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Ground Report: जौनपुर में बाहरी बनाम स्थानीय में चुनाव, कोर वोटर का सहारा... इस बार बदली हुई है सियासी तस्वीर

Thu, 23 May 2024 09:01 AM IST
आकाश दुबे चंद्रभान यादव, अमर उजाला, जौनपुर
चंद्रभान यादव, अमर उजाला, जौनपुर Published by: आकाश दुबे Updated Thu, 23 May 2024 09:01 AM IST
सार

भाजपा ने इस बार यहां से कृपाशंकर सिंह पर दांव लगाया है। वहीं, सपा ने बाबू सिंह कुशवाहा को मैदान में उतारा है। बांदा के मूल निवासी कुशवाहा बसपा सरकार में मंत्री रहे।

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Lok Sabha Election Ground Report External vs local elections in Jaunpur
Lok Sabha Election 2024 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जौनपुर लोकसभा क्षेत्र में सियासी तस्वीर बदली हुई है। पूर्व सांसद धनंजय सिंह व सपा के पूर्व विधायक ओमप्रकाश दुबे भाजपा के साथ हो गए हैं। भाजपा का कोर वोटबैंक मौर्य सपा की ओर कदम बढ़ाता नजर आ रहा है। ऐसे में भाजपा-सपा के बीच सीधी टक्कर है। बसपा काडर वोटबैंक के सहारे है। लोकसभा क्षेत्र की दो विधानसभा सीटों पर सपा, दो पर भाजपा, तो एक पर निषाद पार्टी का कब्जा है। भाजपा ने इस बार कृपाशंकर सिंह पर दांव लगाया है।

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कृपाशंकर महाराष्ट्र में गृहमंत्री रहे और जौनपुर के मूल निवासी हैं। उन्हें परंपरागत वोटबैंक का सहारा है। हालांकि उनके सामने अति पिछड़ी जातियों को गोलबंद करने की चुनौती है। वहीं, सपा ने बाबू सिंह कुशवाहा को मैदान में उतारा है। बांदा के मूल निवासी कुशवाहा बसपा सरकार में मंत्री रहे। उन्हें सपा के परंपरागत वोटबैंक के साथ बिरादरी का सहारा। हालांकि बाहरी होने की चुनौती भी उनके सामने है। बसपा ने सांसद श्याम सिंह यादव पर फिर भरोसा जताया है। श्याम सिंह को काडर वोटबैंक का सहारा है। उन्होंने पहले चुनाव लड़ने से मना कर दिया था। ऐसे में वोटबैंक को सहेजने की भी चुनौती है।

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सदर विधानसभा क्षेत्र में सुबह के वक्त छबीलेपुर बाजार में चाय की दुकान पर आसपास के गांव के लोग बैठे मिले। व्यापारी अशोक यादव का दावा है कि यहां एकतरफा सपा को वोट जाएगा। वजह? इस सवाल पर वह कहते हैं, भाजपा ने स्वास्थ्य, शिक्षा पर कोई काम नहीं किया। योगेंद्र निषाद कहते हैं, मंदिर बन गया, लेकिन भविष्य में बच्चों का क्या होगा, भाजपा इसका कोई प्लान नहीं बता पा रही है। अरविंद छबीलेपुर से छुंछा घाट जाने वाली टूटी सड़क को लेकर दुखी हैं। वीरेंद्र मौर्य कहते हैं कि पहले भाजपा के साथ थे। अब सपा को वोट करेंगे। राम सागर गुप्ता राम मंदिर की वजह से भाजपा के साथ हैं।

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बदलापुर में ढाबे पर मिले देवदत्त पांडेय कहते हैं, पहले  हम सपा के साथ थे, इस बार भाजपा के साथ हैं। यहां से हम शाहगंज पहुंचे। स्टेशन के सामने मिले दुकानदार प्रेम जायसवाल कहते हैं, जब तक मोदी हैं, तब तक भाजपा के साथ हैं। यहां मिले शिवसरन यादव और अजमल कहते हैं, हम तो पूर्व मंत्री शैलेंद्र यादव ललई को अपना नेता मानते हैं, पर मजबूरी में बाबू सिंह को वोट देंगे। शकरमंडी मौर्य बिरादरी का गढ़ है। यहां के दिनेश मौर्य, अजय मौर्य कहते हैं, हम हमेशा भाजपा के साथ रहे हैं। सपा ने बिरादरी का उम्मीदवार दिया है, इसलिए उसके साथ हैं। दूसरा, भाजपा अभी तक बेरोजगारी दूर करने का कोई उपाय नहीं कर पाई है।

रोजी-रोटी बना मुद्दा
मल्हनी विधानसभा क्षेत्र के करंजा खुर्द गांव में हम पहुंचे तो पेड़ के नीचे चुनावी चर्चा में कुछ लोग मशगूल मिले। मोहम्मद अली कहते हैं, बेरोजगारी, महंगाई की वजह से लोग परेशान हैं। इसलिए सपा को वोट देंगे। मोहम्मद असगरी, बबलू यादव और चंद्रशेखर कहते हैं कि कताई मिल बंद है, चीनी मिल बिक गई। सपा सरकार में मेडिकल कॉलेज की नींव पड़ी, लेकिन इलाज नहीं मिल पा रहा है। प्रदीप गुप्ता कहते हैं, भाजपा ने किसी व्यक्ति का नहीं, बल्कि राष्ट्र का विकास किया है। यहां मिले रिंकू गौतम कहते हैं कि वोट तो हाथी पर जाएगा, उम्मीदवार कोई भी हो। वह भी रोजगार को लेकर सवाल उठाते हैं।

छुट्टा पशुओं से परेशानी
मुंगरा बादशाहपुर के सुजानगंज में मिले प्रमोद पटेल और जयकुमार यादव कहते हैं कि मोदी-योगी के राज में कानून-व्यवस्था सही है, लेकिन महंगाई के बाद सबसे ज्यादा मार छुट्टा पशुओं की है। सब्जी की खेती चौपट हो जा रही है। कुछ ऐसी ही बात राजेश दुबे और दिवाकर भी कहते हैं। वोट कहां देंगे, इस सवाल पर वे खुलकर नहीं बोलते।

धनंजय फैक्टर से कहीं गुस्सा, तो कहीं सहानुभूति
चुनाव से ठीक पहले पूर्व सांसद धनंजय सिंह को जेल जाना पड़ा। बसपा ने धनंजय सिंह की पत्नी श्रीकला को मैैदान में उतारा था, लेकिन नामांकन के अंतिम दिन सांसद श्याम सिंह यादव को मैदान में उतार दिया। सिकरारा के प्रेम निषाद हमेशा धनंजय के साथ रहे हैं। वह कहते हैं, भाजपा ने धनंजय को चुनाव से हटने के लिए मजबूर किया है, इसलिए विरोध में वोट देंगे। कुछ ऐसी ही बात लाल दरवाजा निवासी शकील और मुस्तकीन भी करते हैं।

यादव और क्षत्रिय उम्मीदवारों के बीच रहा मुकाबला
वर्ष 1990 के बाद हुए आठ चुनावों में यादव और क्षत्रिय के बीच सीधी टक्कर हुई और दोनों चार-चार बार सांसद बने। 2009 में बाहुबली धनंजय सिंह ने बसपा का खाता खोला। 2019 में बसपा के श्याम सिंह यादव 50.08 फीसदी वोटबैंक हासिल कर सांसद बने, जबकि भाजपा के केपी सिंह को 42.3 फीसदी वोट मिले थे।

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