{"_id":"69f123172410cafb390e925e","slug":"ai-based-gps-survey-of-sugarcane-fields-to-begin-from-may-1-maharajganj-news-c-206-1-go11002-176242-2026-04-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Maharajganj News: एक मई से होगा गन्ना खेतों का एआई आधारित जीपीएस सर्वे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Maharajganj News: एक मई से होगा गन्ना खेतों का एआई आधारित जीपीएस सर्वे
विज्ञापन
एक मई से डिजिटल जीपीएस आधारित गन्ना सर्वे
19 हजार हेक्टेयर से 22 हजार हेक्टेयर रहा पहुंचने की उम्मीद
महराजगंज। जनपद में पहली बार एआई तकनीक के माध्यम से गन्ना खेतों का जीपीएस सर्वे किया जाएगा। प्रदेश सरकार ने पहली बार एआई व जीपीएस आधारित केन सर्वे नीति को मंजूरी दी है। एक मई से गन्ना सर्वे विभाग शुरू करने जा रहा है। इस सर्वे का पूरा ब्यौरा 24 घंटे के अंदर किसानों के मोबाइल पर उपलब्ध हो जाएगा।
साथ ही सर्वे को इतना कारगर बनाया गया है कि रकबे के अनुरूप किसान को उपज बिक्री के लिए कितने पर्चियों की जरूरत होगी और इसे स्थानीय मिल किस तारीख में उपलब्ध कराएगी इसका विवरण भी सर्वे के दौरान किसानों को उपलब्ध करा दिया जाएगा। नई नीति के लागू होने से विभाग को उम्मीद है कि पिछले सीजन में 19 हजार हेक्टेयर से इस बार का रकबा 22 हजार हेक्टेयर से ऊपर पहुंचेगा। साथ ही किसानों का मुनाफा भी बढ़ेगा।
जनपद में गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग गन्ना फसल का एआई प्लस जीपीएस सर्वेक्षण प्रारंभ करने जा रहा है। 1 मई से शुरू होकर 30 जून 2026 तक यह सर्वे किया जाएगा। जिले से लगाई जा रही गन्ना सर्वेक्षण टीम में एक राजकीय गन्ना पर्यवेक्षक और एक चीनी मिल कर्मचारी भी शामिल होंगे। डिजिटल एआई आधारित सर्वेक्षण से पहले विभाग ने कर्मचारियों को प्रशिक्षित भी किया है। प्रशिक्षण प्रबंध गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग आयुक्त के स्तर से पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ना सर्वेक्षण नीति जारी करने के बाद की गई। 33 कर्मचारियों को तीन चरण का प्रशिक्षण दिया गया है। गन्ना किसानों के सर्वेक्षित भूमि का सत्यापन राजस्व विभाग से करने के बाद वेबसाइट यूपी भूलेख पर सर्वेक्षण के अंतिम आंकड़े ऑनलाइन दिखने लगेंगे।
विज्ञापन
नए किसानों का पंजीकरण भी किया जाएगा
जिला गन्ना अधिकारी ने बताया कि गन्ना सर्वेक्षण के दौरान नए सदस्यों (किसान) का पंजीकरण भी किया जाएगा। सर्वे में पंजीकृत कृषक ही चीनी मिलों को गन्ना आपूर्ति करेंगे। सर्वे रकबे के अनुसार, संभावित उत्पादन का आकलन भी तय होगा और यह भी पता चल जाएगा कि इसके लिए कितनी पर्चियों को जारी करना है और उक्त पर्ची कौन सी मिल कब उपलब्धता कराएगी। इसका फायदा यह होगा कि किसान तय समय के मुताबिक गन्ने की कटाई करा सकेंगे और तय समय पर गन्ना चीनी मिलों को पहुंच जाएगा। पहले गन्ने की कटाई चीनी मिल की तरफ से जारी होने वाली खरीद पर्ची व गन्ना आपूर्ति में तालमेल नहीं बैठने के कारण किसानों को परेशानी झेलनी पड़ती थी जो अब नहीं होगी।
वर्जन
कृषि में मशीनीकरण का प्रावधान पहले से है। इस बार डिजिटल व एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की मदद से गन्ना सर्वे होने जा रहा है। इसका फायदा यह होगा कि समय पर कटाई से लेकर बिक्री तक का समय निर्धारित रहेगा। इससे अतिरिक्त खर्च बचेगा और किसानों का मुनाफा बढ़ेगा।
-ओमप्रकाश सिंह यादव, जिला गन्ना अधिकारी
विज्ञापन
19 हजार हेक्टेयर से 22 हजार हेक्टेयर रहा पहुंचने की उम्मीद
महराजगंज। जनपद में पहली बार एआई तकनीक के माध्यम से गन्ना खेतों का जीपीएस सर्वे किया जाएगा। प्रदेश सरकार ने पहली बार एआई व जीपीएस आधारित केन सर्वे नीति को मंजूरी दी है। एक मई से गन्ना सर्वे विभाग शुरू करने जा रहा है। इस सर्वे का पूरा ब्यौरा 24 घंटे के अंदर किसानों के मोबाइल पर उपलब्ध हो जाएगा।
साथ ही सर्वे को इतना कारगर बनाया गया है कि रकबे के अनुरूप किसान को उपज बिक्री के लिए कितने पर्चियों की जरूरत होगी और इसे स्थानीय मिल किस तारीख में उपलब्ध कराएगी इसका विवरण भी सर्वे के दौरान किसानों को उपलब्ध करा दिया जाएगा। नई नीति के लागू होने से विभाग को उम्मीद है कि पिछले सीजन में 19 हजार हेक्टेयर से इस बार का रकबा 22 हजार हेक्टेयर से ऊपर पहुंचेगा। साथ ही किसानों का मुनाफा भी बढ़ेगा।
विज्ञापन
जनपद में गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग गन्ना फसल का एआई प्लस जीपीएस सर्वेक्षण प्रारंभ करने जा रहा है। 1 मई से शुरू होकर 30 जून 2026 तक यह सर्वे किया जाएगा। जिले से लगाई जा रही गन्ना सर्वेक्षण टीम में एक राजकीय गन्ना पर्यवेक्षक और एक चीनी मिल कर्मचारी भी शामिल होंगे। डिजिटल एआई आधारित सर्वेक्षण से पहले विभाग ने कर्मचारियों को प्रशिक्षित भी किया है। प्रशिक्षण प्रबंध गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग आयुक्त के स्तर से पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ना सर्वेक्षण नीति जारी करने के बाद की गई। 33 कर्मचारियों को तीन चरण का प्रशिक्षण दिया गया है। गन्ना किसानों के सर्वेक्षित भूमि का सत्यापन राजस्व विभाग से करने के बाद वेबसाइट यूपी भूलेख पर सर्वेक्षण के अंतिम आंकड़े ऑनलाइन दिखने लगेंगे।
विज्ञापन
नए किसानों का पंजीकरण भी किया जाएगा
जिला गन्ना अधिकारी ने बताया कि गन्ना सर्वेक्षण के दौरान नए सदस्यों (किसान) का पंजीकरण भी किया जाएगा। सर्वे में पंजीकृत कृषक ही चीनी मिलों को गन्ना आपूर्ति करेंगे। सर्वे रकबे के अनुसार, संभावित उत्पादन का आकलन भी तय होगा और यह भी पता चल जाएगा कि इसके लिए कितनी पर्चियों को जारी करना है और उक्त पर्ची कौन सी मिल कब उपलब्धता कराएगी। इसका फायदा यह होगा कि किसान तय समय के मुताबिक गन्ने की कटाई करा सकेंगे और तय समय पर गन्ना चीनी मिलों को पहुंच जाएगा। पहले गन्ने की कटाई चीनी मिल की तरफ से जारी होने वाली खरीद पर्ची व गन्ना आपूर्ति में तालमेल नहीं बैठने के कारण किसानों को परेशानी झेलनी पड़ती थी जो अब नहीं होगी।
वर्जन
कृषि में मशीनीकरण का प्रावधान पहले से है। इस बार डिजिटल व एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की मदद से गन्ना सर्वे होने जा रहा है। इसका फायदा यह होगा कि समय पर कटाई से लेकर बिक्री तक का समय निर्धारित रहेगा। इससे अतिरिक्त खर्च बचेगा और किसानों का मुनाफा बढ़ेगा।
-ओमप्रकाश सिंह यादव, जिला गन्ना अधिकारी