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'आश्ाा' को एड्स उन्मूलन से जोड़ा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 29 Aug 2016 12:31 AM IST
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समीक्षा बैठक करतीं केंद्रीय स्वास्थ्य परिवार कल्याण राज्य मंत्री।
- फोटो : अमर उजाला
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महराजगंज। भारत सरकार की स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने एचआईवी पाजिटिव मरीजों को दवाओं का कोर्स पूरा कराने की जिम्मेदारी आशा कार्यकर्ताओं पर डाल दी। इन मरीजों को आशा के माध्यम से दवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। दवाओं का कोर्स पूरा करने पर ही आशा को मानदेय का भुगतान किया जाएगा।
रविवार को राज्य मंत्री पीडब्लूडी डाक बंगले में समीक्षा बैठक में सीएमओ डा. कृष्ण गोपाल ने केंद्रीय राज्यमंत्री को बताया कि जिले में एचआईवी पाजिटिव तीन मरीज हैं और वे सभी एआरटी सेंटर से जुड़े हैं। यहां से उन्हें दवाएं दी जाती हैं। जिले में टीबी से प्रभावित कुल मिलाकर 993 रोगी हैं। इनको भी सभी सीएचसी व पीएचसी से दवाएं दी जाती हैं।
डिप्टी सीएमओ डा. राजेन्द्र प्रसाद ने बताया कि जिले में संस्थागत प्रसव 52 प्रतिशत हैं। 102 एंबुलेंस से गर्भवती महिलाओं को आशा लाती हैं। लगभग 19000 प्रसव में 7059 महिलाओं के साथ आशा आई हैं। उन्होंने बताया कि जननी सुरक्षा योजना के तहत 1400 रुपऐ का भुगतान खाते में किया जाता है। शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत सभी भर्ती माताओं को नाश्ता, भोजन दिया जाता है। मंत्री ने कहा कि सभी अधिकारी नियमित रूप से खाने की गुणवत्ता चेक करें।
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सीएमओ डा. कृष्ण गोपाल ने बताया कि जिले में पुरुष चिकित्सालय 100 बेड का संचालित है। 100 बेड का महिला अस्पताल अक्टूबर 2016 तक पूरा हो जाएगा। जिला अस्पताल में ही बाल पोषण केंद्र संचालित है। आंगनबाड़ी द्वारा अतिकुपोषित बच्चों को यहां भेजा जाता है। सीएमएस डा. आरबीराम ने बताया कि जिले में महिला चिकित्सक नहीं है। जबकि यहां के लिए छह पद स्वीकृत है। बैठक में अपर निदेशक स्वास्थ्य, गोरखपुर डा. आरके तिवारी, डिप्टी सीएमओ डा. आईए अंसारी, एसडीएम देवेश गुप्ता, डा. पीके आदि उपस्थित रहे।
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रविवार को राज्य मंत्री पीडब्लूडी डाक बंगले में समीक्षा बैठक में सीएमओ डा. कृष्ण गोपाल ने केंद्रीय राज्यमंत्री को बताया कि जिले में एचआईवी पाजिटिव तीन मरीज हैं और वे सभी एआरटी सेंटर से जुड़े हैं। यहां से उन्हें दवाएं दी जाती हैं। जिले में टीबी से प्रभावित कुल मिलाकर 993 रोगी हैं। इनको भी सभी सीएचसी व पीएचसी से दवाएं दी जाती हैं।
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डिप्टी सीएमओ डा. राजेन्द्र प्रसाद ने बताया कि जिले में संस्थागत प्रसव 52 प्रतिशत हैं। 102 एंबुलेंस से गर्भवती महिलाओं को आशा लाती हैं। लगभग 19000 प्रसव में 7059 महिलाओं के साथ आशा आई हैं। उन्होंने बताया कि जननी सुरक्षा योजना के तहत 1400 रुपऐ का भुगतान खाते में किया जाता है। शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत सभी भर्ती माताओं को नाश्ता, भोजन दिया जाता है। मंत्री ने कहा कि सभी अधिकारी नियमित रूप से खाने की गुणवत्ता चेक करें।
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सीएमओ डा. कृष्ण गोपाल ने बताया कि जिले में पुरुष चिकित्सालय 100 बेड का संचालित है। 100 बेड का महिला अस्पताल अक्टूबर 2016 तक पूरा हो जाएगा। जिला अस्पताल में ही बाल पोषण केंद्र संचालित है। आंगनबाड़ी द्वारा अतिकुपोषित बच्चों को यहां भेजा जाता है। सीएमएस डा. आरबीराम ने बताया कि जिले में महिला चिकित्सक नहीं है। जबकि यहां के लिए छह पद स्वीकृत है। बैठक में अपर निदेशक स्वास्थ्य, गोरखपुर डा. आरके तिवारी, डिप्टी सीएमओ डा. आईए अंसारी, एसडीएम देवेश गुप्ता, डा. पीके आदि उपस्थित रहे।