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Maharajganj News: अधिवक्ताओं ने डीएम को सौंपा ज्ञापन, मेडिको लीगल व्यवस्था पर उठाए सवाल
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जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल को सौंपा शिकायती पत्र
महराजगंज। अधिवक्ताओं ने सरकारी अस्पतालों में पुलिस संस्तुति के अभाव में मेडिको-लीगल परीक्षण नहीं किए जाने को लेकर कलक्ट्रेट में डीएम को शिकायती पत्र सौंपा है। सिविल कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष धीरेंद्र मिश्रा और महामंत्री प्रमोद त्रिपाठी के नेतृत्व में अधिवक्ता कलेक्ट्रेट पहुंचे थे।
महामंत्री प्रमोद त्रिपाठी और अध्यक्ष धीरेंद्र मिश्रा ने आरोप लगाया कि मारपीट, सड़क दुर्घटना, घरेलू हिंसा, महिला उत्पीड़न और अन्य आपराधिक घटनाओं में घायल व्यक्ति जब सरकारी अस्पताल पहुंचते हैं और मेडिको-लीगल परीक्षण कराने का अनुरोध करते हैं तो कई मामलों में अस्पताल प्रशासन पुलिस संस्तुति का हवाला देकर परीक्षण करने से इंकार कर देता है। इससे पीड़ितों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ता है और समय पर एमएलसी नहीं हो पाता।
उन्होंने कहा कि मेडिको-लीगल परीक्षण में देरी होने से चोटों और अन्य महत्वपूर्ण चिकित्सीय साक्ष्यों के प्रभावित या नष्ट होने की आशंका रहती है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। अधिवक्ताओं का कहना है कि यह स्थिति पीड़ितों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया को कमजोर करती है। ज्ञापन देने के दौरान वशिष्ठ मिश्रा, अभिजीत सिंह, राजेश पांडेय और आलोक त्रिपाठी सहित अन्य अधिवक्ता भी मौजूद रहे।
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महराजगंज। अधिवक्ताओं ने सरकारी अस्पतालों में पुलिस संस्तुति के अभाव में मेडिको-लीगल परीक्षण नहीं किए जाने को लेकर कलक्ट्रेट में डीएम को शिकायती पत्र सौंपा है। सिविल कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष धीरेंद्र मिश्रा और महामंत्री प्रमोद त्रिपाठी के नेतृत्व में अधिवक्ता कलेक्ट्रेट पहुंचे थे।
महामंत्री प्रमोद त्रिपाठी और अध्यक्ष धीरेंद्र मिश्रा ने आरोप लगाया कि मारपीट, सड़क दुर्घटना, घरेलू हिंसा, महिला उत्पीड़न और अन्य आपराधिक घटनाओं में घायल व्यक्ति जब सरकारी अस्पताल पहुंचते हैं और मेडिको-लीगल परीक्षण कराने का अनुरोध करते हैं तो कई मामलों में अस्पताल प्रशासन पुलिस संस्तुति का हवाला देकर परीक्षण करने से इंकार कर देता है। इससे पीड़ितों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ता है और समय पर एमएलसी नहीं हो पाता।
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उन्होंने कहा कि मेडिको-लीगल परीक्षण में देरी होने से चोटों और अन्य महत्वपूर्ण चिकित्सीय साक्ष्यों के प्रभावित या नष्ट होने की आशंका रहती है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। अधिवक्ताओं का कहना है कि यह स्थिति पीड़ितों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया को कमजोर करती है। ज्ञापन देने के दौरान वशिष्ठ मिश्रा, अभिजीत सिंह, राजेश पांडेय और आलोक त्रिपाठी सहित अन्य अधिवक्ता भी मौजूद रहे।
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