{"_id":"6605e0457e2fc82d22026f15","slug":"ban-on-cutting-and-pruning-of-trees-lifted-to-increase-mango-production-maharajganj-news-c-206-1-sgkp1021-118755-2024-03-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Maharajganj News: आम की पैदावार बढ़ाने के लिए पेड़ों की कटाई-छंटाई पर लगी रोक हटी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Maharajganj News: आम की पैदावार बढ़ाने के लिए पेड़ों की कटाई-छंटाई पर लगी रोक हटी
Fri, 29 Mar 2024 02:56 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Fri, 29 Mar 2024 02:56 AM IST
विज्ञापन
निचलौल। आम की फसल की पैदावार बढ़ाने के लिए पेड़ों की कटाई-छंटाई पर लगी रोक हटा दी गई है। आम के बगीचे जो चार से पांच दशक पुराने हो चुके हैं, उनकी पैदावार घटकर वर्तमान में महज 45 फीसदी हो गई है। ऐसे में अपर मुख्य सचिव ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को पत्र भेजकर आम की पेड़ों की कटाई छटाई से रोक हटाने के लिए निर्देश दिए है।
वन विभाग कार्यालय में भेजे गए पत्र में अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने कहा है कि आम फसल की पैदावार बढ़ाने के लिए छह मार्च को केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमान खेड़ा, लखनऊ के निदेशक एवं क्विंक्वेनिया रिव्यू टीम के अधिकारियों के साथ बैठक आयोजित की गई। इस दौरान टीम के सदस्यों की ओर से अवगत कराया गया, कि आम के बगीचे जो चार से पांच दशक पुराने हो चुके हैं। उनकी पैदावार घटकर 7 टन प्रति हेक्टेअर हो गई है। जबकि राष्ट्रीय औसत लगभग 15 टन प्रति हेक्टेअर है। ऐसे में पुराने हो चुके आम के बगीचे में आम का उत्पादन बढ़ाने के लिए कटाई-छटाई की आवश्यकता होती है। पुराने आम के पेड़ों की शाखाओं की कटाई-छटाई पर वन विभाग के अधिकारियों ने रोक लगा दिया है। इन कार्यों के लिए किसानों को वन विभाग से अनुमति की मांग की जाती है। जिस दौरान निर्णय लिया गया, कि पुराने हो चुके आम के बगीचों में पैदावार बढ़ाने के लिए किसानों की ओर से आम के पेड़ों की शाखाओं का कटाई-छटाई कार्य के लिए किसी भी विभाग से अनुमति की आवश्यकता नहीं है। क्योंकि यह एक स्थापित औद्यानिक प्रक्रिया है। जिसका सभी संबंधित विभाग पालन करेंगे।
विज्ञापन
वन विभाग कार्यालय में भेजे गए पत्र में अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने कहा है कि आम फसल की पैदावार बढ़ाने के लिए छह मार्च को केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमान खेड़ा, लखनऊ के निदेशक एवं क्विंक्वेनिया रिव्यू टीम के अधिकारियों के साथ बैठक आयोजित की गई। इस दौरान टीम के सदस्यों की ओर से अवगत कराया गया, कि आम के बगीचे जो चार से पांच दशक पुराने हो चुके हैं। उनकी पैदावार घटकर 7 टन प्रति हेक्टेअर हो गई है। जबकि राष्ट्रीय औसत लगभग 15 टन प्रति हेक्टेअर है। ऐसे में पुराने हो चुके आम के बगीचे में आम का उत्पादन बढ़ाने के लिए कटाई-छटाई की आवश्यकता होती है। पुराने आम के पेड़ों की शाखाओं की कटाई-छटाई पर वन विभाग के अधिकारियों ने रोक लगा दिया है। इन कार्यों के लिए किसानों को वन विभाग से अनुमति की मांग की जाती है। जिस दौरान निर्णय लिया गया, कि पुराने हो चुके आम के बगीचों में पैदावार बढ़ाने के लिए किसानों की ओर से आम के पेड़ों की शाखाओं का कटाई-छटाई कार्य के लिए किसी भी विभाग से अनुमति की आवश्यकता नहीं है। क्योंकि यह एक स्थापित औद्यानिक प्रक्रिया है। जिसका सभी संबंधित विभाग पालन करेंगे।
विज्ञापन