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Maharajganj News: ट्रामा सेंटर के बेड पर तीमारदारों का कब्जा, बरामदे में मरीजों का इलाज
Mon, 26 May 2025 01:00 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Mon, 26 May 2025 01:00 AM IST
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महराजगंज। जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर में मरीजों का इलाज बरामदे में चल रहा है, क्योंकि यहां वार्ड के बेड पर तीमारदारों का कब्जा रहता है। ऐसे में मरीजों को काफी परेशानी होती है।
जानकारी के अनुसार, ट्रामा सेंटर में रोजाना 20 से 25 दुर्घटनाग्रस्त मरीज इलाज के लिए आते हैं। इसके अलावा 60 से 70 मरीज गंभीर ट्रामा सेंटर पहुंच रहे हैं, लेकिन ज्यादातर मरीजों का इलाज वार्ड में नहीं होता। इन्हें पहले बरामदे में ही जरूरी इलाज किया जाता है। अगर मरीज गंभीर हालत में है तो उसे भर्ती किया जाता है।
भर्ती मरीज के साथ आने वाले तीमारदार मरीजों के बेड पर ही कब्जा कर लेते हैं। ऐसे में इस वार्ड में भर्ती अन्य मरीजों को भी परेशानी होती है। वहीं गंभीर हालत में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को बरामदे में ही इलाज किया जाता है। रिश्तेदार के पेट में दर्द का इलाज कराने पहुंचे मनोज ने बताया कि यहां तो बरामदे में ही इलाज किया जा रहा है।
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अंदर वार्ड में लोग भरे रहते हैं। इससे परेशानी हो रही है। राकेश ने कहा कि इलाज के लिए एक वार्ड निश्चित किया जाए, जिससे मरीजों को परेशानी न हो। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एके द्विवेदी ने कहा कि जो संसाधन है उसमें बेहतर इलाज का प्रयास किया जा रहा है। अगर ऐसी बात है तो जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
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जानकारी के अनुसार, ट्रामा सेंटर में रोजाना 20 से 25 दुर्घटनाग्रस्त मरीज इलाज के लिए आते हैं। इसके अलावा 60 से 70 मरीज गंभीर ट्रामा सेंटर पहुंच रहे हैं, लेकिन ज्यादातर मरीजों का इलाज वार्ड में नहीं होता। इन्हें पहले बरामदे में ही जरूरी इलाज किया जाता है। अगर मरीज गंभीर हालत में है तो उसे भर्ती किया जाता है।
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भर्ती मरीज के साथ आने वाले तीमारदार मरीजों के बेड पर ही कब्जा कर लेते हैं। ऐसे में इस वार्ड में भर्ती अन्य मरीजों को भी परेशानी होती है। वहीं गंभीर हालत में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को बरामदे में ही इलाज किया जाता है। रिश्तेदार के पेट में दर्द का इलाज कराने पहुंचे मनोज ने बताया कि यहां तो बरामदे में ही इलाज किया जा रहा है।
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अंदर वार्ड में लोग भरे रहते हैं। इससे परेशानी हो रही है। राकेश ने कहा कि इलाज के लिए एक वार्ड निश्चित किया जाए, जिससे मरीजों को परेशानी न हो। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एके द्विवेदी ने कहा कि जो संसाधन है उसमें बेहतर इलाज का प्रयास किया जा रहा है। अगर ऐसी बात है तो जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।