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मिट्टी के तेल से संचालित हो रहीं दर्जनों टैक्सियां
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 06 Jun 2016 12:57 AM IST
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ललितपुर। विश्व पर्यावरण दिवस पर पर्यावरण बचाने के लिए बड़ी-बड़ी बातें की गईं, लेकिन मिट्टी के तेल (केरोसीन) से संचालित टैक्सियों की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ज्यादा मुनाफा कमाने के चक्कर में टैक्सी संचालक इसका धड़ल्ले से उपयोग कर रहे हैं।
मिट्टी के तेल से संचालित हो रहे वाहनों से शहर में सबसे अधिक प्रदूषण फैलाया जा रहा है। यह वाहन खुुलेआम फर्राटा भर रहे हैं। शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में दो हजार से अधिक ऑटो-टैक्सियां संचालित हो रही हैं। एआरटीओ द्वारा इनको समय-समय पर फिटनेस सर्टीफिकेट जारी किया जाता है। इस दौरान सभी प्रकार के वाहनों में प्रदूषण की जांच भी की जाती है। हालांकि, प्रदूषण जांच के लिए जनपद में जगह-जगह प्रदूषण जांच केंद्र भी संचालित किए जा रहे हैं, जहां वाहन स्वामियों द्वारा जांच कराने पर प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। लेकिन, बहुत कम लोग ही अपने वाहनों में प्रदूषण की जांच समय पर कराते हैं। यदि कराते भी हैं तो चेेकिंग में चालान के डर से बचने को ही प्रदूषण की जांच कराते हैं। अन्यथा सालों तक सैकड़ों वाहन बिना प्रदूषण की जांच के ही संचालित होते रहते हैं।
इससे भी बड़ी चौंकाने वाली बात यह है कि जनपद में सैकड़ों ऑटो-टैक्सियां या फिर अन्य प्रकार के पुराने कंडम स्थिति के वाहन मिट्टी के तेल से संचालित हो रहे हैं। ऐसे वाहन स्वामियों को वाहनों के लिए मिट्टी के तेल की उपलब्धता के लिए भी नहीं भटकना पड़ता, बल्कि शहर में ही मिट्टी का तेल बहुत सी ऑटो मोबाइल्स की दुकानों पर आसानी से उपलब्ध हो जाता है। ऐसे में शहर में ही पुरानी कंडम स्थिति वाली मिट्टी के तेल से संचालित हो रही दर्जनों टैक्सियां प्रदूषण फैला रही हैं। पुलिस प्रशासन द्वारा वाहन चेकिंग तो की जाती है और कई वाहनों के चालान भी कर दिए जाते हैं, लेकिन फिर भी प्रदूषण पर रोक नहीं लग पा रही है। कारण, यह टैक्सियां पुलिस की नजर से दूर हैं। इससे वाहन स्वामियों के हौसले बुलंद हैं और शहर में धड़ल्ले से मिट्टी के तेल से टैक्सियां व अन्य वाहन संचालित होने से प्रदूषण फैलाया जा रहा है।
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प्रदूषण की मैनुअल रसीद मान्य नहीं है, बल्कि कंप्यूटराइज्ड रसीद ही मान्य है। इसके लिए अभियान चलाया जाएगा। मिट्टी के तेल से चलने वाले वाहनों की जांच की जाएगी और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
- सोमलता यादव, एआरटीओ (प्रर्वतन)
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मिट्टी के तेल से संचालित हो रहे वाहनों से शहर में सबसे अधिक प्रदूषण फैलाया जा रहा है। यह वाहन खुुलेआम फर्राटा भर रहे हैं। शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में दो हजार से अधिक ऑटो-टैक्सियां संचालित हो रही हैं। एआरटीओ द्वारा इनको समय-समय पर फिटनेस सर्टीफिकेट जारी किया जाता है। इस दौरान सभी प्रकार के वाहनों में प्रदूषण की जांच भी की जाती है। हालांकि, प्रदूषण जांच के लिए जनपद में जगह-जगह प्रदूषण जांच केंद्र भी संचालित किए जा रहे हैं, जहां वाहन स्वामियों द्वारा जांच कराने पर प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। लेकिन, बहुत कम लोग ही अपने वाहनों में प्रदूषण की जांच समय पर कराते हैं। यदि कराते भी हैं तो चेेकिंग में चालान के डर से बचने को ही प्रदूषण की जांच कराते हैं। अन्यथा सालों तक सैकड़ों वाहन बिना प्रदूषण की जांच के ही संचालित होते रहते हैं।
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इससे भी बड़ी चौंकाने वाली बात यह है कि जनपद में सैकड़ों ऑटो-टैक्सियां या फिर अन्य प्रकार के पुराने कंडम स्थिति के वाहन मिट्टी के तेल से संचालित हो रहे हैं। ऐसे वाहन स्वामियों को वाहनों के लिए मिट्टी के तेल की उपलब्धता के लिए भी नहीं भटकना पड़ता, बल्कि शहर में ही मिट्टी का तेल बहुत सी ऑटो मोबाइल्स की दुकानों पर आसानी से उपलब्ध हो जाता है। ऐसे में शहर में ही पुरानी कंडम स्थिति वाली मिट्टी के तेल से संचालित हो रही दर्जनों टैक्सियां प्रदूषण फैला रही हैं। पुलिस प्रशासन द्वारा वाहन चेकिंग तो की जाती है और कई वाहनों के चालान भी कर दिए जाते हैं, लेकिन फिर भी प्रदूषण पर रोक नहीं लग पा रही है। कारण, यह टैक्सियां पुलिस की नजर से दूर हैं। इससे वाहन स्वामियों के हौसले बुलंद हैं और शहर में धड़ल्ले से मिट्टी के तेल से टैक्सियां व अन्य वाहन संचालित होने से प्रदूषण फैलाया जा रहा है।
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प्रदूषण की मैनुअल रसीद मान्य नहीं है, बल्कि कंप्यूटराइज्ड रसीद ही मान्य है। इसके लिए अभियान चलाया जाएगा। मिट्टी के तेल से चलने वाले वाहनों की जांच की जाएगी और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
- सोमलता यादव, एआरटीओ (प्रर्वतन)