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Maharajganj News: सीएचसी व पीएचसी पर प्रतिदिन बनेंगी आभा आईडी
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महराजगंज। जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) पर अब ओपीडी के दौरान प्रतिदिन 15 से 20 आभा आईडी बनाई जाएंगी। स्वास्थ्य विभाग ने मरीजों की डिजिटल पहचान सुनिश्चित करने और उन्हें राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन से जोड़ने के उद्देश्य से यह लक्ष्य तय किया है।
अधिकारियों का मानना है कि इस पहल से जिले में डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को नई गति मिलेगी और मरीजों को इलाज में सहूलियत होगी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी के निर्देश पर सभी अधीक्षक एवं प्रभारी चिकित्साधिकारियों को ओपीडी में आने वाले प्रत्येक पात्र मरीज की आभा आईडी बनाने के लिए विशेष अभियान चलाने को कहा गया है। इसके तहत पंजीकरण काउंटर पर तैनात कर्मचारियों को आवश्यक प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि आईडी बनाने की प्रक्रिया सरल और त्वरित ढंग से पूरी की जा सके।
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि आभा आईडी बनवाने के लिए किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा। जिले में वर्तमान में 17 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 40 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और एक अर्बन पीएचसी संचालित हैं। इन सभी केंद्रों पर प्रतिदिन निर्धारित लक्ष्य के अनुसार आईडी बनाई जाएगी। यदि प्रत्येक केंद्र पर औसतन 15 से 20 आईडी प्रतिदिन बनती हैं, तो महीने भर में बड़ी संख्या में लोग डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म से जुड़ जाएंगे। इससे स्वास्थ्य सेवाओं का रिकॉर्ड व्यवस्थित और केंद्रीकृत रूप से उपलब्ध रहेगा।
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आभा आईडी बनने के बाद मरीज का पूरा स्वास्थ्य रिकॉर्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित रहेगा। इसमें पूर्व में कराई गई जांच, डॉक्टर द्वारा दी गई दवाएं, चिकित्सकीय परामर्श और अन्य मेडिकल इतिहास शामिल रहेगा। भविष्य में जब भी मरीज किसी सरकारी या सूचीबद्ध निजी अस्पताल में इलाज के लिए जाएगा, तो डॉक्टर को उसकी पूरी स्वास्थ्य जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर मिल सकेगी।
डिप्टी सीएमओ डॉ.राजेश द्विवेदी का कहना है कि डिजिटल रिकॉर्ड होने से आपातकालीन स्थितियों में भी मरीज को त्वरित उपचार देने में सुविधा होगी। कई बार मरीज पुराने पर्चे या रिपोर्ट साथ नहीं ला पाते, जिससे इलाज में विलंब होता है। आभा आईडी के माध्यम से यह समस्या काफी हद तक दूर हो सकेगी। इससे स्वास्थ्य सेवाएं अधिक पारदर्शी और जवाबदेह भी बनेंगी।
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अधिकारियों का मानना है कि इस पहल से जिले में डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को नई गति मिलेगी और मरीजों को इलाज में सहूलियत होगी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी के निर्देश पर सभी अधीक्षक एवं प्रभारी चिकित्साधिकारियों को ओपीडी में आने वाले प्रत्येक पात्र मरीज की आभा आईडी बनाने के लिए विशेष अभियान चलाने को कहा गया है। इसके तहत पंजीकरण काउंटर पर तैनात कर्मचारियों को आवश्यक प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि आईडी बनाने की प्रक्रिया सरल और त्वरित ढंग से पूरी की जा सके।
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विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि आभा आईडी बनवाने के लिए किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा। जिले में वर्तमान में 17 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 40 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और एक अर्बन पीएचसी संचालित हैं। इन सभी केंद्रों पर प्रतिदिन निर्धारित लक्ष्य के अनुसार आईडी बनाई जाएगी। यदि प्रत्येक केंद्र पर औसतन 15 से 20 आईडी प्रतिदिन बनती हैं, तो महीने भर में बड़ी संख्या में लोग डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म से जुड़ जाएंगे। इससे स्वास्थ्य सेवाओं का रिकॉर्ड व्यवस्थित और केंद्रीकृत रूप से उपलब्ध रहेगा।
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आभा आईडी बनने के बाद मरीज का पूरा स्वास्थ्य रिकॉर्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित रहेगा। इसमें पूर्व में कराई गई जांच, डॉक्टर द्वारा दी गई दवाएं, चिकित्सकीय परामर्श और अन्य मेडिकल इतिहास शामिल रहेगा। भविष्य में जब भी मरीज किसी सरकारी या सूचीबद्ध निजी अस्पताल में इलाज के लिए जाएगा, तो डॉक्टर को उसकी पूरी स्वास्थ्य जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर मिल सकेगी।
डिप्टी सीएमओ डॉ.राजेश द्विवेदी का कहना है कि डिजिटल रिकॉर्ड होने से आपातकालीन स्थितियों में भी मरीज को त्वरित उपचार देने में सुविधा होगी। कई बार मरीज पुराने पर्चे या रिपोर्ट साथ नहीं ला पाते, जिससे इलाज में विलंब होता है। आभा आईडी के माध्यम से यह समस्या काफी हद तक दूर हो सकेगी। इससे स्वास्थ्य सेवाएं अधिक पारदर्शी और जवाबदेह भी बनेंगी।