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बाढ़ से फरेंदा क्षेत्र में मचा हाहाकार, दर्जनों गांव मैरुंड
Updated Thu, 17 Aug 2017 01:19 AM IST
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फरेंदा। लगातार बारिश व नेपाल के पानी से जिले में तबाही मच गई है। फरेंदा-महराजगंज मार्ग पूरी तरह बंद हो गया है। फरेंदा क्षेत्र के करीब एक दर्जन गांवों के लोग पलायन को मजबूर हो गए हैं। मवेशियों के लिए संकट उत्पन्न हो गया है।
फरेंदा क्षेत्र की रोहिन नदी, परगापुर ताल, व राप्ती नदी व घोघी नदी में पानी बढ़ने से क्षेत्र के दर्जनों गांव मैरुंड हो गए हैं। लोग अपने घरों को छोड़ सड़क पर डेरा डाल लिए हैं। रोहिन नदी पर जलालगढ़ बांध टूट जाने से क्षेत्र के मुजहना, जलालगढ़, भैसहिया, रामनगर, छितौनिया, त्रिमुहानी, भगवानपुर, पंडितपुुर, हरैया, बरातगाढ़ा, रखौना, रामप्रीत टोला, छितौनिया आदि गांवों के लोग जरूरी सामान व मवेशियों के साथ घर छोड़ दिए हैं। वे टेंट में जीवन-यापन कर रहे हैं। त्रिमुहानी पुल के समीप राजमार्ग पर पानी आ जाने से फरेंदा-महराजगंज मार्ग को प्रशासन ने बंद कर दिया है।
नेपाल के लगातार पानी छोड़ने से फरेंदा क्षेत्र की भयावह स्थिति हो गई है। लोग गांव से पलायन कर गए हैं। प्रशासन के भी लोग भी क्षेत्र वासियों को बचाने में जुट गये है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में क्षेत्रीय विधायक बजरंग बहादुर सिंह,पूर्व मंत्री श्यामनरायन तिवारी, पूर्व विधायक विनोद तिवारी, ब्लाक प्रमुख रामप्रकाश सिंह, विवेका पांडेय, डब्बू सिंह, शिववचन जायसवाल, बरातगाढ़ा प्रधान दिनेश यादव, अंबुज शाही, विंध्याचल वरुण, रामप्रीत, राजेंद्र यादव, गुड्डू सिंह, शिवप्रकाश यादव, अजय जायसवाल, दिनेश कुमार व विभूति पांडेय, जीएस मालवीय, रवींद्र मिश्रा, राजू मिश्रा सहित एसडीएम राजबहादुर सिंह, सीओ फरेंदा सहित सर्किल की पुलिस बाढ़ क्षेत्र का दौरा कर लोगों की सहायता में जुटी है।
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रोहिन नदी खतरे के निशान से ढाई मीटर ऊपर
केंद्रीय जल आयोग के स्थल प्रभारी विपिन बिहारी तिवारी ने बताया कि रोहिन नदी के जलस्तर में सुबह कुछ कमी आई है। नदी खतरे के निशान से लगभग ढाई मीटर ऊपर है। मध्य गंगा मंडल लखनऊ के एक्सईएन लगातार संपर्क में हैं। नदी का जलस्तर अभी स्थिर है। कर्मचारियों को हर घंटे की रिपोर्ट देने को कहा गया है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम सहायता में जुटी
बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में लोगों की राहत सहायता के लिए प्रशासन के निर्देश पर स्वास्थ्य सुविधा भी मुहैया कराया गया है। बनकटी स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डॉ एसके सिंह ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की टीम सहायता कर रही है। गांवों में दवा वितरण, क्लोरिन की गोली, सर्प दंश से निजात के लिए अस्पताल में सारी सुविधा मुहैया कराया गया है। इसके अलावा हड़हवा सहित तीन जगहों पर स्वास्थ्य विभाग की टीम लगी हुई है।
शिक्षा विभाग के साथ राजस्वकर्मी भी सहायता में जुटे
बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लोगों की सहायता के लिए शिक्षा विभाग के बीईओ हेमवंत कुमार, समन्वयक बृजेश विश्वकर्मा, नीरज श्रीवास्तव, महेश प्रसाद व राजस्व पंकज श्रीवास्तव, कानून गो सहित अनेक राजस्व कर्मी सहायता में जुटे रहे।
लाखों खर्च के बाद भी बांधों की स्थिति भयावह
फरेंदा। तीन दिन की बारिश में ही क्षेत्र के जर्जर बांधों की मरम्मत कलई खुल गई। बांधों की हालत देख आसपास के गांवों के लोगों की नींद उड़ गई है। ‘अमर उजाला’ ने एक महीने पहले ही ‘जर्जर बांधों से दहशत में लोग’ शीर्षक से रिपोर्ट प्रकाशित की थी। लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के कारण किसी भी बंधे की मरम्मत नहीं हुई और लोगों की मुसीबत बढ़ गई है।
फरेंदा क्षेत्र के धानी, बृजमनगंज की घोघी नदी, पवहनाला, राप्ती व रोहिन के किनारे बसे करीब दर्जनों गांवों के लोगों के चेहरे पर दहशत साफ दिख रही है। बाढ़ की विभीषिका ने लोगों को बेघर कर दिया है। लोग पलायन कर गए हैं। फरेंदा क्षेत्र का त्रिमुहानी बांध, बनदेइया बांध, बेलसड़ रिगौली बांध, लेहड़ा बांध की स्थिति अत्यंत भयावह है। नेेपाल के पानी छोड़ने व दो दिनों की बारिश से क्षहि-त्राहि मच गई है। बड़े-बडे़ रैट होल व रेन कट से बांध और भी जर्जर हो गया है। त्रिमुहानी बांध के किनारे बसे गांव जलालगढ़, हरैया, बदगदवा, पंडितपुर, भैसहिया, झावाकोट व बरातगाढ़ा आदि गांवों के लोग संकट में हैं। वर्ष 2007 में त्रिमुहानी का बांध टूटा था तो भयंकर तबाही मची थी। इस वर्ष भी बांध टूटने से किसानों की कमर टूट गई है। 19 अफसरों की टीम ने बांधों की स्थिति की रिपोर्ट डीएम को दी थी, लेकिन मरम्मत के नाम पर कुछ नहीं हुआ। वनदेइया बांध के किनारे पुरंदरपुर, केवटलिया, हथिगढ़वा, बेेलौहा, कानापार, रामनगर आदि गांवों के लोग भारी मुसीबत में हैं। अब अगर नदियों का जलस्तर बढ़ा तो संकट खड़ा हो सकता है।
बाढ़ पीड़ितों की मदद में आगे आए समाजसेवी
महराजगंज। जनपद के चार तहसीलों के सैकडों गांव इन दिनों बाढ की चपेट में है। लोग अपने गांव घर को छोड़ सुरक्षित स्थानों पर शरण लिए है। लेकिन यहां इनके खाने पीने की व्यवस्था भगवान भरोसे ही है। प्रशासन ने गांव में नाव और राहत बचाव दल तो भेज दिया है लेकिन भोजन पानी की समुचित अब भी मुकम्मल नहीं हो पाई है। एक दो स्थानों पर समाजसेवियों एवं स्थानीय नेताओ ने मद्द में हाथ बढाया है तो लोगों को भोजन पानी की नसीब हो रही है। निचलौल ब्लाक के बाठ क्षेत्रों में रविवार से ही गांव घर को छोड सुरक्षित स्थानों पर पहुंचे आधा दर्जन गांवों के लोगों को प्रमुख प्रतिनिधि अमरीश यादव, बीडीसी सदस्य विनोद दूबे व बीडीओ विवेकानंद मिश्र ने निजी सहयोग से तीन स्थानों पर भोजन दो वक्त का भोजन व चिउडा भूजा व गुड़ आदि मुहैया करा कर बाढ़ प्रभावितों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचवाने में जुटे हैं।
उन्होंने बताया कि शनिवार शाम को लोगों ने नदी का जलस्तर बढ़ने की जानकारी दी थी। रविवार सुबह जब गांव में पहुंचा तो पानी घुसने लगा था। तत्काल लोगों को अपने कीमती सामान सहेज बंधे पर बने सामुदायिक भवन में जाने की सलाह दी गई और लोग वक्त रहते गांव छोड़ दिया। चंद घंटे बाद ही गेड़हवां व कनमिसवा पूरी तरह बाढ़ से घिर गया। इसके बाद रविवार शाम से ही ग्रामीणों के लिये यही भोजन पानी की व्यवस्था की गई।
सोमवार की रात अचानक ग्राम सभा चंदा व कलनही में पानी घुस गया। इससे पूरा गांव मैरुंड होने के कगार पर पहुंच गया। रात में गांव में कोहराम मच गया लोग किसी तरह अपने परिवार के साथ नहर और बंधों पर शरण लिए। जहां मंगलवार को प्रमुख प्रतिनिधि अमरीश यादव व बीडीओ के साथ पहुंचे ब्लाक के ग्राम विकास अधिकारियों एवं ग्राम पंचायत अधिकारियों ने निजी सहयोग से चिउडा, भूजा व गुड़ का वितरण कराया।
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फरेंदा क्षेत्र की रोहिन नदी, परगापुर ताल, व राप्ती नदी व घोघी नदी में पानी बढ़ने से क्षेत्र के दर्जनों गांव मैरुंड हो गए हैं। लोग अपने घरों को छोड़ सड़क पर डेरा डाल लिए हैं। रोहिन नदी पर जलालगढ़ बांध टूट जाने से क्षेत्र के मुजहना, जलालगढ़, भैसहिया, रामनगर, छितौनिया, त्रिमुहानी, भगवानपुर, पंडितपुुर, हरैया, बरातगाढ़ा, रखौना, रामप्रीत टोला, छितौनिया आदि गांवों के लोग जरूरी सामान व मवेशियों के साथ घर छोड़ दिए हैं। वे टेंट में जीवन-यापन कर रहे हैं। त्रिमुहानी पुल के समीप राजमार्ग पर पानी आ जाने से फरेंदा-महराजगंज मार्ग को प्रशासन ने बंद कर दिया है।
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नेपाल के लगातार पानी छोड़ने से फरेंदा क्षेत्र की भयावह स्थिति हो गई है। लोग गांव से पलायन कर गए हैं। प्रशासन के भी लोग भी क्षेत्र वासियों को बचाने में जुट गये है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में क्षेत्रीय विधायक बजरंग बहादुर सिंह,पूर्व मंत्री श्यामनरायन तिवारी, पूर्व विधायक विनोद तिवारी, ब्लाक प्रमुख रामप्रकाश सिंह, विवेका पांडेय, डब्बू सिंह, शिववचन जायसवाल, बरातगाढ़ा प्रधान दिनेश यादव, अंबुज शाही, विंध्याचल वरुण, रामप्रीत, राजेंद्र यादव, गुड्डू सिंह, शिवप्रकाश यादव, अजय जायसवाल, दिनेश कुमार व विभूति पांडेय, जीएस मालवीय, रवींद्र मिश्रा, राजू मिश्रा सहित एसडीएम राजबहादुर सिंह, सीओ फरेंदा सहित सर्किल की पुलिस बाढ़ क्षेत्र का दौरा कर लोगों की सहायता में जुटी है।
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रोहिन नदी खतरे के निशान से ढाई मीटर ऊपर
केंद्रीय जल आयोग के स्थल प्रभारी विपिन बिहारी तिवारी ने बताया कि रोहिन नदी के जलस्तर में सुबह कुछ कमी आई है। नदी खतरे के निशान से लगभग ढाई मीटर ऊपर है। मध्य गंगा मंडल लखनऊ के एक्सईएन लगातार संपर्क में हैं। नदी का जलस्तर अभी स्थिर है। कर्मचारियों को हर घंटे की रिपोर्ट देने को कहा गया है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम सहायता में जुटी
बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में लोगों की राहत सहायता के लिए प्रशासन के निर्देश पर स्वास्थ्य सुविधा भी मुहैया कराया गया है। बनकटी स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डॉ एसके सिंह ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की टीम सहायता कर रही है। गांवों में दवा वितरण, क्लोरिन की गोली, सर्प दंश से निजात के लिए अस्पताल में सारी सुविधा मुहैया कराया गया है। इसके अलावा हड़हवा सहित तीन जगहों पर स्वास्थ्य विभाग की टीम लगी हुई है।
शिक्षा विभाग के साथ राजस्वकर्मी भी सहायता में जुटे
बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लोगों की सहायता के लिए शिक्षा विभाग के बीईओ हेमवंत कुमार, समन्वयक बृजेश विश्वकर्मा, नीरज श्रीवास्तव, महेश प्रसाद व राजस्व पंकज श्रीवास्तव, कानून गो सहित अनेक राजस्व कर्मी सहायता में जुटे रहे।
लाखों खर्च के बाद भी बांधों की स्थिति भयावह
फरेंदा। तीन दिन की बारिश में ही क्षेत्र के जर्जर बांधों की मरम्मत कलई खुल गई। बांधों की हालत देख आसपास के गांवों के लोगों की नींद उड़ गई है। ‘अमर उजाला’ ने एक महीने पहले ही ‘जर्जर बांधों से दहशत में लोग’ शीर्षक से रिपोर्ट प्रकाशित की थी। लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के कारण किसी भी बंधे की मरम्मत नहीं हुई और लोगों की मुसीबत बढ़ गई है।
फरेंदा क्षेत्र के धानी, बृजमनगंज की घोघी नदी, पवहनाला, राप्ती व रोहिन के किनारे बसे करीब दर्जनों गांवों के लोगों के चेहरे पर दहशत साफ दिख रही है। बाढ़ की विभीषिका ने लोगों को बेघर कर दिया है। लोग पलायन कर गए हैं। फरेंदा क्षेत्र का त्रिमुहानी बांध, बनदेइया बांध, बेलसड़ रिगौली बांध, लेहड़ा बांध की स्थिति अत्यंत भयावह है। नेेपाल के पानी छोड़ने व दो दिनों की बारिश से क्षहि-त्राहि मच गई है। बड़े-बडे़ रैट होल व रेन कट से बांध और भी जर्जर हो गया है। त्रिमुहानी बांध के किनारे बसे गांव जलालगढ़, हरैया, बदगदवा, पंडितपुर, भैसहिया, झावाकोट व बरातगाढ़ा आदि गांवों के लोग संकट में हैं। वर्ष 2007 में त्रिमुहानी का बांध टूटा था तो भयंकर तबाही मची थी। इस वर्ष भी बांध टूटने से किसानों की कमर टूट गई है। 19 अफसरों की टीम ने बांधों की स्थिति की रिपोर्ट डीएम को दी थी, लेकिन मरम्मत के नाम पर कुछ नहीं हुआ। वनदेइया बांध के किनारे पुरंदरपुर, केवटलिया, हथिगढ़वा, बेेलौहा, कानापार, रामनगर आदि गांवों के लोग भारी मुसीबत में हैं। अब अगर नदियों का जलस्तर बढ़ा तो संकट खड़ा हो सकता है।
बाढ़ पीड़ितों की मदद में आगे आए समाजसेवी
महराजगंज। जनपद के चार तहसीलों के सैकडों गांव इन दिनों बाढ की चपेट में है। लोग अपने गांव घर को छोड़ सुरक्षित स्थानों पर शरण लिए है। लेकिन यहां इनके खाने पीने की व्यवस्था भगवान भरोसे ही है। प्रशासन ने गांव में नाव और राहत बचाव दल तो भेज दिया है लेकिन भोजन पानी की समुचित अब भी मुकम्मल नहीं हो पाई है। एक दो स्थानों पर समाजसेवियों एवं स्थानीय नेताओ ने मद्द में हाथ बढाया है तो लोगों को भोजन पानी की नसीब हो रही है। निचलौल ब्लाक के बाठ क्षेत्रों में रविवार से ही गांव घर को छोड सुरक्षित स्थानों पर पहुंचे आधा दर्जन गांवों के लोगों को प्रमुख प्रतिनिधि अमरीश यादव, बीडीसी सदस्य विनोद दूबे व बीडीओ विवेकानंद मिश्र ने निजी सहयोग से तीन स्थानों पर भोजन दो वक्त का भोजन व चिउडा भूजा व गुड़ आदि मुहैया करा कर बाढ़ प्रभावितों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचवाने में जुटे हैं।
उन्होंने बताया कि शनिवार शाम को लोगों ने नदी का जलस्तर बढ़ने की जानकारी दी थी। रविवार सुबह जब गांव में पहुंचा तो पानी घुसने लगा था। तत्काल लोगों को अपने कीमती सामान सहेज बंधे पर बने सामुदायिक भवन में जाने की सलाह दी गई और लोग वक्त रहते गांव छोड़ दिया। चंद घंटे बाद ही गेड़हवां व कनमिसवा पूरी तरह बाढ़ से घिर गया। इसके बाद रविवार शाम से ही ग्रामीणों के लिये यही भोजन पानी की व्यवस्था की गई।
सोमवार की रात अचानक ग्राम सभा चंदा व कलनही में पानी घुस गया। इससे पूरा गांव मैरुंड होने के कगार पर पहुंच गया। रात में गांव में कोहराम मच गया लोग किसी तरह अपने परिवार के साथ नहर और बंधों पर शरण लिए। जहां मंगलवार को प्रमुख प्रतिनिधि अमरीश यादव व बीडीओ के साथ पहुंचे ब्लाक के ग्राम विकास अधिकारियों एवं ग्राम पंचायत अधिकारियों ने निजी सहयोग से चिउडा, भूजा व गुड़ का वितरण कराया।