर दुकानदारों को प्रतिबंध के बारे में जानकारी भी नहीं है। महराजगंज शहर के आसपास के ग्रामीण बाजारों में दवा की दुकानों के अलावा छोटे कस्बों में दवाएं भेजी जा रही हैं।
गैर लाइसेंसी दुकानों पर भी दवाओं को खपाया जा रहा
सूत्र बताते हैं कि कुछ दवाओं को कागज में वापस दिखाने के लिए स्टाकिस्टों ने रखा है, लेकिन पूंजी जल्दी खाली कर प्रतिबंधित दवाओं से किनारा कसा जा रहा है। दवा खपाने के लिए नियम कानून का पूरा ख्याल रखा जा रहा है। दवा खपाने से पहले कागजी औपचारिकता पूरी की जा रही है। गैर लाइसेंसी दुकानों पर भी दवाओं को खपाया जा रहा है। दुकानों पर ऐसी दवाएं करीब एक महीने पहले भी एफडीसी (फिक्सड डोज कंविनेशन) श्रेणी में आने वाली 156 दवाओं को प्रतिबंधित किया गया था। सभी दवाएं फुटकर बाजार में बेच दी गईं थीं।
दवा विक्रेताओं को इस संबंध में जानकारी दी गई है। कंपनियों की ओर से दवा वापस करने की बात कही जा रही है। स्टाकिस्टों के पास इसकी संबंध में जानकारी आ चुकी है। दवा कारोबारियों को परेशान होने की जरूरत नहीं है।
-अशोक कुमार चौरसिया, जिलाध्यक्ष, केमिस्टस एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन
प्रतिबंध लगने के बाद से ही नगर की बैठक कर सभी दवा विक्रेताओं को जानकारी दी जा चुकी है। सभी दवा विक्रेता नियम का पालन करते हुए दवा की बिक्री कर रहे हैं।
-देवेश राय, नगर अध्यक्ष, केमिस्टस एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन
प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री नहीं होने दी जाएगी। जल्द ही अभियान चलाकर इस संबंध में जांच की जाएगी। कहीं नियम का उल्लंघन मिलेगा तो कड़ी कार्रवाई होगी।
-डीपी मौर्या, औषधि निरीक्षक
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केंद्रीय दवा मानक नियंत्रण संगठन ने पैरासिटामल समेत 48 दवाओं को प्रतिबंधित श्रेणी में शामिल किया है। ऐसे में जिन व्यापारियों के पास ये दवाएं स्टाक में पड़ी हैं वह इसे खपाने के लिए लग गए हैं। एक अनुमान के अनुसार अकेले महराजगंज दवा मंडी की बात करें तो करीब एक करोड़ की दवा खपाई जा चुकी है। थोक कारोबारी फुटकर में आफर का लालच देकर प्रतिबंधित दवा खपा रहे हैं। फंसी हुई पूंजी को निकालने के लिए सभी जरूरी उपाय किए जा रहे हैं।
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कंपनी इसे वापस लेने की बात कर रही है, लेकिन इस बारे में कंपनियों की ओर से स्टाकिस्टों को कोई जानकारी नहीं दी गई है। जब तक यह वापस जाएगी लोग करोड़ों की दवा खा चुके होंगे। केंद्रीय दवा मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने देशभर से विभिन्न दवाओं के नमूने मंगाकर जांच कराई। इसकी रिपोर्ट चार दिन पहले सार्वजनिक हुई। जांच में पता लगा कि बुखार की सबसे अधिक विकने वाली दवा पैरासिटामॉल, मधुमेह टाइप वन की सबसे प्रचलित दवा गिलमी प्राइड, ब्लड प्रेशर की दवा टेस्पीसार्टन, गैस की दवा पैनडी समेत 53 दवाएं अधोमानक हैं।
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सूत्रों की माने तो थोक कारोबारी धंधेबाजों के हाथ दवा भेजवा रहे हैं। सीमावर्ती इलाकों में छोटी-छोटी दुकानों पर दवाएं भेजी जा रही हैं। छूट के चक्कर में अधिक मात्रा में दवा छोटे दुकानदार खरीद ले रहे हैं। ज्यादातर दुकानदारों को प्रतिबंध के बारे में जानकारी भी नहीं है। महराजगंज शहर के आसपास के ग्रामीण बाजारों में दवा की दुकानों के अलावा छोटे कस्बों में दवाएं भेजी जा रही हैं।
गैर लाइसेंसी दुकानों पर भी दवाओं को खपाया जा रहा
सूत्र बताते हैं कि कुछ दवाओं को कागज में वापस दिखाने के लिए स्टाकिस्टों ने रखा है, लेकिन पूंजी जल्दी खाली कर प्रतिबंधित दवाओं से किनारा कसा जा रहा है। दवा खपाने के लिए नियम कानून का पूरा ख्याल रखा जा रहा है। दवा खपाने से पहले कागजी औपचारिकता पूरी की जा रही है। गैर लाइसेंसी दुकानों पर भी दवाओं को खपाया जा रहा है। दुकानों पर ऐसी दवाएं करीब एक महीने पहले भी एफडीसी (फिक्सड डोज कंविनेशन) श्रेणी में आने वाली 156 दवाओं को प्रतिबंधित किया गया था। सभी दवाएं फुटकर बाजार में बेच दी गईं थीं।
दवा विक्रेताओं को इस संबंध में जानकारी दी गई है। कंपनियों की ओर से दवा वापस करने की बात कही जा रही है। स्टाकिस्टों के पास इसकी संबंध में जानकारी आ चुकी है। दवा कारोबारियों को परेशान होने की जरूरत नहीं है।
-अशोक कुमार चौरसिया, जिलाध्यक्ष, केमिस्टस एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन
प्रतिबंध लगने के बाद से ही नगर की बैठक कर सभी दवा विक्रेताओं को जानकारी दी जा चुकी है। सभी दवा विक्रेता नियम का पालन करते हुए दवा की बिक्री कर रहे हैं।
-देवेश राय, नगर अध्यक्ष, केमिस्टस एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन
प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री नहीं होने दी जाएगी। जल्द ही अभियान चलाकर इस संबंध में जांच की जाएगी। कहीं नियम का उल्लंघन मिलेगा तो कड़ी कार्रवाई होगी।
-डीपी मौर्या, औषधि निरीक्षक