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छात्रावास भवन जर्जर, सहमे रहते छात्र
Updated Mon, 26 Jun 2017 06:47 PM IST
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महराजगंज। जीएसवीएस इण्टर कॉलेज परिसर से सटा डॉ. भीमराव अंबेडकर छात्रावास बदहाल हैं। जवाहर लाल नेहरू पीजी कॉलेज और जीएसवीएस इण्टर कॉलेज का यह हास्टल है। 32 कमरों का यह छात्रावास रहने योग्य नहीं है। बावजूद इसके छात्र यहां रहकर पढ़ाई करते हैं। एक तरफ इण्टर कॉलेज का छात्रावास है इसमें कोई रहता ही नहीं है। कमरे तो हैं लेकिन फाटक ही नहीं है। दो कमरो में कूडे़ कचरे भरे हुए हैं। जहां से उठती दुर्गंध से सांस लेना दूभर हो जाता है। छात्रावास परिसर में झाड़ियां उगी हुई है, जिसमें सांप बिच्छुओं ने बसेरा बना लिया है। यहां रहने वाले छात्र जान जोखिम में डालकर कमरो तक पहुंचते हैं। भवन भी जर्जर हो चुका है। बरसात में ज्यादातर कमरों से पानी टपकता है। हैंडपंप दूषित जल उगलता है। जर्जर में भवन रह रहे छात्र हर वक्त मौत की आहट से सहमे रहते हैं। क्योंकि भवन की दशा ऐसी है कि हर कोई देखकर सहम जाएगा। वही कॉलेज प्रशासन की नजर में किसी छात्र को कोई कमरा एलाट नहीं है। फंड उपलब्ध होने पर इसे दुरुस्त किया जाएगा।
बीए प्रथम वर्ष के छात्र संगम छात्रावास के एक कमरे मिले। बदहाल व्यवस्था पर बोले कि भवन तो जर्जर हो चुका है। इसमें रहना खतरे से खाली नहीं है। झाड़ियां उगी हुई है। डर लगता है कि कहीं सर्प न डंस ले। दिन में ही कमरे तक पहुंचने में डर लगता है। सफाई व्यवस्था बदतर है।
चंद्र प्रकाश गुप्ता बीए तृतीय वर्ष के छात्र हैं। यह कमरे के बाहर टहलते हुए मिले। समस्या पर चर्चा करते ही इनका दर्द छलक उठा। बोले कि छात्रावास मरम्मत के नाम पर सिर्फ आश्वासन दिया जाता है। शौचालय की हालत बदतर है। बदबु के कारण यहां कोई जाना नहीं चाहता है।
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राजेश अग्रहरी बीए तृतीय वर्ष के छात्र है। इनका कहना है कि छात्रावास के मरम्मत के लिए कभी ध्यान नहीं दिया गया लिहाजा यह खस्ताहाल हो गया। छात्र तो विवश होकर अपना वक्त गुजार कर चले जाते हैं। हैंडपंप से दूषित जल निकलता है। अगर कोई नियमित सेवन कर ले तो बीमारी से ग्रसित हो जाएगा।
एमए प्रथम वर्ष के छात्र सुनील गुप्ता ने बताया कि परिसर में झाड़ी के बीच एक टेंपो सड़ रहा है। हमेशा डर बना रहता है कि सांप बिच्छू न निकल जाए। बरसात में तो बेहद कठिनाई होती है। एक तो भवन जर्जर और परिसर में झाड़ियां दोनो से खतरा बना रहता है।
भवन की जर्जर स्थिति को देखते हुए इसे किसी छात्र को आवंटित नहीं किया गया है। जब फंड उपलब्ध होगा तो इसे दुरूस्त कराया जाएगा। इसके बाद ही किसी छात्र को रहने के लिए आवंटित किया जाएगा। अगर कोई स्वेच्छा से रह रहा है तो इसमें कालेज प्रशासन क्या कर सकता है।
प्रेमचन्द पटेल प्राचार्य पीजी कालेज महराजगंज
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बीए प्रथम वर्ष के छात्र संगम छात्रावास के एक कमरे मिले। बदहाल व्यवस्था पर बोले कि भवन तो जर्जर हो चुका है। इसमें रहना खतरे से खाली नहीं है। झाड़ियां उगी हुई है। डर लगता है कि कहीं सर्प न डंस ले। दिन में ही कमरे तक पहुंचने में डर लगता है। सफाई व्यवस्था बदतर है।
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चंद्र प्रकाश गुप्ता बीए तृतीय वर्ष के छात्र हैं। यह कमरे के बाहर टहलते हुए मिले। समस्या पर चर्चा करते ही इनका दर्द छलक उठा। बोले कि छात्रावास मरम्मत के नाम पर सिर्फ आश्वासन दिया जाता है। शौचालय की हालत बदतर है। बदबु के कारण यहां कोई जाना नहीं चाहता है।
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राजेश अग्रहरी बीए तृतीय वर्ष के छात्र है। इनका कहना है कि छात्रावास के मरम्मत के लिए कभी ध्यान नहीं दिया गया लिहाजा यह खस्ताहाल हो गया। छात्र तो विवश होकर अपना वक्त गुजार कर चले जाते हैं। हैंडपंप से दूषित जल निकलता है। अगर कोई नियमित सेवन कर ले तो बीमारी से ग्रसित हो जाएगा।
एमए प्रथम वर्ष के छात्र सुनील गुप्ता ने बताया कि परिसर में झाड़ी के बीच एक टेंपो सड़ रहा है। हमेशा डर बना रहता है कि सांप बिच्छू न निकल जाए। बरसात में तो बेहद कठिनाई होती है। एक तो भवन जर्जर और परिसर में झाड़ियां दोनो से खतरा बना रहता है।
भवन की जर्जर स्थिति को देखते हुए इसे किसी छात्र को आवंटित नहीं किया गया है। जब फंड उपलब्ध होगा तो इसे दुरूस्त कराया जाएगा। इसके बाद ही किसी छात्र को रहने के लिए आवंटित किया जाएगा। अगर कोई स्वेच्छा से रह रहा है तो इसमें कालेज प्रशासन क्या कर सकता है।
प्रेमचन्द पटेल प्राचार्य पीजी कालेज महराजगंज