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मप्र के श्रमिकों का दूसरे दिन भी कलक्ट्रेट में रहा डेरा
Thu, 28 Feb 2019 01:25 AM IST
Pragyan dubey
lalitpur
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Published by: Pragyan dubey
Updated Thu, 28 Feb 2019 01:25 AM IST
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प्रशासन
- फोटो : amar ujala
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ललितपुर। मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों से वन विभाग का अग्रिम मृदा कार्य करने आए दर्जनों श्रमिकों के भुगतान की समस्या का समाधान नहीं हो सका है। दूसरे दिन भी श्रमिकों ने कलक्ट्रेट परिसर में डेरा डाले रखा। श्रमिकों का कहना है कि विभाग के अफसर घन मीटर के हिसाब से भुगतान कराने की बात कह रहे हैं, लेकिन उन्हें बुलाते समय ऐसा कुछ नहीं कहा गया था।
जनपद में अगले मानसून सीजन में करीब 18 लाख पौधों को रोपित किया जाना है। जिसे ध्यान में रखकर विभिन्न वन रेंजों में गड्ढा व बोना नाली खुदान का काम कराया जा रहा है। कुछ वन कर्मियों ने श्रमिकों की मांग को पूरा करने के लिए मध्य प्रदेश के आसपास के जिलों में संपर्क साधा। इस तरह करीब आधा सैकड़ा से ज्यादा श्रमिक विभिन्न रेंजों में काम कर रहे हैं। इनमें मध्य प्रदेश के शहडोल, कटनी, रीवा जिले के कई श्रमिक काम कर चुके हैं, लेकिन उनकी मजदूरी का भुगतान नहीं हो सका है। वह कई दिनों से भुगतान की मांग कर रहे हैं, जब उन्हें भुगतान में हीलाहवाली दिखी तो उन्होंने कलक्ट्रेट परिसर में डेरा जमा लिया। एसडीएम सदर गजल भारद्वाज ने उनकी समस्या के समाधान के लिए डीएफओ से कहा। इसके बाद भी वन विभाग के अफसर मजदूरों को संतुष्ट नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने दूसरे दिन भी कलक्ट्रेट परिसर में गृहस्थी के साथ डेरा जमा रखा है। कई महिला श्रमिकों के साथ दुधमुंहे बच्चे भी हैं। कटनी जिले के ओमप्रकाश का कहना है कि जिस समय उन्हें काम करने के लिए बुलाया गया, उस दौरान उनसे कुछ भी नहीं कहा गया। अब वन विभाग के अफसर घन मीटर के हिसाब से भुगतान कराने की बात कर रहे हैं। इसमें भी वह भुगतान होने का समय नहीं बता रहे हैं, जिससे महिलाओं व बच्चों को बेवजह परेशान होना पड़ रहा है। इस मौके पर संतलाल लोनी, किशन, बालचंद, प्रभा, जीतेंद्र, रामकुमार, सतीश, राकेश, अजय, दुलीचंद, अजय, संगीता, सपना, लालाबाई, आशा, कल्पना, मुनीबाई, सोहागबाई मौजूद रहे।
समस्या का करा दिया समाधान
डीएफओ से वार्ता कर मजदूरों की समस्या का समाधान मंगलवार को ही करा दिया गया था। आज दोबारा कलक्ट्रेट परिसर में बैठने की जानकारी नहीं है।
गजल भारद्वाज, एसडीएम सदर
रेंजर को दिए निर्देश
मजदूरों का भुगतान कराने के लिए संबंधित रेंजर को निर्देश दिए गए हैं। इसमें बिल जैसी प्रक्रिया से गुजरने के उपरांत ही उनका भुगतान होगा। इस पूरी प्रक्रिया में कुछ वक्त भी लग सकता है।
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आरएस यादव, एसडीओ वन
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जनपद में अगले मानसून सीजन में करीब 18 लाख पौधों को रोपित किया जाना है। जिसे ध्यान में रखकर विभिन्न वन रेंजों में गड्ढा व बोना नाली खुदान का काम कराया जा रहा है। कुछ वन कर्मियों ने श्रमिकों की मांग को पूरा करने के लिए मध्य प्रदेश के आसपास के जिलों में संपर्क साधा। इस तरह करीब आधा सैकड़ा से ज्यादा श्रमिक विभिन्न रेंजों में काम कर रहे हैं। इनमें मध्य प्रदेश के शहडोल, कटनी, रीवा जिले के कई श्रमिक काम कर चुके हैं, लेकिन उनकी मजदूरी का भुगतान नहीं हो सका है। वह कई दिनों से भुगतान की मांग कर रहे हैं, जब उन्हें भुगतान में हीलाहवाली दिखी तो उन्होंने कलक्ट्रेट परिसर में डेरा जमा लिया। एसडीएम सदर गजल भारद्वाज ने उनकी समस्या के समाधान के लिए डीएफओ से कहा। इसके बाद भी वन विभाग के अफसर मजदूरों को संतुष्ट नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने दूसरे दिन भी कलक्ट्रेट परिसर में गृहस्थी के साथ डेरा जमा रखा है। कई महिला श्रमिकों के साथ दुधमुंहे बच्चे भी हैं। कटनी जिले के ओमप्रकाश का कहना है कि जिस समय उन्हें काम करने के लिए बुलाया गया, उस दौरान उनसे कुछ भी नहीं कहा गया। अब वन विभाग के अफसर घन मीटर के हिसाब से भुगतान कराने की बात कर रहे हैं। इसमें भी वह भुगतान होने का समय नहीं बता रहे हैं, जिससे महिलाओं व बच्चों को बेवजह परेशान होना पड़ रहा है। इस मौके पर संतलाल लोनी, किशन, बालचंद, प्रभा, जीतेंद्र, रामकुमार, सतीश, राकेश, अजय, दुलीचंद, अजय, संगीता, सपना, लालाबाई, आशा, कल्पना, मुनीबाई, सोहागबाई मौजूद रहे।
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समस्या का करा दिया समाधान
डीएफओ से वार्ता कर मजदूरों की समस्या का समाधान मंगलवार को ही करा दिया गया था। आज दोबारा कलक्ट्रेट परिसर में बैठने की जानकारी नहीं है।
गजल भारद्वाज, एसडीएम सदर
रेंजर को दिए निर्देश
मजदूरों का भुगतान कराने के लिए संबंधित रेंजर को निर्देश दिए गए हैं। इसमें बिल जैसी प्रक्रिया से गुजरने के उपरांत ही उनका भुगतान होगा। इस पूरी प्रक्रिया में कुछ वक्त भी लग सकता है।
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आरएस यादव, एसडीओ वन