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Maharajganj News: खंडहर मकान में फंदे से लटका मिला आशा का शव
Mon, 01 Apr 2024 01:05 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Mon, 01 Apr 2024 01:05 PM IST
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निचलौल। थाना क्षेत्र के बूढ़ाडीह कला गांव में शनिवार दोपहर में आशा कार्यकर्ता का शव उसके घर से महज कुछ दूरी पर स्थित एक खंडहर मकान में साड़ी के फंदे से लटका मिला। शव मिलने की खबर लगते ही मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई में जुट गई।
जानकारी के मुताबिक, बूढ़ाडीह कला गांव निवासी मैनावती देवी (45) सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र निचलौल में आशा के पद पर कार्यरत थीं। पति सुभाष प्रजापति की बीते करीब तीन माह पहले सड़क हादसे में मौत हो गई थी। पति की मौत के बाद मैनावती काफी परेशान रहतीं थीं। क्योंकि घर की आर्थिक हालात ठीक न होने के साथ ही तीन बेटियां प्रियंका (22) सोनम (20) महिमा (18) और इकलौते बेटे विवेक प्रजापति (12) की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी। इसी बीच आशा मैनावती शुक्रवार शाम को बच्चों से बगैर कुछ बताए ही अचानक घर से लापता हो गईं। उसके बाद से बच्चे पूरी रात और दोपहर तक मां की तलाश में भटकते रहे। इसी बीच मृत आशा मैनावती की छोटी बेटी महिमा की नजर घर से कुछ दूर स्थित एक खंडहर मकान के अंदर पड़ी। जहां पर महिमा ने देखा की मां मैनावती का शव साड़ी के फंदे से लटक रहा है। घटना की तस्वीर देख महिमा सन्न हो गई। फिर घर आकर बहन और भाई को इसकी सूचना देते हुए चीखने चिल्लाने लगी। उसके बाद मौके पर ग्रामीणों की भीड़ जुट गई।
थाना प्रभारी निरीक्षक सत्यप्रकाश सिंह से मिली जानकारी के मुताबिक घटना की सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस आशा मैनावती के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। लोगों और परिजनों से पूछताछ में पता चल रहा है कि मैनावती पति की मौत के बाद से अवसाद में रह रही थी। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर मौत की वजह साफ हो सकेगी।
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लोगों में दो तरह की चर्चाएं
आशा मैनावती की मौत के बाद गांव में लोगों के बीच दो तरह की चर्चाएं सुनने को मिल रहीं थीं। कुछ लोग बता रहे थे, कि मैनावती के पति की सड़क हादसे में मौत होने के बाद से वह बच्चों के भविष्य को लेकर काफी परेशान रहती थी। करीब दो दिन पहले मैनावती बेटी की शादी के लिए परसामीर थाना सिंदुरिया निवासी भाई से चर्चा कर रही थी। वहीं कुछ लोग दबे जुबान आशा की हत्याकर शव को लटकाने की भी चर्चा करते रहे।
अस्पताल में भी मैनावती रहती थीं गुमशुदा
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के कर्मियों से मिली जानकारी के मुताबिक मैनावती अस्पताल में आशा के पद पर कार्यरत थीं। मैनावती काफी चंचल व मिलनसार महिला थी। लेकिन पति की सड़क हादसे में मौत के बाद से वह काफी गुमशुदा रहती थी। क्योंकि अस्पताल पर बैठक में मैनावती शामिल तो होती थी, लेकिन वह काफी गुमशुदा रहती थी। इतना ही नहीं उसके चेहरे पर मुस्कान भी नहीं रहता था। न ही किसी से खुलकर बातचीत करती थी।
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जानकारी के मुताबिक, बूढ़ाडीह कला गांव निवासी मैनावती देवी (45) सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र निचलौल में आशा के पद पर कार्यरत थीं। पति सुभाष प्रजापति की बीते करीब तीन माह पहले सड़क हादसे में मौत हो गई थी। पति की मौत के बाद मैनावती काफी परेशान रहतीं थीं। क्योंकि घर की आर्थिक हालात ठीक न होने के साथ ही तीन बेटियां प्रियंका (22) सोनम (20) महिमा (18) और इकलौते बेटे विवेक प्रजापति (12) की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी। इसी बीच आशा मैनावती शुक्रवार शाम को बच्चों से बगैर कुछ बताए ही अचानक घर से लापता हो गईं। उसके बाद से बच्चे पूरी रात और दोपहर तक मां की तलाश में भटकते रहे। इसी बीच मृत आशा मैनावती की छोटी बेटी महिमा की नजर घर से कुछ दूर स्थित एक खंडहर मकान के अंदर पड़ी। जहां पर महिमा ने देखा की मां मैनावती का शव साड़ी के फंदे से लटक रहा है। घटना की तस्वीर देख महिमा सन्न हो गई। फिर घर आकर बहन और भाई को इसकी सूचना देते हुए चीखने चिल्लाने लगी। उसके बाद मौके पर ग्रामीणों की भीड़ जुट गई।
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थाना प्रभारी निरीक्षक सत्यप्रकाश सिंह से मिली जानकारी के मुताबिक घटना की सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस आशा मैनावती के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। लोगों और परिजनों से पूछताछ में पता चल रहा है कि मैनावती पति की मौत के बाद से अवसाद में रह रही थी। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर मौत की वजह साफ हो सकेगी।
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लोगों में दो तरह की चर्चाएं
आशा मैनावती की मौत के बाद गांव में लोगों के बीच दो तरह की चर्चाएं सुनने को मिल रहीं थीं। कुछ लोग बता रहे थे, कि मैनावती के पति की सड़क हादसे में मौत होने के बाद से वह बच्चों के भविष्य को लेकर काफी परेशान रहती थी। करीब दो दिन पहले मैनावती बेटी की शादी के लिए परसामीर थाना सिंदुरिया निवासी भाई से चर्चा कर रही थी। वहीं कुछ लोग दबे जुबान आशा की हत्याकर शव को लटकाने की भी चर्चा करते रहे।
अस्पताल में भी मैनावती रहती थीं गुमशुदा
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के कर्मियों से मिली जानकारी के मुताबिक मैनावती अस्पताल में आशा के पद पर कार्यरत थीं। मैनावती काफी चंचल व मिलनसार महिला थी। लेकिन पति की सड़क हादसे में मौत के बाद से वह काफी गुमशुदा रहती थी। क्योंकि अस्पताल पर बैठक में मैनावती शामिल तो होती थी, लेकिन वह काफी गुमशुदा रहती थी। इतना ही नहीं उसके चेहरे पर मुस्कान भी नहीं रहता था। न ही किसी से खुलकर बातचीत करती थी।