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Maharajganj News: लंबे समय बाद चंदन नदी के तट पर दिखा विलुप्त गिद्धों का झुंड
Sat, 29 Mar 2025 12:46 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Sat, 29 Mar 2025 12:46 AM IST
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ठूठठीबारी निचलौल मुख्य मार्ग पर बने चंदन नदी पुल के पूरब मृत जानवर खाने के लिए सैकड़ों की संख्य
ठूठीबारी। लंबे समय के बाद चंदन नदी पुल के पास विलुप्त हो रहे गिद्धों का झुंड दिखा। उन्हें देखने के लिए लोगों की भीड़ जुट गई। एक साथ सैकड़ों गिद्ध देखकर ग्रामीण उत्साहित हो उठे। वहीं वन विभाग इसे अच्छा संकेत मान रहा है।
शुक्रवार की सुबह करीब 10 बजे ठूठीबारी-निचलौल मुख्य मार्ग पर बने चंदन नदी पुल के पूरब मृत जानवर को खाने के लिए सैकड़ों गिद्धों का एक झुंड आसमान में मंडराते हुए नीचे उतरता देख राहगीरों की भीड़ जुट गई।
गिद्धों के क्षेत्र में विचरण करने से आसपास के लोगों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। राहगीर रामराज साहनी, कन्हैया चौधरी, धर्मेंद्र जायसवाल, रामचंदर साहनी, विश्वभर पाठक, घनश्याम पांडेय, सुरेश गुप्ता, अतिउल्लाह, सोमन भारती, बैजनाथ यादव आदि ने बताया की चंदन नदी का यह क्षेत्र पहले गिद्धों का ठिकाना माना जाता था।
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कुछ समय से यहां यह पक्षी दिखाई देने बंद हो गए थे। पक्षी प्रेमी इन विलुप्त होते पक्षियों के दीदार के लिए खुद को नहीं रोक सके। वहीं स्थानीय लोगों ने गिद्धों की फोटो और वीडियो अपने मोबाइल में कैद करते दिखे। क्षेत्र के बुद्धिजीवियों का मानना है कि यदि इस क्षेत्र में गिद्धों की संख्या में बढ़ोतरी जारी रही तो यह पारिस्थितिक संतुलन के लिए एक शुभ संकेत होगा।
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शुक्रवार की सुबह करीब 10 बजे ठूठीबारी-निचलौल मुख्य मार्ग पर बने चंदन नदी पुल के पूरब मृत जानवर को खाने के लिए सैकड़ों गिद्धों का एक झुंड आसमान में मंडराते हुए नीचे उतरता देख राहगीरों की भीड़ जुट गई।
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गिद्धों के क्षेत्र में विचरण करने से आसपास के लोगों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। राहगीर रामराज साहनी, कन्हैया चौधरी, धर्मेंद्र जायसवाल, रामचंदर साहनी, विश्वभर पाठक, घनश्याम पांडेय, सुरेश गुप्ता, अतिउल्लाह, सोमन भारती, बैजनाथ यादव आदि ने बताया की चंदन नदी का यह क्षेत्र पहले गिद्धों का ठिकाना माना जाता था।
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कुछ समय से यहां यह पक्षी दिखाई देने बंद हो गए थे। पक्षी प्रेमी इन विलुप्त होते पक्षियों के दीदार के लिए खुद को नहीं रोक सके। वहीं स्थानीय लोगों ने गिद्धों की फोटो और वीडियो अपने मोबाइल में कैद करते दिखे। क्षेत्र के बुद्धिजीवियों का मानना है कि यदि इस क्षेत्र में गिद्धों की संख्या में बढ़ोतरी जारी रही तो यह पारिस्थितिक संतुलन के लिए एक शुभ संकेत होगा।