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Maharajganj News: गोरखपुर से मिलावटी खोआ पहुंच रहा महराजगंज.. धंधेबाजों की चांदी

Mon, 13 Oct 2025 01:42 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज Updated Mon, 13 Oct 2025 01:42 AM IST
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Adulterated khoya is reaching Maharajganj from Gorakhpur.. businessmen are making money.
नगर में दुकान पर खोआ जलाते कर्मी।संवाद - फोटो : samvad
महराजगंज। गोरखपुर से मिलावटी खोआ महराजगंज पहुंच रहा है। धंधेबाज मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। दिवाली को देखते हुए मिलावट का खेल तेज कर दिया गया है। दूध से बनी मिठाई में मिलावट का खेल अधिक हो रहा है। गोरखपुर शहर में सख्ती को देखते हुए धंधेबाज मिलावटी खोआ महराजगंज जिले में खपाने में जुटे हैं। सस्ते में मिलने के कारण कारोबारी मंगा ले रहे हैं।
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शहर में एक दुकान पर मिठाई बनाने वाले कारीगर मूरत प्रसाद का कहना है कि मिठाई बनाने के लिए शुद्ध खोआ और शुद्ध छेना मिलना बहुत मुश्किल है। ऐसा इसलिए कि अच्छी गुणवत्ता के एक लीटर दूध को जलाने पर उससे अधिकतम 180 से 200 ग्राम तक खोआ मिलता है। वहीं अगर इससे छेना निकाला जाए तो उसकी मात्रा खोआ से भी 30 ग्राम कम होगी।
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इस तरह देखें तो एक किलोग्राम खोआ के लिए पांच लीटर शुद्ध दूध चाहिए। 50 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से 250 रुपये का दूध लगेगा। पूरा खर्च 350 रुपये प्रति किलो आता है। इससे बनी मिठाई भी महंगी होगी। खोआ का सबसे अधिक प्रयोग गुलाब जामुन बनाने में होता है। दुकानों पर गुलाब जामुन 260 रुपये किलो से लेकर 450 रुपये प्रतिकिलो के भाव है।
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सूत्रों की मानें तो मिलावटी खोआ शहर से लेकर गांव के बाजारों तक पहुंच चुका है। धंधेबाजों ने अपना पूरा नेटवर्क इसमें लगा दिया है। मिलावट के इस खेल में सेहत बिगड़ने की आशंका रहती है। शहर में सुरक्षित ठिकानों पर बाहर से खोआ मंगाकर डंप किया जा रहा है। दीपावली में मिठाइयों की मांग अधिक रहती है। इस वजह से धंधेबाज इसका फायदा उठाते हैं।
सूत्रों की माने तो सस्ते चावल का आटा मिलाकर खोआ बनाया जाता है। यह चावल आठ से 20 रुपये किलो मिल जाते हैं। खोआ में शकरकंदी भी मिलावट की जा रही है। इसके साथ ही मिल्क पाउडर से खोआ भी खूब बनाया जा रहा है।
चिकनाई न होने की कमी को दूर करने के लिए पाम ऑयल मिलाते हैं। इसके साथ ही मिलावटखोर आधा सिंथेटिक दूध और पाउडर दूध मिक्स करके नकली खोआ तैयार होता है।बृजमनगंज, सिसवा, परतावल, पनियरा, घुघली, ठूठीबारी, निचलौल, नौतनवा, फरेंदा में मिलावटी खोआ डंप होने की बात कही जा रही है।
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ऐसे करें नकली व असली खोआ की पहचान

-असली खोआ हल्के गेहुंआ रंग का होता है, जबकि मिलावटी खोआ अपेक्षाकृत सफेद होता है।

-असली खोआ को हथेली पर रखकर रगड़ने पर उससे शुद्ध देसी घी की सुगंध आएगी, मिलावटी में ऐसा नहीं होगा।

-असली खोआ हल्का रवादार (दानेदार) होगा, जबकि मिलावटी खोआ चिकना होता है।

-मिलावटी खोआ स्वाद में फीका होता है, जिससे मिठाई बनाने पर उसमें चीनी का पाउडर मिलना पड़ता है।
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चमकदार मिठाई बनाने के लिए सोडियम हाइड्रो सल्फेट मिला रहे

महराजगंज। दीवाली पर मिठाई की मांग बढ़ जाती है। इसे ध्यान में रखते हुए धंधेबाजों ने कम लागत में अधिक मुनाफा कमाने की पूरी तैयारी कर ली है। वहीं दूसरी ओर से अच्छे कारोबारी परेशान हैं। उनका कहना है कि चंद लोगों की वजह से परेशानी सबको होती है। दुकानों पर शुद्ध खाद्य सामाग्री ही बिक्री करनी चाहिए।

सूत्रों की माने तो धंधेबाज चमकदार मिठाई बनाने के लिए सोडियम हाइड्रो सल्फेट मिला रहे हैं। केसर के रंग का प्रयोग कर ऐसी मिठाई को तैयार कर धंधेबाज मोटी रकम कमाने में लगे हैं। सामान्य ग्राहक के समझ में नहीं आता है। दुकानों के काउंटर में बेहतर ढंग से सजा कर मिठाई रखी जाती है। इसे देखकर मौके पर असलियत समझना हर किसी के बस की बात नहीं है। मिलावटी मेवे से बनी मिठाई खाने से सेहत खराब हो सकती है।


केएमसी मेडिकल काॅलेज के डॉ. डीके कुशवाहा ने बताया कि मिलावटी खाद्य सामाग्री सेहत के लिए ठीक नहीं है। खासकर त्योहारों में मोटी रकम कमाने के लिए यह सब कुछ किया जाता है। सबसे हैरानी की बात जिस मिठाई को लोग केसर युक्त समझकर खा रहे हैं, असल में वह रंगों से युक्त मिठाई होती है। संवाद
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टीम लगातार क्षेत्र में भ्रमण कर रही है। निरीक्षण के दौरान नमूने एकत्र कर जांच के लिए भेजे जाते हैं। त्योहार को देखते हुए निगरानी तेज कर दी गई है।
-डॉ. टीआर रावत, सहायक आयुक्त, खाद्य सुरक्षा द्वितीय
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