{"_id":"64f3877e6a3dbd36930d2f34","slug":"arto-office-no-offering-no-dl-maharajganj-news-c-206-1-sgkp1021-5045-2023-09-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"एआरटीओ दफ्तर : चढ़ावा नहीं तो डीएल नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एआरटीओ दफ्तर : चढ़ावा नहीं तो डीएल नहीं
विज्ञापन
एआरटीओ दफ्तर : चढ़ावा नहीं तो डीएल नहीं
फोटो
प्रत्येक आवेदन पर लिए जाते हैं 500 रुपये, रकम मिलते ही एक झटके में हो जाता काम, दलालों की सांठगांठ से हो जाता जटिल काम
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। चढ़ावा नहीं मिलने पर आवेदन का सत्यापन लटका दिया जाता है। चढ़ावा नहीं मिलता तो कोई टेस्ट राइड में तो कोई सत्यापन में फंसा रहता है। आवेदक भटकने को विवश रहते हैं। प्रत्येक आवेदन के सत्यापन पर 500 रुपये लिए जाने की बात कही जाती है। रकम मिलते ही एक झटके में काम हो जाता है। एआरटीओ कार्यालय में 1291 लाइसेंस लंबित हैं। इनका टेस्ट राइड नहीं हुआ है। दूसरी प्रति का लाइसेंस लेने के लिए 41 लोग कतार में हैं। छोटे काम के लिए लोगों को दलालों से संपर्क बनाना पड़ता है।
बीते दिनों एआरटीओ, पीटीओ समेत अन्य कर्मियों को भ्रष्टाचार में फंसने के बाद कार्यालय सुर्खियों में आ गया। यहां भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हैं कि उसे समझने में पसीना आ जाएगा। चढ़ावा का खेल यहां बेहद सफाई से हो रहा है। इसे देने वाला और दिलाने वाले बेहद करीब से जानते हैं। जिसे रकम मिलती है, वह ऐसी भाव भंगिमा में दिखेगा कि शक भी नहीं होगा, लेकिन हकीकत में बगैर रकम दिए कोई काम जल्दी होता नहीं है।
शनिवार को एआटीओ कार्यालय में काम के तरीकों को समझने की कोशिश की गई तो हकीकत सामने आ गई। दोपहर के करीब 12 बजे रहे थे। गेट से अंदर दो चार लोग प्रवेश किए। सभी आपस में यही बात कर रहे थे कि जो काम तुंरत होना चाहिए, उसे लटका दिया जाता है। राजेंद्र कुमार ने बताया कि 30 जून को ड्राइविंग लाइसेंस के आवेदन किया था। टेस्ट ड्राइव नहीं हो रहा है। कई बार कार्यालय में पूछने आया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसी तरह से रचना त्रिपाठी का आवेदन होने बाद भी टेस्ट ड्राइव नहीं हुआ है। इन आवेदकों ने बताया कि ऐसे तमाम लोग हैं, जिनका टेस्ट ड्राइव नहीं होने के कारण लाइसेंस नहीं बन पा रहा है।
विज्ञापन
ऑटो का पेपर के लेकर घूम रहा मुजूरी क्षेत्र का एक युवक मिला। उसे फिटनेस टेस्ट कराना था। सीधे कार्यालय गया तो उसे लौटा दिया गया। वह कार्यालय के सामने एक आनलाइन आवेदन करने वाले युवक के पास गया और पेपर के साथ तीन हजार रुपये दिए। आनलाइन आवेदन करने वाला युवक पेपर लेकर अंदर गया और कुछ ही देर में काम कराने के बाद पेपर दे दिया, इसके बाद युवक चला गया। पड़ताल के दौरान ऐसे तमाम पीड़ित मिले जो जरूरी काम के लिए परेशान दिखे। कार्यालय के सामने झोपड़ी में बैठे धीरेंद्र ने बताया कि भैया यहां काम कराना है तो रकम देनी ही पड़ेगी। भ्रष्टाचार में अधिकारी फंसे इसके बाद भी यहां बिन रकम दिए काम नहीं हो रहा है। रकम नहीं मिलने पर इतने नियम कानून बता दिए जाएंगे की काम हो नहीं पाएगा। सामने से आ रहे एक अधिवक्ता ने बताया कि हम सभी को रोज कार्यालय में काम रहता है, ऐसी समस्याएं होती रहती हैं।
ड्राइविंग लाइसेंस आनलाइन कराने के बाद पोर्टल पर सत्यापन होता है, नियम के अनुसार आवेदन होते ही तुरंत पास हो जाना चाहिए, लेकिन इसके लिए रकम की वसूली की बात सामने आ रही है। रविंद्र ने बताया कि छह अगस्त को ही आनलाइन हुआ, लेकिन अब तक सत्यापन नहीं हुआ है। रकम की मांग की जा रही है। एक व्यक्ति ने पांच रुपये की मांग की, नहीं दिया तो लटका हुआ है। कुछ दिन और नहीं होगा तो रकम देकर ही कराना पडेगा।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -
20 लर्निंग लाइसेंस लंबित
अगस्त 2023 तक 63677 आवेदन आए थे। 57820 लाइसेंस मिल गए। कमी होने पर 2993 निरस्त हो गए। 20 लंबित हैं। 2859 लाइसेंस प्रिंट होकर आवेदक के पास नहीं पहुंचे हैं। इसी तरह से हैवी लाइसेंस अगस्त तक 77872 आवेदन आए, इनमें 76386 लाइसेंस बनकर मिल गए। 165 निरस्त हुए हैं। 1291 आवेदन लंबित हैं। इनका टेस्ट राइड नहीं हुआ है।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- --
लाइसेंस की दूसरी प्रति लेने के लिए 41 आवेदकों को इंतजार
लाइसेंस की दूसरी प्रति लेने के लिए 41 आवेदकों का इंतजार करना पड़ रहा है। आवेदक प्रत्येक दिन कार्यालय में आते हैं तो उनको लौटा दिया जाता है।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- --
हर काम रेट फिक्स है, देने पर झटके में होता काम
टेस्ट राइड से लेकर सत्यापन कराने के लिए अलग अलग रेट फिक्स है। 500 से लेकर 700 रुपये वसूल किए जाते हैं। सूत्र बताते हैं कि टेस्ट राइड नहीं करने के लिए आवेदक को करीब 700 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। नहीं देने पर उनको फेल कर दिया जाता है, इसके बाद आवेदक इधर-उधर चक्कर लगाते हैं।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- --
आनलाइन सेंटर वालों का मजबूत नेटवर्क
काम कराने के लिए आनलाइन सेंटर से संपर्क करने पर कोई समस्या नहीं होती है। सूत्र की मानें तो यहीं पर काम कराने का पूरा दाम तय हो जाता है। आवदेक को पता ही नहीं चलता है कि कहां कौन से काम होगा। रकम देने के बाद पेपर सीधे मिल जाता है।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
टेस्ट राइड करा लिया है... आगे की प्रक्रिया शुरू कर दीजिए
शनिवार को एआरटीओ कार्यालय के एक कक्ष में बाबू जरूरी काम निपटा रहे थे। उनके पास एक युवक गया तो कहा कि भैया हमने टेस्ट राइड करा लिया है, कार्रवाई आगे बढ़ा दीजिए। बाबू ने सामने खड़े एक व्यक्ति को देखते हुए कहा कि भाई ऐसे नहीं होता है। अधिकारी अपनी निगरानी में टेस्ट कराते हैं। बाबू की बात को काटते हुए सामने वाले ने कहा कि पहले तो 500 देने पर काम हो गया था, अब क्यों परेशानी हो रही है। बाबू ने ज्यादा बात न करते हुए कहा कि ऐसे नहीं हो पाएगा। टेस्ट राइड पास होना जरूरी है। ट्रैक पर गाड़ी चलानी पड़ेगी।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- --
करीब दस दिन पहले काम कराने गया था तो 500 रुपये देने पड़े। जल्दी कराने के लिए हर काम का रेट तय है। नहीं देने पर समस्या होती है।
सुधांशु पांडेय, अधिवक्ता
-- -- -- -- -- -- -- -- -- --
हैरानी की बात है कि इतनी बड़ी कार्रवाई होने के बाद भी कुछ खास असर नहीं है। रकम उसी से लिया जाता है, जो हमेशा काम लेकर आता है। चार दिन पहले डीएल का आवेदन ऑनलाइन कराने के बाद सत्यापन कराने के लिए 500 रुपये देकर काम कराया था।
अभिषेक शुक्ला, अधिवक्ता
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
यहां अतिरिक्त प्रभार मिला है। नियम के अनुसार सारे काम कराए जा रहे हैं। रकम लेने की बात निराधार है। तय समय सीमा के अंदर ही सभी काम किए जा रहे हैं।
आरडी प्रसाद, संभागीय निरीक्षक
विज्ञापन
प्रत्येक आवेदन पर लिए जाते हैं 500 रुपये, रकम मिलते ही एक झटके में हो जाता काम, दलालों की सांठगांठ से हो जाता जटिल काम
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। चढ़ावा नहीं मिलने पर आवेदन का सत्यापन लटका दिया जाता है। चढ़ावा नहीं मिलता तो कोई टेस्ट राइड में तो कोई सत्यापन में फंसा रहता है। आवेदक भटकने को विवश रहते हैं। प्रत्येक आवेदन के सत्यापन पर 500 रुपये लिए जाने की बात कही जाती है। रकम मिलते ही एक झटके में काम हो जाता है। एआरटीओ कार्यालय में 1291 लाइसेंस लंबित हैं। इनका टेस्ट राइड नहीं हुआ है। दूसरी प्रति का लाइसेंस लेने के लिए 41 लोग कतार में हैं। छोटे काम के लिए लोगों को दलालों से संपर्क बनाना पड़ता है।
बीते दिनों एआरटीओ, पीटीओ समेत अन्य कर्मियों को भ्रष्टाचार में फंसने के बाद कार्यालय सुर्खियों में आ गया। यहां भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हैं कि उसे समझने में पसीना आ जाएगा। चढ़ावा का खेल यहां बेहद सफाई से हो रहा है। इसे देने वाला और दिलाने वाले बेहद करीब से जानते हैं। जिसे रकम मिलती है, वह ऐसी भाव भंगिमा में दिखेगा कि शक भी नहीं होगा, लेकिन हकीकत में बगैर रकम दिए कोई काम जल्दी होता नहीं है।
विज्ञापन
शनिवार को एआटीओ कार्यालय में काम के तरीकों को समझने की कोशिश की गई तो हकीकत सामने आ गई। दोपहर के करीब 12 बजे रहे थे। गेट से अंदर दो चार लोग प्रवेश किए। सभी आपस में यही बात कर रहे थे कि जो काम तुंरत होना चाहिए, उसे लटका दिया जाता है। राजेंद्र कुमार ने बताया कि 30 जून को ड्राइविंग लाइसेंस के आवेदन किया था। टेस्ट ड्राइव नहीं हो रहा है। कई बार कार्यालय में पूछने आया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसी तरह से रचना त्रिपाठी का आवेदन होने बाद भी टेस्ट ड्राइव नहीं हुआ है। इन आवेदकों ने बताया कि ऐसे तमाम लोग हैं, जिनका टेस्ट ड्राइव नहीं होने के कारण लाइसेंस नहीं बन पा रहा है।
विज्ञापन
ऑटो का पेपर के लेकर घूम रहा मुजूरी क्षेत्र का एक युवक मिला। उसे फिटनेस टेस्ट कराना था। सीधे कार्यालय गया तो उसे लौटा दिया गया। वह कार्यालय के सामने एक आनलाइन आवेदन करने वाले युवक के पास गया और पेपर के साथ तीन हजार रुपये दिए। आनलाइन आवेदन करने वाला युवक पेपर लेकर अंदर गया और कुछ ही देर में काम कराने के बाद पेपर दे दिया, इसके बाद युवक चला गया। पड़ताल के दौरान ऐसे तमाम पीड़ित मिले जो जरूरी काम के लिए परेशान दिखे। कार्यालय के सामने झोपड़ी में बैठे धीरेंद्र ने बताया कि भैया यहां काम कराना है तो रकम देनी ही पड़ेगी। भ्रष्टाचार में अधिकारी फंसे इसके बाद भी यहां बिन रकम दिए काम नहीं हो रहा है। रकम नहीं मिलने पर इतने नियम कानून बता दिए जाएंगे की काम हो नहीं पाएगा। सामने से आ रहे एक अधिवक्ता ने बताया कि हम सभी को रोज कार्यालय में काम रहता है, ऐसी समस्याएं होती रहती हैं।
ड्राइविंग लाइसेंस आनलाइन कराने के बाद पोर्टल पर सत्यापन होता है, नियम के अनुसार आवेदन होते ही तुरंत पास हो जाना चाहिए, लेकिन इसके लिए रकम की वसूली की बात सामने आ रही है। रविंद्र ने बताया कि छह अगस्त को ही आनलाइन हुआ, लेकिन अब तक सत्यापन नहीं हुआ है। रकम की मांग की जा रही है। एक व्यक्ति ने पांच रुपये की मांग की, नहीं दिया तो लटका हुआ है। कुछ दिन और नहीं होगा तो रकम देकर ही कराना पडेगा।
20 लर्निंग लाइसेंस लंबित
अगस्त 2023 तक 63677 आवेदन आए थे। 57820 लाइसेंस मिल गए। कमी होने पर 2993 निरस्त हो गए। 20 लंबित हैं। 2859 लाइसेंस प्रिंट होकर आवेदक के पास नहीं पहुंचे हैं। इसी तरह से हैवी लाइसेंस अगस्त तक 77872 आवेदन आए, इनमें 76386 लाइसेंस बनकर मिल गए। 165 निरस्त हुए हैं। 1291 आवेदन लंबित हैं। इनका टेस्ट राइड नहीं हुआ है।
लाइसेंस की दूसरी प्रति लेने के लिए 41 आवेदकों को इंतजार
लाइसेंस की दूसरी प्रति लेने के लिए 41 आवेदकों का इंतजार करना पड़ रहा है। आवेदक प्रत्येक दिन कार्यालय में आते हैं तो उनको लौटा दिया जाता है।
हर काम रेट फिक्स है, देने पर झटके में होता काम
टेस्ट राइड से लेकर सत्यापन कराने के लिए अलग अलग रेट फिक्स है। 500 से लेकर 700 रुपये वसूल किए जाते हैं। सूत्र बताते हैं कि टेस्ट राइड नहीं करने के लिए आवेदक को करीब 700 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। नहीं देने पर उनको फेल कर दिया जाता है, इसके बाद आवेदक इधर-उधर चक्कर लगाते हैं।
आनलाइन सेंटर वालों का मजबूत नेटवर्क
काम कराने के लिए आनलाइन सेंटर से संपर्क करने पर कोई समस्या नहीं होती है। सूत्र की मानें तो यहीं पर काम कराने का पूरा दाम तय हो जाता है। आवदेक को पता ही नहीं चलता है कि कहां कौन से काम होगा। रकम देने के बाद पेपर सीधे मिल जाता है।
टेस्ट राइड करा लिया है... आगे की प्रक्रिया शुरू कर दीजिए
शनिवार को एआरटीओ कार्यालय के एक कक्ष में बाबू जरूरी काम निपटा रहे थे। उनके पास एक युवक गया तो कहा कि भैया हमने टेस्ट राइड करा लिया है, कार्रवाई आगे बढ़ा दीजिए। बाबू ने सामने खड़े एक व्यक्ति को देखते हुए कहा कि भाई ऐसे नहीं होता है। अधिकारी अपनी निगरानी में टेस्ट कराते हैं। बाबू की बात को काटते हुए सामने वाले ने कहा कि पहले तो 500 देने पर काम हो गया था, अब क्यों परेशानी हो रही है। बाबू ने ज्यादा बात न करते हुए कहा कि ऐसे नहीं हो पाएगा। टेस्ट राइड पास होना जरूरी है। ट्रैक पर गाड़ी चलानी पड़ेगी।
करीब दस दिन पहले काम कराने गया था तो 500 रुपये देने पड़े। जल्दी कराने के लिए हर काम का रेट तय है। नहीं देने पर समस्या होती है।
सुधांशु पांडेय, अधिवक्ता
हैरानी की बात है कि इतनी बड़ी कार्रवाई होने के बाद भी कुछ खास असर नहीं है। रकम उसी से लिया जाता है, जो हमेशा काम लेकर आता है। चार दिन पहले डीएल का आवेदन ऑनलाइन कराने के बाद सत्यापन कराने के लिए 500 रुपये देकर काम कराया था।
अभिषेक शुक्ला, अधिवक्ता
यहां अतिरिक्त प्रभार मिला है। नियम के अनुसार सारे काम कराए जा रहे हैं। रकम लेने की बात निराधार है। तय समय सीमा के अंदर ही सभी काम किए जा रहे हैं।
आरडी प्रसाद, संभागीय निरीक्षक