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पहाडो पर हुई तेज बारिश से फिर टूटा महाव तटबंध
Updated Sun, 02 Jul 2017 11:27 PM IST
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छितवनिया में टूटा महाव तटबंध
बरगदवा/परसामलिक।
पहाड़ों पर हुई मूसलधार बारिश से महाव का पश्चिमी तटबंध रविवार दोपहर में एक बजे छितवनिया गांव के सामने मरम्मत हुए स्थान के बगल में दूसरी बार 20 मीटर टूट गया। इससे सैकड़ों एकड़ धान की रोपाई जलमग्न हो गई। मौके पर जिला प्रशासन के किसी अधिकारी को न पहुंचने से गांववालों में गुस्सा है।
रविवार की सुबह उफनाए महाव अपने पश्चिमी तटबंध को छितवनिया गांव के सामने दोपहर करीब एक बजे परशु यादव के खेत के पास टूट गया। इससे छितवनिया कोहरगड्ड में पानी घुस गया। छितवनिया और कोहरगड्डी के लोग सुरक्षित स्थान की ओर पलायन कर रहे हैं। महाव का पानी गांव के जगवंत यादव, जगदीश अग्रहरी, उमाशंकर जायसवाल, प्रेम रौनियार, हकीमुल, सुरेश गौड़, हरीलाल, तीरथ, इनमुल, निहाल, जय चन्दसहानी, फेंकू, इंद्रकमल, नरेश, जोखू आदि किसानों का रोपे गए धान के पौधे डूब गए हैं। वहीं, महाव के मटमैले पानी और रेत से तबाही मचाते हुए कोहरगड्डी, दोगहरा, विशुनपुरा, पिपरहिया, जहरी, घोड़हवा आदि दर्जनों गांवों में महाव का पानी पहुंच गया है। अभी तक जिला प्रशासन के किसी अधिकारी के न पहुंचने से गांववालों में आक्रोश है। बता दें कि महाव तटबंध ने बीते 21 जून को तीन स्थान खैरहवा, छितवनिया और कनरी चकरार के पास तोड़ते हुए तबाही मचाया था। सिंचाई विभाग ने एक सप्ताह बाद तीन कटान स्थलों को बांस-बल्ली और बोरियों में रेत भरकर कटानस्थल की मरम्मत करा दी थी। क्षेत्रीय किसान रामप्रीत यादव, सुदामा, बाबूराम, कन्हई, रामकिशुन, हरिराम यादव आदि ने कहा कि अब ऐसा लगता है कि महाव इस क्षेत्र के किसानों के लिए अभिशाप बन गया है।
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बरगदवा/परसामलिक।
पहाड़ों पर हुई मूसलधार बारिश से महाव का पश्चिमी तटबंध रविवार दोपहर में एक बजे छितवनिया गांव के सामने मरम्मत हुए स्थान के बगल में दूसरी बार 20 मीटर टूट गया। इससे सैकड़ों एकड़ धान की रोपाई जलमग्न हो गई। मौके पर जिला प्रशासन के किसी अधिकारी को न पहुंचने से गांववालों में गुस्सा है।
रविवार की सुबह उफनाए महाव अपने पश्चिमी तटबंध को छितवनिया गांव के सामने दोपहर करीब एक बजे परशु यादव के खेत के पास टूट गया। इससे छितवनिया कोहरगड्ड में पानी घुस गया। छितवनिया और कोहरगड्डी के लोग सुरक्षित स्थान की ओर पलायन कर रहे हैं। महाव का पानी गांव के जगवंत यादव, जगदीश अग्रहरी, उमाशंकर जायसवाल, प्रेम रौनियार, हकीमुल, सुरेश गौड़, हरीलाल, तीरथ, इनमुल, निहाल, जय चन्दसहानी, फेंकू, इंद्रकमल, नरेश, जोखू आदि किसानों का रोपे गए धान के पौधे डूब गए हैं। वहीं, महाव के मटमैले पानी और रेत से तबाही मचाते हुए कोहरगड्डी, दोगहरा, विशुनपुरा, पिपरहिया, जहरी, घोड़हवा आदि दर्जनों गांवों में महाव का पानी पहुंच गया है। अभी तक जिला प्रशासन के किसी अधिकारी के न पहुंचने से गांववालों में आक्रोश है। बता दें कि महाव तटबंध ने बीते 21 जून को तीन स्थान खैरहवा, छितवनिया और कनरी चकरार के पास तोड़ते हुए तबाही मचाया था। सिंचाई विभाग ने एक सप्ताह बाद तीन कटान स्थलों को बांस-बल्ली और बोरियों में रेत भरकर कटानस्थल की मरम्मत करा दी थी। क्षेत्रीय किसान रामप्रीत यादव, सुदामा, बाबूराम, कन्हई, रामकिशुन, हरिराम यादव आदि ने कहा कि अब ऐसा लगता है कि महाव इस क्षेत्र के किसानों के लिए अभिशाप बन गया है।
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