फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Maharajganj News ›   As the water receded, the paths turned into swamps; neither boats could navigate nor vehicles reach the village.

Maharajganj News: पानी घटा तो रास्ते हुए दलदल, नाव चल रही न वाहन पहुंच रहे गांव

Wed, 30 Sep 2026 02:15 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 30 Sep 2026 02:15 AM IST
विज्ञापन
As the water receded, the paths turned into swamps; neither boats could navigate nor vehicles reach the village.
शिकारपुर गांव में बाढ़ के पानी में डूबा घर।
विज्ञापन

नाव और वाहन बंद, दलदल में तब्दील रास्तों से पैदल निकल रहे ग्रामीण
बाढ़ के पानी के कारण ग्रामीणों को हुआ काफी नुकसान, अब घर लौट रहे लोग

निचलौल। गंडक बैराज से नारायणी नदी में छोड़े जा रहे पानी का स्तर लगातार घटने से सोहगीबरवा, शिकारपुर और भोथहा के लोगों को बाढ़ से राहत तो मिली है लेकिन रास्ते दलदल में तब्दील हो गए हैं। ऐसे में नाव नहीं चल पा रही और वाहन भी गांवों तक नहीं पहुंच रहे हैं। मजबूरी में ग्रामीणों को पैदल ही निकलना आवागमन करना पड़ रहा है।
मंगलवार को सोहगीबरवा से भोथहा की करीब तीन किलोमीटर दूरी तय करने में लोगों को चार घंटे लग गए। कई लोग कंधे पर गैस सिलिंडर और जरूरी सामान लेकर दलदली रास्तों से गुजरते दिखाई दिए। सोमवार रात गंडक बैराज से 2.73 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था, जो मंगलवार सुबह छह बजे घटकर करीब 2.12 लाख क्यूसेक रह गया। जलस्तर घटने से गांवों में जमा पानी निकलने लगा है, लेकिन पीछे कीचड़ और दलदल छोड़ गया है। आवागमन ठप होने से लोगों के सामने भोजन, पानी और जरूरी सामान पहुंचाने की चुनौती बनी हुई है।
विज्ञापन



कई पशुओं के बहने की सूचना
बाढ़ से पशुओं के ठिकाने भी डूब गए थे। पशुपालकों ने मवेशियों को ऊंचे स्थानों पर पहुंचाया लेकिन रविवार रात आई तेज धारा में कई पशु बह गए। शिकारपुर के देवेन्द्र कुमार ने बताया कि उनकी आंखों के सामने उनकी भैंस तेज धारा में बह गई थी। मंगलवार को वह मृत अवस्था में मिली। वहीं शेषनाथ ने उनके पशुबाड़े से दर्जनों सुअर बह जाने का दावा किया है। प्रशासन के मुताबिक कुछ अन्य पशुओं के भी बहने और बिछड़ने की सूचना है। प्रशासन की ओर से नवरंगिया में पशुओं के लिए भूसे की व्यवस्था की गई है। आसपास ठहरे पशुपालक वहां से भूसा ले जा रहे हैं लेकिन गांवों में फंसे लोगों और उनके मवेशियों तक चारा-पानी पहुंचाना अभी चुनौती बना हुआ है।
विज्ञापन
विज्ञापन


गन्ना व केला की फसल तबाह, घरों में रखा अनाज भी बर्बाद

सोहगीबरवा, शिकारपुर और भोथहा में बाढ़ ने बड़े पैमाने पर फसलों और घरेलू सामान को नुकसान पहुंचाया है। ग्रामीण सोमनाथ के अनुसार गन्ना और केले की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। घरों में रखा अनाज पानी में बह गया, जबकि बचा हुआ अनाज भीगकर खराब हो गया। पानी के दबाव और लंबे समय तक जलभराव के कारण कई कच्चे और कमजोर घर गिर गए हैं। अभी गांव चारों तरफ से पानी से घिरे हैं। ऐसे में फसलों और मकानों के वास्तविक नुकसान का आकलन संभव नहीं है। पानी पूरी तरह निकलने के बाद ही नुकसान की तस्वीर साफ होगी।


सीएचसी से पानी निकला, स्वास्थ्य टीम कर रही निगरानी
बाढ़ की आशंका को देखते हुए पहले से व्यवस्थित की गई सीएचसी सोहगीबरवा भी पानी में डूब गया था। मंगलवार को परिसर से पानी निकल गया। स्वास्थ्य विभाग की टीम प्रभावित क्षेत्रों में जाकर लोगों का उपचार कर रही है। सीएचसी अधीक्षक डॉ. उमेश चंद्र ने बताया कि दवाओं का पर्याप्त स्टॉक पहले से रखा गया था। डॉ. ब्यूटी कुमारी, डॉ. राकेश कुमार, दिलीप पटेल, फार्मासिस्ट श्रीनिवास पटेल और एएनएम और आशा कार्यकर्ता प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की स्वास्थ्य जांच कर रहे हैं। वायरल फीवर और त्वचा रोग से संबंधित मरीज अधिक मिल रहे हैं। सांप के काटने की स्थिति से निपटने के लिए 220 एंटी स्नेक वेनम इंजेक्शन उपलब्ध हैं। ऑक्सीजन की भी पर्याप्त व्यवस्था है। अभी तक किसी गंभीर मरीज की सूचना नहीं है।

दो दिन छत पर गुजारे, अब कीचड़ से जूझ रहे
रोजगार सेवक वीरेंद्र भारती ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में ऐसी भयावह स्थिति कभी नहीं देखी। आंखों के सामने पशुओं को बहते और कमजोर घरों को गिरते देख हिम्मत टूट रही थी। पानी घटने की सूचना से उम्मीद जगी है लेकिन अब गांवों में कीचड़ की समस्या से जूझना पड़ रहा है। ग्रामीण विश्वनाथ ने बताया कि 2003 में भी बाढ़ आई थी लेकिन गांव इस तरह नहीं डूबे थे। वर्ष 2017 और 2019 में भी दियारा क्षेत्र ने बाढ़ का सामना किया था, मगर इस बार की स्थिति में जान बचाना मुश्किल हो गया। दो दिन तक छत पर दिन-रात गुजारने पड़े। अब पानी घटने के बाद भी गांव की दुश्वारियां खत्म नहीं हुई हैं।


भोजन-पानी और चारे की व्यवस्था कर रहा प्रशासन
एसडीएम अवनीश त्रिपाठी ने बताया कि राजस्व विभाग की टीमें बाढ़ आने से पहले ही प्रभावित क्षेत्र में पहुंच गई थीं और अब भी लगातार काम कर रही हैं। बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए भोजन और पानी की व्यवस्था की गई है। दूषित पानी से बचाव के लिए बोतलबंद पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। मेडिकल टीम लगातार स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है। पशुओं के बहने और बिछड़ने की सूचनाएं मिली हैं। पानी कम होने के बाद नुकसान का आकलन कराया जाएगा। पशुओं के लिए भूसा आदि की व्यवस्था की गई है और जरूरत के अनुसार नाव से राशन, पानी और चारा पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अभी तक किसी जनहानि की सूचना नहीं है। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय पुलिस की टीमें भी सुरक्षा में लगी हैं।


धानी क्षेत्र में राप्ती नदी का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे
धानी बाजार। बीते सप्ताह हुई भारी बारिश के कारण धानी बाजार स्थित राप्ती नदी के बढ़ते जलस्तर से आसपास के गांवों के ग्रामीणों को बाढ़ का डर सता रहा था। रविवार को मौसम सामान्य होने पर राप्ती नदी का जलस्तर स्थिर होने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली है। नदी खतरे के निशान से नीचे बह रही है। धानी क्षेत्र के पूर्वी भाग में स्थित प्रसिद्ध बढोई ताल के किनारे के गांव, कमनहा नगवा, कानापार, सिकंदरा इत्यादि गांवों में बारिश के पानी का आंशिक असर है। धानी बाजार के पश्चिमी और उत्तरी भाग में राप्ती नदी के किनारे स्थित बेलसर-रिगौली बांध की स्थिति ठीक है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed