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Maharajganj News: रबी क्रॉप सर्वे में एआई फीचर सुनिश्चित करेगा पारदर्शिता
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8.34 लाख गाटों के सर्वे के लिए लगाए गए 700 कर्मचारी
फोटो सही होने पर ही एप करेगा स्वीकार या रद्द
महराजगंज। रबी डिजिटल क्रॉप सर्वे जनपद में शनिवार से प्रारंभ हो गया। जनपद के 8.34 लाख गाटों का सर्वे करने के लिए कुल 700 कर्मियों को लगाया गया है। इन कर्मियों का आखिरी प्रशिक्षण सोमवार को उप कृषि निदेशक संजीव कुमार पटेल की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। सभी सर्वे कर्मियों के मोबाइल फोन में डिजिटल क्राप सर्वे एप अपलोड कराकर उन्हें तकनीकी जानकारी दी जा चुकी है।
क्राप सर्वे में पारदर्शिता लाने के लिए इस बार कृषि महकमे ने एआई का उपयोग किया है। एप के नए फीचर के कारण पहले से खींची गई फोटो से फोटो बनाकर अपलोड नहीं किया जा सकेगा। मोबाइल पर लॉगिन करने से पहले, सर्वेयर के चेहरे की पहचान एप से की जाएगी। इससे सुनिश्चित होगा कि सर्वेयर मौके पर मौजूद है और स्वयं सर्वे कर रहा है। सर्वे की प्रक्रिया खेत से अधिकतम 20 मीटर की दूरी तक ही पूरी की जा सकेगी।
वर्जन
सर्वे में पहले से खींची गई फोटो से फोटो बनाकर अपलोड करने का प्रयास अगर होता है तो एप इसे निरस्त कर देगा। सर्वे में जोड़ी गई नई सुविधा के तहत उन खेतों का भी विवरण अपलोड किया जाएगा जहां फसल कट चुकी है। यह सुविधा पिछले सर्वे के ऑनलाइन प्रारूप में उपलब्ध नहीं थी। प्रत्येक सर्वेयर अधिकतम तीन हजार गाटों का सर्वे कर सकेगा।
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-संजीव कुमार पटेल, उप कृषि निदेशक।
पारदर्शिता के लिए एप पर सर्वेयरों को दो बार लॉगिन करना होगा। पहली बार, गाटे के सर्वे के दौरान उन्हें आधार और ईमेल आईडी का प्रमाणीकरण कराना होगा। इसके बाद, 20 से 30 गाटों के सर्वे के बाद, उन्हें दोबारा आईडी प्रमाणीकरण से गुजरना होगा। यह प्रक्रिया सर्वेयरों की पहचान सुनिश्चित करने और डेटा की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
-शैलेंद्र प्रताप सिंह, जिला कृषि अधिकारी।
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फोटो सही होने पर ही एप करेगा स्वीकार या रद्द
महराजगंज। रबी डिजिटल क्रॉप सर्वे जनपद में शनिवार से प्रारंभ हो गया। जनपद के 8.34 लाख गाटों का सर्वे करने के लिए कुल 700 कर्मियों को लगाया गया है। इन कर्मियों का आखिरी प्रशिक्षण सोमवार को उप कृषि निदेशक संजीव कुमार पटेल की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। सभी सर्वे कर्मियों के मोबाइल फोन में डिजिटल क्राप सर्वे एप अपलोड कराकर उन्हें तकनीकी जानकारी दी जा चुकी है।
क्राप सर्वे में पारदर्शिता लाने के लिए इस बार कृषि महकमे ने एआई का उपयोग किया है। एप के नए फीचर के कारण पहले से खींची गई फोटो से फोटो बनाकर अपलोड नहीं किया जा सकेगा। मोबाइल पर लॉगिन करने से पहले, सर्वेयर के चेहरे की पहचान एप से की जाएगी। इससे सुनिश्चित होगा कि सर्वेयर मौके पर मौजूद है और स्वयं सर्वे कर रहा है। सर्वे की प्रक्रिया खेत से अधिकतम 20 मीटर की दूरी तक ही पूरी की जा सकेगी।
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सर्वे में पहले से खींची गई फोटो से फोटो बनाकर अपलोड करने का प्रयास अगर होता है तो एप इसे निरस्त कर देगा। सर्वे में जोड़ी गई नई सुविधा के तहत उन खेतों का भी विवरण अपलोड किया जाएगा जहां फसल कट चुकी है। यह सुविधा पिछले सर्वे के ऑनलाइन प्रारूप में उपलब्ध नहीं थी। प्रत्येक सर्वेयर अधिकतम तीन हजार गाटों का सर्वे कर सकेगा।
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-संजीव कुमार पटेल, उप कृषि निदेशक।
पारदर्शिता के लिए एप पर सर्वेयरों को दो बार लॉगिन करना होगा। पहली बार, गाटे के सर्वे के दौरान उन्हें आधार और ईमेल आईडी का प्रमाणीकरण कराना होगा। इसके बाद, 20 से 30 गाटों के सर्वे के बाद, उन्हें दोबारा आईडी प्रमाणीकरण से गुजरना होगा। यह प्रक्रिया सर्वेयरों की पहचान सुनिश्चित करने और डेटा की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
-शैलेंद्र प्रताप सिंह, जिला कृषि अधिकारी।