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Maharajganj News: 12 शिक्षकों पर 2.48 लाख नौनिहालों को दक्ष बनाने का जिम्मा
Thu, 05 Jun 2025 01:19 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Thu, 05 Jun 2025 01:19 AM IST
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महराजगंज। जिले के परिषदीय स्कूलों में 12 खेल शिक्षकों के भरोसे 2.48 लाख विद्यार्थियों को खेलकूद में दक्ष बनाने में विभाग जुटा है। खेलो इंडिया व फिट इंडिया के खेल बाल क्रीड़ा प्रतियोगिताओं में शामिल किया गया है, जिससे बेसिक स्कूलों के नौनिहाल खेल में रुचि बढ़ाकर इसमें करियर बना सकें यह फलीभूत नहीं हो रहा।
बाल क्रीड़ा प्रतियोगिता का दायरा जिले के पारंपरिक खेलों तक सिमट कर रह गया है। नये और आधुनिक खेलों के प्रति विद्यार्थी चाहकर भी कदम नहीं बढ़ा रहे क्योंकि संबंधित खेल की गतिविधि कराने वाले शिक्षकों की कमी इसमें बाधक बनी हुई है, जबकि विभाग इसके लिए प्रति वर्ष एक करोड़ 32 लाख 60 हजार रुपये खर्च कर रही है।
बेसिक बाल क्रीड़ा प्रतियोगिता में हर वह खेल शामिल है जो खेलो इंडिया व फिट इंडिया में खेला जा सकता, लेकिन जनपद के नौनिहाल खोखो और कबड्डी में भविष्य तलाश रहे हैं।
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कारण सिर्फ इतना ही है कि परिषदीय स्कूलों में खेल संबंधित गतिविधि कराने के लिए शिक्षक ही नहीं हैं। विभाग किसी तरह पिछले चार वर्ष से महज 12 खेल शिक्षकों के भरोसे प्रतियोगिता का संचालन कर रहा है। जबकि प्रति वर्ष इसपर भारी भरकम बजट खर्च करने में कोई कोताही नहीं कर रहा। जनपद में कुल 1705 परिषदीय स्कूलों का संचालन हैं।
इसमें प्राइमरी 1044 है जिन्हें प्रति वर्ष 5 हजार रुपये की दर से 5220000 रुपये, 375 पूमावि को 10 हजार रुपये की दर से 3750000 रुपये तो 286 कंपोजिट में 4290000 रुपये स्पोर्ट्स ग्रांट के रूप में प्रति वर्ष खर्च हो रहे हैं। यह रकम खेल सामग्री के लिए खर्च करने के निर्देश हैं।
स्कूल स्तर से लेकर राज्य स्तर तक आयोजन होते हैं, लेकिन पिछले तीन वर्ष के परिणाम पर गौर करें तो यहां के बच्चे मंडल स्तर तक सिर्फ कबड्डी और खोखो में शामिल होने के लिए जा सके।
बैडमिंटन, फुटबॉल, हाकी, ताइक्वांडो, वेट लिफ्टिंग, तैराकी, रनिंग इत्यादि में रुचि रखकर बच्चे सिर्फ इसलिए दूर रहते हैं क्योंकि खेल का तकनीक ज्ञान देने के लिए खेल शिक्षक ही नहीं हैं।
स्कूलों में नोडल शिक्षकों के भरोसे बच्चे सिर्फ पारंपरिक खेलों तक ही सीमित हैं। बेसिक शिक्षा विभाग ब्लॉक स्तर पर खेल शिक्षक लगाकर इसे आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा।
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बाल क्रीड़ा प्रतियोगिता का दायरा जिले के पारंपरिक खेलों तक सिमट कर रह गया है। नये और आधुनिक खेलों के प्रति विद्यार्थी चाहकर भी कदम नहीं बढ़ा रहे क्योंकि संबंधित खेल की गतिविधि कराने वाले शिक्षकों की कमी इसमें बाधक बनी हुई है, जबकि विभाग इसके लिए प्रति वर्ष एक करोड़ 32 लाख 60 हजार रुपये खर्च कर रही है।
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बेसिक बाल क्रीड़ा प्रतियोगिता में हर वह खेल शामिल है जो खेलो इंडिया व फिट इंडिया में खेला जा सकता, लेकिन जनपद के नौनिहाल खोखो और कबड्डी में भविष्य तलाश रहे हैं।
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कारण सिर्फ इतना ही है कि परिषदीय स्कूलों में खेल संबंधित गतिविधि कराने के लिए शिक्षक ही नहीं हैं। विभाग किसी तरह पिछले चार वर्ष से महज 12 खेल शिक्षकों के भरोसे प्रतियोगिता का संचालन कर रहा है। जबकि प्रति वर्ष इसपर भारी भरकम बजट खर्च करने में कोई कोताही नहीं कर रहा। जनपद में कुल 1705 परिषदीय स्कूलों का संचालन हैं।
इसमें प्राइमरी 1044 है जिन्हें प्रति वर्ष 5 हजार रुपये की दर से 5220000 रुपये, 375 पूमावि को 10 हजार रुपये की दर से 3750000 रुपये तो 286 कंपोजिट में 4290000 रुपये स्पोर्ट्स ग्रांट के रूप में प्रति वर्ष खर्च हो रहे हैं। यह रकम खेल सामग्री के लिए खर्च करने के निर्देश हैं।
स्कूल स्तर से लेकर राज्य स्तर तक आयोजन होते हैं, लेकिन पिछले तीन वर्ष के परिणाम पर गौर करें तो यहां के बच्चे मंडल स्तर तक सिर्फ कबड्डी और खोखो में शामिल होने के लिए जा सके।
बैडमिंटन, फुटबॉल, हाकी, ताइक्वांडो, वेट लिफ्टिंग, तैराकी, रनिंग इत्यादि में रुचि रखकर बच्चे सिर्फ इसलिए दूर रहते हैं क्योंकि खेल का तकनीक ज्ञान देने के लिए खेल शिक्षक ही नहीं हैं।
स्कूलों में नोडल शिक्षकों के भरोसे बच्चे सिर्फ पारंपरिक खेलों तक ही सीमित हैं। बेसिक शिक्षा विभाग ब्लॉक स्तर पर खेल शिक्षक लगाकर इसे आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा।