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Maharajganj News: एक्यूआई बढ़ा...धूल, धुएं और स्मॉग से सांस लेना मुश्किल
Wed, 20 Nov 2024 02:35 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Wed, 20 Nov 2024 02:35 AM IST
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महराजगंज। बढ़ता प्रदूषण लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रहा है। इसमें बुजुर्गों और सांस के मरीजों के लिए यह बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। वर्तमान में एयर क्वालिटी इंडेक्स सोमवार को 160 तक पहुंच गया है। सर्दी बढ़ने के साथ ही वायु प्रदूषण का स्तर भी बढ़ने लगा है। जिले का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) लगातार बढ़ रहा है। सोमवार को ये 150 दर्ज किया गया।
धूल धूंए और सर्दी बढ़ने के साथ ही प्रदूषण के स्तर में और इजाफा होने का आशंका है। प्रदूषण का स्तर बढ़ने के कारण जिला अस्पताल और केएमसी मेडिकल कालेज में सांस के मरीज बढ़े हैं। प्रत्येक दिन 30 से 40 मरीज आ रहे हैं। सांस के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने से सबसे अधिक बुजुर्ग इसका शिकार हो रहे हैं। बढ़ते प्रदूषण के कारण सांस के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। अस्थमा में सांस नली या इससे जुड़े हिस्सों में सूजन आ जाती है। इसके चलते फेफड़ों में हवा जाने में रुकावट पैदा होती है। स्मॉग के साथ अनेक प्रकार के प्रदूषित तत्व मिले होते हैं। यह शरीर में जाकर सांस से संबंधित रोग के कारण बनते हैं। दूसरी ओर से निर्माण कार्यों से उड़ रही धूल व पराली भी समस्या की प्रमुख कारक है। सोनौली हाईवे पर निर्माण हो रहा है। धूल उड़ने के कारण लोगों की आंखों में जलन की समस्या बढ़ गई है। जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना करीब 30 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। डॉक्टर उनको दवा के साथ बचाव के उपाय भी बता रहे हैं। इधर ठंड का असर बढ़ने से यह समस्या हो रही है। मंगलवार को सुबह टहलने जा रहे नरेंद्र वर्मा ने बताया कि कभी कभी सांस लेने में समस्या होती है। आने वाले दिनों में ठंड का असर बढ़ेगा तो देर से टहलूंगा। पीजी कालेज खेल मैदान में 60 वर्षीय राम अधार मिश्रा कहने लगे की इतनी उम्र में भी कभी टहलना बंद नहीं किया। इधर दो चार से दिन से सुबह टहलने में थोड़ी समस्या हो रही है। डॉक्टर से परामर्श लेना पड़ेगा।्
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धूल धूंए और सर्दी बढ़ने के साथ ही प्रदूषण के स्तर में और इजाफा होने का आशंका है। प्रदूषण का स्तर बढ़ने के कारण जिला अस्पताल और केएमसी मेडिकल कालेज में सांस के मरीज बढ़े हैं। प्रत्येक दिन 30 से 40 मरीज आ रहे हैं। सांस के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने से सबसे अधिक बुजुर्ग इसका शिकार हो रहे हैं। बढ़ते प्रदूषण के कारण सांस के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। अस्थमा में सांस नली या इससे जुड़े हिस्सों में सूजन आ जाती है। इसके चलते फेफड़ों में हवा जाने में रुकावट पैदा होती है। स्मॉग के साथ अनेक प्रकार के प्रदूषित तत्व मिले होते हैं। यह शरीर में जाकर सांस से संबंधित रोग के कारण बनते हैं। दूसरी ओर से निर्माण कार्यों से उड़ रही धूल व पराली भी समस्या की प्रमुख कारक है। सोनौली हाईवे पर निर्माण हो रहा है। धूल उड़ने के कारण लोगों की आंखों में जलन की समस्या बढ़ गई है। जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना करीब 30 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। डॉक्टर उनको दवा के साथ बचाव के उपाय भी बता रहे हैं। इधर ठंड का असर बढ़ने से यह समस्या हो रही है। मंगलवार को सुबह टहलने जा रहे नरेंद्र वर्मा ने बताया कि कभी कभी सांस लेने में समस्या होती है। आने वाले दिनों में ठंड का असर बढ़ेगा तो देर से टहलूंगा। पीजी कालेज खेल मैदान में 60 वर्षीय राम अधार मिश्रा कहने लगे की इतनी उम्र में भी कभी टहलना बंद नहीं किया। इधर दो चार से दिन से सुबह टहलने में थोड़ी समस्या हो रही है। डॉक्टर से परामर्श लेना पड़ेगा।्
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