फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   lucknow ngo behind sc's historical judgement

SC: ऐतिहासिक फैसले के पीछे लखनऊ का संघर्ष

Thu, 11 Jul 2013 10:20 AM IST
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क Updated Thu, 11 Jul 2013 10:20 AM IST
विज्ञापन
lucknow ngo behind sc's historical judgement

सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के पीछे लखनऊ के एक गैर सरकारी संगठन लोक प्रहरी की मजबूत पहल रही।

विज्ञापन


अगस्त 2003 में लोक प्रहरी की स्थापना चुनाव आयोग के पूर्व मुख्य आयुक्त और गुजरात के गवर्नर रहे आरके त्रिवेदी की रहनुमाई में हुई।

कई बड़े लोगों ने की थी पहल
गुड गवर्नेंस के मूल उद्देश्य को हासिल करने के लिए संघर्ष के लिए बनी इस संस्था के संरक्षक हैं इलाहाबाद उच्च न्यायालय के रिटायर्ड न्यायाधीश एसएन सहाय और प्रदेश के पूर्व डीजीपी जेएन चतुर्वेदी।

पढ़े: दो साल की सजा तो जनप्रतिनिधियों की सदस्यता खत्म
विज्ञापन


लोक प्रहरी के सचिव और पूर्व आईएएस एसएन शुक्ला ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को ऐतिहासिक बताया है।

2005 में दाखिल की थी याचिका
उन्होंने कहा कि लोक प्रहरी की ओर से हमने 2005 में इस बारे में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की थी। उसी साल लिली थॉमस की ओर से भी इस संबंध में एक और याचिका दाखिल हुई।
विज्ञापन
विज्ञापन


सुप्रीम कोर्ट ने दोनों ही याचिकाओं के आधार पर यह ऐतिहासिक फैसला दिया है।

छह दशक बाद बदलाव हुआ मुमकिन
शुक्ला कहते हैं, इस फैसले की वजह से 1951 से चले आ रहे जनप्रतिनिधित्व कानून में एक बड़ा बदलाव संभव हुआ है। सबसे बड़ी अदालत ने इस जन प्रतिनिधित्व कानून की एक धारा को निरस्त कर आपराधिक चरित्र के लोगों के लिए सियासत की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।


पढ़े: दिग्गजों पर भी लटकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले की तलवार

इसी धारा का इस्तेमाल कर दागी चरित्र के राजनेता अदालत में दोषसिद्ध साबित होने के बावजूद सत्ता में बने रहते थे, लेकिन अब ऐसा मुमकिन नहीं होगा।

हुई थी पुरजोर कोशिश

लोक प्रहरी की ओर से अदालत में इस बात की जोरदार दलील दी गई कि जिस आधार पर हम किसी को चुनाव लड़ने से रोक सकते हैं, उसी आधार पर उसकी सदस्यता कैसे जारी रह सकती है।

सभी पहलुओं पर गौर करके दिया फैसला

अदालत का फैसला आने के बाद भी किसी दोषसिद्ध व्यक्ति को कैसे व्यवस्था का हिस्सा बने रहने दिया जाए और उसे प्रशासन और अफसरों पर हुक्मवदूली का अधिकार दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने सभी पहलुओं पर गौर कर इस बारे में विस्तार से फैसला दिया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed