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Maharajganj News: ईद का चांद दिखने के बाद अकीदतमंद लौटते हैं घर
Tue, 25 Mar 2025 01:11 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Tue, 25 Mar 2025 01:11 AM IST
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मिठौरा। माहे रमजान का दूसरा अशरा यानी, मगफिरत खत्म हो गया है। शनिवार से तीसरा अशरा जहन्नम से आजादी का शुरू हो गया। इस अशरे में अकीदतमंद एतकाफ (किसी निश्चित समय के लिए मस्जिद में रहकर इबादत करना और सांसारिक मामलों से लेना देना नहीं होता है) करते हैं। एतकाफ में बैठे लोग ईद के चांद का दीदार होने के बाद ही घर लौटते हैं।
जामिया रिजविया नुरुल उलूम महराजगंज के मौलाना अमजद के अनुसार, एतकाफ के लिए मुसलमानों को रमजान के आखिर के 10 दिन मस्जिद के किसी एक स्थान में बैठकर इबादत करना चाहिए। खुद को परिवार और दुनिया से अलग कर लेना चाहिए। वहीं, महिलाएं घर के किसी कमरे में जहां नमाज पढ़ती हैं, एतकाफ में बैठ सकती हैं।
इतकाफ में बैठने वाले अकीदतमंद को चाहिए वह दुनिया की फिजूल (फालतू) बातों से परहेज करें। दरूद शरीफ पढ़े, कुरान शरीफ की तिलावत करें, पांच वक्त की नमाज कसरत से पढ़े। अपने लिए, मोहल्ले, गांव और दुनिया के मुसलमानों के लिए दुआएं खैर करें। इतकाफ में बैठने वाला अल्लाह का खास मेहमान होता है। बंदे को चाहिए मस्जिद में बैठकर अल्लाह को राजी करें। इतकाफ में बैठने वाले व्यक्ति को दो हज और दो उमरा करने का पुण्य मिलता है।
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जामिया रिजविया नुरुल उलूम महराजगंज के मौलाना अमजद के अनुसार, एतकाफ के लिए मुसलमानों को रमजान के आखिर के 10 दिन मस्जिद के किसी एक स्थान में बैठकर इबादत करना चाहिए। खुद को परिवार और दुनिया से अलग कर लेना चाहिए। वहीं, महिलाएं घर के किसी कमरे में जहां नमाज पढ़ती हैं, एतकाफ में बैठ सकती हैं।
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इतकाफ में बैठने वाले अकीदतमंद को चाहिए वह दुनिया की फिजूल (फालतू) बातों से परहेज करें। दरूद शरीफ पढ़े, कुरान शरीफ की तिलावत करें, पांच वक्त की नमाज कसरत से पढ़े। अपने लिए, मोहल्ले, गांव और दुनिया के मुसलमानों के लिए दुआएं खैर करें। इतकाफ में बैठने वाला अल्लाह का खास मेहमान होता है। बंदे को चाहिए मस्जिद में बैठकर अल्लाह को राजी करें। इतकाफ में बैठने वाले व्यक्ति को दो हज और दो उमरा करने का पुण्य मिलता है।
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