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धुंधली विकास की तस्वीर में भरेंगे नए रंग
lalitpur
Updated Mon, 26 Dec 2016 01:22 AM IST
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नगर पालिका
- फोटो : amar ujala
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यह साल भी गुजरने वाला है। पूरे वर्ष शहर के विकास कार्य ठप पड़े रहे। नगर पालिका को नवीन विकास कार्यों के लिए शासन से बजट तो मिला, लेकिन विकास कार्य परवान नहीं चढ़ पाए। वर्ष के अंत में केवल नगर पालिका क्षेत्र के सीमा विस्तार की स्वीकृति ही उपलब्धि कही जा सकती है। इस साल पार्षदों के रूठने व मनाने का ड्रामा भी खूब चलता रहा। नए साल से तमाम उम्मीदें हैं। सड़कें, मुक्तिधाम, सफाई व्यवस्था, आडिटोरियम, स्वीमिंग पूल, तालाब का सुशोभीकरण समेत तमाम योजनाओं की इस वर्ष पूरा होने की आस है।
01- चलते काम भी रुके
जुलाई 2015 में नगर पालिका ने करोड़ों रुपए की लागत के निर्माण कार्यों के टेंडर निकाले। शहर के समस्त वार्डों में सड़कें, नाला, सामुदायिक शौचालय, मूत्रालय, धार्मिक स्थलों पर सामुुदायिक केंद्रों का निर्माण, शहर के मुख्य चौराहों व महापुरुषों की प्रतिमाओं का जीर्णोद्धार आदि विकास कार्य तेजी से शुरू हुए, मगर वर्ष 2016 की शुरुआत से ही इन कार्यों पर ग्रहण लग गया। शहर के विकास कार्य पूरी तरह से ठप हो गए। नगर पालिका को अनेक नवीन योजनाओं व साधनों की उपलब्धि हासिल तो हुइ, लेकिन इनको अमलीजामा नहीं पहना पाया जा सका है।
पैसा मिला फिर भी काम नहीं हुआ
ऐसा नहीं है कि इस वर्ष शहर के विकास कार्यों के लिए नगर पालिका को शासन से स्वीकृति व बजट उपलब्ध नहीं हुआ हो। शहर में डा.एपीजे अब्दुल कलाम नगरीय सौर पुंज योजना के तहत मार्ग प्रकाश के लिए 30 किलोवाट और 15 किलोवाट के सोलर प्लांट की स्थापना व हाईमास्ट लाइटों के लिए शासन ने 2.99 करोड़ रुपए की योजना को स्वीकृति दे दी। जून में 1.49 करोड़ रुपए की प्रथम किस्त नगर पालिका को जारी कर दी, लेकिन काम पूरा नहीं हो सका।
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यहां भी मिली असफलता
स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत शहर के वार्ड नंबर 03, 04, 06 व 16 में सामुदायिक शौचालय के निर्माण के लिए नगर पालिका के खाते में अगस्त माह में 10.40 लाख रुपए जारी किए जा चुके हैं। कान्हा पशु आश्रय योजना के तहत शहर में कांजीहाउस का निर्माण कराने के लिए सितंबर माह में स्वीकृत 3.49 करोड़ रुपए में से नवंबर माह में 1.74 करोड़ रुपए की प्रथम किस्त नगर पालिका के खाते में आ चुकी है, लेकिन यह योजनाएं साल के अंत तक परवान नहीं चढ़ सकी हैं।
न स्वकर लागू हुआ और न और काम
शहरी क्षेत्रों की कायाकल्प करने के चलाई जा रही अमृत योजना के तहत 13 लाख रुपए की लागत से वार्ड नंबर 10 में आईटीआई कॉलेज के पीछे कांशीराम आवासी कालोनी में स्थित पार्क के जीर्णोंद्धार व साढ़े 23 करोड़ रुपए की लागत से नेहरु नगर पेयजल योजना के स्वीकृति मिल चुकी है। इसके अलावा विभागीय आय बढ़ाने के लिए पूरा एक वर्ष बीतने के बाद भी स्वकर सर्वे प्रणाली लागू नहीं हो पाई, मेडिकल सेंटरों के लाइसेंस व फुटपाथ व्यापारियों और फेरी लगाने वालों के लाइसेंस भी जारी नहीं हो सके हैं, जिससे विभाग को राजस्व की भी क्षति पहुंच रही है।
सिर्फ यह हाथ आए
इस वर्ष नगर पालिका शहर में केवल सोलर ऊर्जा वाली 110 स्ट्रीट लाइटें और साल के अंतिम माह में डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन के लिए दस कवर्ड आपे ही खरीद पाई है।
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स्वीकृति की आस में विकास योजनाएं
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शहर के विभिन्न क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए कई विकास परियोजनाएं शासन से स्वीकृति पाने के लिए लंबित पड़ी हैं। नगर के नेहरु नगर, सुरईघाट, इलाइट व गांधीनगर में बने मुक्तिधाम के जीर्णोद्धार, सुशोभीकरण और विकास के लिए 4.26 करोड़ रुपए की प्रस्तावित कार्ययोजना।
- जल निकासी योजनांतर्गत वार्ड नंबर 04, 11, 14 व 16 में नाले-नालियों के निर्माण कार्य के लिए 1.38 करोड़ रुपए की कार्ययोजना।
- नगरीय सड़क सुधार योजनांतर्गत शहर के विभिन्न मार्गों पर सीसी व पेवर ब्रेक्स सड़क के निर्माण कार्य के लिए 4.84 करोड़ रुपए की कार्ययोजना।
- नगरीय झील, तालाब व पोखर संरक्षण योजना के तहत सुम्मेरा तालाब की साफ-सफाई का कार्य, मंदिर परिसर व घाट का विस्तार एवं सुशोभीकरण और खिरकापुरा सुरईघाट मुक्तिधाम व इलाइट मुक्तिधाम में पोखर का निर्माण कार्य कराने के 03 करोड़ रुपए से अधिक लागत की कार्ययोजना।
- इस साल आडिटोरियम, शहर का कचरा निस्तारण के लिए सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट और बच्चों के मनोरंजन के लिए कंपनी बाग में स्वीमिंग पूल का निर्माण की आस।
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इनका कहना है
वर्ष भर बजट की कमी के बावजूद नगर पालिका द्वारा प्राथमिकता वाले कामों को अटकने नहीं दिया गया है। बजट समय पर उपलब्ध होता रहता, तो नगर में तमाम विकास योजनाओं को अमलीजामा पहनाने का काम किया जा सकता था। नए वर्ष से नई उम्मीदें है कि बजट उपलब्ध हो नगर का तेजी से विकास किया जा सके। सुभाष जायसवाल नगर पालिका अध्यक्ष
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01- चलते काम भी रुके
जुलाई 2015 में नगर पालिका ने करोड़ों रुपए की लागत के निर्माण कार्यों के टेंडर निकाले। शहर के समस्त वार्डों में सड़कें, नाला, सामुदायिक शौचालय, मूत्रालय, धार्मिक स्थलों पर सामुुदायिक केंद्रों का निर्माण, शहर के मुख्य चौराहों व महापुरुषों की प्रतिमाओं का जीर्णोद्धार आदि विकास कार्य तेजी से शुरू हुए, मगर वर्ष 2016 की शुरुआत से ही इन कार्यों पर ग्रहण लग गया। शहर के विकास कार्य पूरी तरह से ठप हो गए। नगर पालिका को अनेक नवीन योजनाओं व साधनों की उपलब्धि हासिल तो हुइ, लेकिन इनको अमलीजामा नहीं पहना पाया जा सका है।
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पैसा मिला फिर भी काम नहीं हुआ
ऐसा नहीं है कि इस वर्ष शहर के विकास कार्यों के लिए नगर पालिका को शासन से स्वीकृति व बजट उपलब्ध नहीं हुआ हो। शहर में डा.एपीजे अब्दुल कलाम नगरीय सौर पुंज योजना के तहत मार्ग प्रकाश के लिए 30 किलोवाट और 15 किलोवाट के सोलर प्लांट की स्थापना व हाईमास्ट लाइटों के लिए शासन ने 2.99 करोड़ रुपए की योजना को स्वीकृति दे दी। जून में 1.49 करोड़ रुपए की प्रथम किस्त नगर पालिका को जारी कर दी, लेकिन काम पूरा नहीं हो सका।
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यहां भी मिली असफलता
स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत शहर के वार्ड नंबर 03, 04, 06 व 16 में सामुदायिक शौचालय के निर्माण के लिए नगर पालिका के खाते में अगस्त माह में 10.40 लाख रुपए जारी किए जा चुके हैं। कान्हा पशु आश्रय योजना के तहत शहर में कांजीहाउस का निर्माण कराने के लिए सितंबर माह में स्वीकृत 3.49 करोड़ रुपए में से नवंबर माह में 1.74 करोड़ रुपए की प्रथम किस्त नगर पालिका के खाते में आ चुकी है, लेकिन यह योजनाएं साल के अंत तक परवान नहीं चढ़ सकी हैं।
न स्वकर लागू हुआ और न और काम
शहरी क्षेत्रों की कायाकल्प करने के चलाई जा रही अमृत योजना के तहत 13 लाख रुपए की लागत से वार्ड नंबर 10 में आईटीआई कॉलेज के पीछे कांशीराम आवासी कालोनी में स्थित पार्क के जीर्णोंद्धार व साढ़े 23 करोड़ रुपए की लागत से नेहरु नगर पेयजल योजना के स्वीकृति मिल चुकी है। इसके अलावा विभागीय आय बढ़ाने के लिए पूरा एक वर्ष बीतने के बाद भी स्वकर सर्वे प्रणाली लागू नहीं हो पाई, मेडिकल सेंटरों के लाइसेंस व फुटपाथ व्यापारियों और फेरी लगाने वालों के लाइसेंस भी जारी नहीं हो सके हैं, जिससे विभाग को राजस्व की भी क्षति पहुंच रही है।
सिर्फ यह हाथ आए
इस वर्ष नगर पालिका शहर में केवल सोलर ऊर्जा वाली 110 स्ट्रीट लाइटें और साल के अंतिम माह में डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन के लिए दस कवर्ड आपे ही खरीद पाई है।
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स्वीकृति की आस में विकास योजनाएं
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शहर के विभिन्न क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए कई विकास परियोजनाएं शासन से स्वीकृति पाने के लिए लंबित पड़ी हैं। नगर के नेहरु नगर, सुरईघाट, इलाइट व गांधीनगर में बने मुक्तिधाम के जीर्णोद्धार, सुशोभीकरण और विकास के लिए 4.26 करोड़ रुपए की प्रस्तावित कार्ययोजना।
- जल निकासी योजनांतर्गत वार्ड नंबर 04, 11, 14 व 16 में नाले-नालियों के निर्माण कार्य के लिए 1.38 करोड़ रुपए की कार्ययोजना।
- नगरीय सड़क सुधार योजनांतर्गत शहर के विभिन्न मार्गों पर सीसी व पेवर ब्रेक्स सड़क के निर्माण कार्य के लिए 4.84 करोड़ रुपए की कार्ययोजना।
- नगरीय झील, तालाब व पोखर संरक्षण योजना के तहत सुम्मेरा तालाब की साफ-सफाई का कार्य, मंदिर परिसर व घाट का विस्तार एवं सुशोभीकरण और खिरकापुरा सुरईघाट मुक्तिधाम व इलाइट मुक्तिधाम में पोखर का निर्माण कार्य कराने के 03 करोड़ रुपए से अधिक लागत की कार्ययोजना।
- इस साल आडिटोरियम, शहर का कचरा निस्तारण के लिए सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट और बच्चों के मनोरंजन के लिए कंपनी बाग में स्वीमिंग पूल का निर्माण की आस।
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इनका कहना है
वर्ष भर बजट की कमी के बावजूद नगर पालिका द्वारा प्राथमिकता वाले कामों को अटकने नहीं दिया गया है। बजट समय पर उपलब्ध होता रहता, तो नगर में तमाम विकास योजनाओं को अमलीजामा पहनाने का काम किया जा सकता था। नए वर्ष से नई उम्मीदें है कि बजट उपलब्ध हो नगर का तेजी से विकास किया जा सके। सुभाष जायसवाल नगर पालिका अध्यक्ष