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Maharajganj News: उफान पर बघेला नाला, नारायणी का भी जलस्तर बढ़ने से सीमावर्ती ग्रामीण चिंतित
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नारायणी नदी का बढ़ा जलस्तर।
नदियों का बढ़ रहा जलस्तर, लोगों को सता रहा बाढ़ का डर
नेपाल में लगातार हो रही बारिश से बढ़ रहा नदियों का जलस्तर
महराजगंज। नेपाल में लगातार हो रही बारिश का असर अब भारत-नेपाल सीमा से लगे महराजगंज जिले में भी दिखने लगा है। बघेला नाला उफान पर है, जबकि नारायणी (गंडक) नदी का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है। इससे सीमावर्ती गांवों के लोगों में बाढ़ की आशंका गहराने लगी है। ग्रामीण चिंतित हैं और स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
ठूठीबारी, लक्ष्मीपुर, श्यामकाट, चमनगंज, खैरहवा दुबे, बैरिया, रेहरा और नदी किनारे बसे अन्य गांवों के लोगों का कहना है कि नेपाल में लगातार बारिश होने पर सबसे पहले बघेला नाला और नारायणी नदी का जलस्तर बढ़ता है। यदि बारिश का सिलसिला जारी रहा तो निचले इलाकों में पानी भरने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
ठूठीबारी के रामजीवन ने कहा कि हर वर्ष बाढ़ के दौरान खेतों में लगी फसलें जलमग्न हो जाती हैं और कई संपर्क मार्ग बाधित हो जाते हैं। पशुओं के चारे और आवागमन की समस्या भी खड़ी हो जाती है। इससे लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
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रेहरा निवासी राजेश कुमार ने कहा कि प्रशासन को पहले से ही राहत और बचाव की तैयारियां पूरी कर लेनी चाहिए। अभी नारायणी नदी और अन्य नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे है लेकिन लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए ग्रामीण सतर्क हो गए हैं।
नेपाल के क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण वाल्मीकिनगर गंडक बैराज से छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा भी तेजी से बढ़ी है। इससे नारायणी नदी के जलस्तर में और बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। सिंचाई विभाग और प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल तटबंध सुरक्षित हैं लेकिन लगातार निगरानी की जा रही है।
बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित होने वाले क्षेत्र
जिले में नारायणी नदी और बघेला नाला के जलस्तर बढ़ने पर सबसे अधिक असर ठूठीबारी, लक्ष्मीपुर क्षेत्र के सीमावर्ती गांवों, श्यामकाट, चमनगंज, बैरिया, खैरहवा दुबे, रेहरा तथा नदी के किनारे बसे अन्य निचले इलाकों पर पड़ता है। इन क्षेत्रों में खेतों में पानी भरने, संपर्क मार्ग बाधित होने और जनजीवन प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है।
रोहिन का बढ़ रहा जलस्तर, तटबंध के बाद भी कटान का डर
संवाद न्यूज एजेंसी
लक्ष्मीपुर। लक्ष्मीपुर ब्लॉक क्षेत्र में रोहिन नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से नदी किनारे बसे गांवों के लोगों की चिंता बढ़ गई है। अराजी सुबाइन से सूबेदारपुर तक लगभग 9 किलोमीटर लंबे रोहिन तटबंध की मरम्मत और उसके किनारे पक्की सड़क बनने के बावजूद ग्रामीण खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि तेज बारिश होने पर हर वर्ष बाढ़ और कटान का खतरा बना रहता है।
रोहिन नदी नौतनवा और फरेंदा तहसील क्षेत्र से होकर गुजरती है, जो गोरखपुर के राप्ती नदी में मिल जाती है। वर्तमान में लगातार बरसात होने से रोहिन नदी का जलस्तर बढ़ रहा है। जिससे ग्रामीण भयभीत हैं। बारिश के मौसम में हर नदी उफान पर आने से खालिकगढ़, गौहरपुर, रघुनाथपुर, रानीपुर, रजापुर, मठियाईदू सहित कई गांवों के करीब 20 हजार लोग प्रभावित होते हैं। जलभराव के कारण फसलों को नुकसान पहुंचता है और किसानों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीण जितेंद्र जायसवाल, साधु, सुखराम, हदीस, रामकेवल और रामप्रसाद ने बताया कि रोहिन नदी के पानी से हर वर्ष उनके फसल बर्बाद हो जाते है। केवल तटबंध की मरम्मत पर्याप्त नहीं है। उनका कहना है कि सूबेदारपुर की ओर मजबूत बांध बनाया जाए और करीमदारपुर बांध से लिखीअहवा घाट होते हुए दनदहवा तक चकरोड को ऊंचा कर पक्की सड़क बनाई जाए ताकि बरसात में आवागमन बाधित न हो।
जिला पंचायत सदस्य सुरेश चंद सहानी ने बताया कि अराजी सुबाइन से सूबेदारपुर तक लगभग 9 किलोमीटर लंबे रोहिन तटबंध की मरम्मत तो हर वर्ष होती है लेकिन किसानों के फसलों को बर्बाद होने से रोक नहीं पाती है। कहीं न कहीं तटबंध टूट ही जाता है।
खंड विकास अधिकारी लक्ष्मीपुर ने बताया कि प्रशासन की निगाहें रोहिन नदी के जलस्तर व तटबंध पर है। ग्रामीणों की सुरक्षा का प्रशासन को ख्याल है।
नदियों का जलस्तर
नदी वर्तमान स्थिति डेंजर लेवल
वाल्मीकि नगर बैराज 1,21,500 क्यूसेक 109.670 मीटर
रोहिन नदी त्रिमुहानी घाट 81.34 82.44 मीटर
रोहिन नदी भौराबारी 76.95 79.00 मीटर
रोहिन बैराज रतनपुर 6514.5 क्यूसेक 99.35 मीटर
महाव नाला 7.00 फीट 5.00 फीट
राप्ती नदी रिगोली 77.32 80.30 मीटर
चंदन नदी 99.80 101.05 मीटर
प्यास नदी 101.40 102.25 मीटर
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नेपाल में लगातार हो रही बारिश से बढ़ रहा नदियों का जलस्तर
महराजगंज। नेपाल में लगातार हो रही बारिश का असर अब भारत-नेपाल सीमा से लगे महराजगंज जिले में भी दिखने लगा है। बघेला नाला उफान पर है, जबकि नारायणी (गंडक) नदी का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है। इससे सीमावर्ती गांवों के लोगों में बाढ़ की आशंका गहराने लगी है। ग्रामीण चिंतित हैं और स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
ठूठीबारी, लक्ष्मीपुर, श्यामकाट, चमनगंज, खैरहवा दुबे, बैरिया, रेहरा और नदी किनारे बसे अन्य गांवों के लोगों का कहना है कि नेपाल में लगातार बारिश होने पर सबसे पहले बघेला नाला और नारायणी नदी का जलस्तर बढ़ता है। यदि बारिश का सिलसिला जारी रहा तो निचले इलाकों में पानी भरने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
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ठूठीबारी के रामजीवन ने कहा कि हर वर्ष बाढ़ के दौरान खेतों में लगी फसलें जलमग्न हो जाती हैं और कई संपर्क मार्ग बाधित हो जाते हैं। पशुओं के चारे और आवागमन की समस्या भी खड़ी हो जाती है। इससे लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
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रेहरा निवासी राजेश कुमार ने कहा कि प्रशासन को पहले से ही राहत और बचाव की तैयारियां पूरी कर लेनी चाहिए। अभी नारायणी नदी और अन्य नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे है लेकिन लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए ग्रामीण सतर्क हो गए हैं।
नेपाल के क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण वाल्मीकिनगर गंडक बैराज से छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा भी तेजी से बढ़ी है। इससे नारायणी नदी के जलस्तर में और बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। सिंचाई विभाग और प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल तटबंध सुरक्षित हैं लेकिन लगातार निगरानी की जा रही है।
बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित होने वाले क्षेत्र
जिले में नारायणी नदी और बघेला नाला के जलस्तर बढ़ने पर सबसे अधिक असर ठूठीबारी, लक्ष्मीपुर क्षेत्र के सीमावर्ती गांवों, श्यामकाट, चमनगंज, बैरिया, खैरहवा दुबे, रेहरा तथा नदी के किनारे बसे अन्य निचले इलाकों पर पड़ता है। इन क्षेत्रों में खेतों में पानी भरने, संपर्क मार्ग बाधित होने और जनजीवन प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है।
रोहिन का बढ़ रहा जलस्तर, तटबंध के बाद भी कटान का डर
संवाद न्यूज एजेंसी
लक्ष्मीपुर। लक्ष्मीपुर ब्लॉक क्षेत्र में रोहिन नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से नदी किनारे बसे गांवों के लोगों की चिंता बढ़ गई है। अराजी सुबाइन से सूबेदारपुर तक लगभग 9 किलोमीटर लंबे रोहिन तटबंध की मरम्मत और उसके किनारे पक्की सड़क बनने के बावजूद ग्रामीण खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि तेज बारिश होने पर हर वर्ष बाढ़ और कटान का खतरा बना रहता है।
रोहिन नदी नौतनवा और फरेंदा तहसील क्षेत्र से होकर गुजरती है, जो गोरखपुर के राप्ती नदी में मिल जाती है। वर्तमान में लगातार बरसात होने से रोहिन नदी का जलस्तर बढ़ रहा है। जिससे ग्रामीण भयभीत हैं। बारिश के मौसम में हर नदी उफान पर आने से खालिकगढ़, गौहरपुर, रघुनाथपुर, रानीपुर, रजापुर, मठियाईदू सहित कई गांवों के करीब 20 हजार लोग प्रभावित होते हैं। जलभराव के कारण फसलों को नुकसान पहुंचता है और किसानों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीण जितेंद्र जायसवाल, साधु, सुखराम, हदीस, रामकेवल और रामप्रसाद ने बताया कि रोहिन नदी के पानी से हर वर्ष उनके फसल बर्बाद हो जाते है। केवल तटबंध की मरम्मत पर्याप्त नहीं है। उनका कहना है कि सूबेदारपुर की ओर मजबूत बांध बनाया जाए और करीमदारपुर बांध से लिखीअहवा घाट होते हुए दनदहवा तक चकरोड को ऊंचा कर पक्की सड़क बनाई जाए ताकि बरसात में आवागमन बाधित न हो।
जिला पंचायत सदस्य सुरेश चंद सहानी ने बताया कि अराजी सुबाइन से सूबेदारपुर तक लगभग 9 किलोमीटर लंबे रोहिन तटबंध की मरम्मत तो हर वर्ष होती है लेकिन किसानों के फसलों को बर्बाद होने से रोक नहीं पाती है। कहीं न कहीं तटबंध टूट ही जाता है।
खंड विकास अधिकारी लक्ष्मीपुर ने बताया कि प्रशासन की निगाहें रोहिन नदी के जलस्तर व तटबंध पर है। ग्रामीणों की सुरक्षा का प्रशासन को ख्याल है।
नदियों का जलस्तर
नदी वर्तमान स्थिति डेंजर लेवल
वाल्मीकि नगर बैराज 1,21,500 क्यूसेक 109.670 मीटर
रोहिन नदी त्रिमुहानी घाट 81.34 82.44 मीटर
रोहिन नदी भौराबारी 76.95 79.00 मीटर
रोहिन बैराज रतनपुर 6514.5 क्यूसेक 99.35 मीटर
महाव नाला 7.00 फीट 5.00 फीट
राप्ती नदी रिगोली 77.32 80.30 मीटर
चंदन नदी 99.80 101.05 मीटर
प्यास नदी 101.40 102.25 मीटर