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Lalitpur News: मां-पिता कहां चले गए दादा... मासूम के सवाल पर छलक उठते हैं आंसू

Sun, 18 Oct 2026 12:00 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 18 Oct 2026 12:00 AM IST
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Where have Mom and Dad gone, Grandpa the innocent child's question brings tears to ones eyes.
ललितपुर। घर में मां-पिता को न पाकर पांच साल की हिमांशी बार-बार उन्हें तलाशती है। कभी दादा के पास जाकर पूछती है कि मम्मी-पापा कहां चले गए, उन्हें ढूंढकर लाओ। कभी घर के दूसरे हिस्सों में जाकर उन्हें खोजने लगती है। जब वे नहीं मिलते तो उसकी आंखों से आंसू बहने लगते हैं। बच्ची के इन सवालों का जवाब देते-देते दादा जानकी की आंखें भी भर आती हैं। एक ओर बेटे और बहू को खोने का गम है, तो दूसरी ओर दोनों मासूमों को संभालने और उनका भविष्य संवारने की चिंता। थाना जखौरा के ग्राम लालौन में पति-पत्नी की मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
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16 अक्तूबर की सुबह गांव निवासी अनेक कुमार (32) और उनकी पत्नी जयंती (30) के शव घर के एक कमरे में फंदे से लटके मिले थे। घटना के बाद परिवार में मातम छा गया। पोस्टमार्टम के बाद दोनों के शव गांव पहुंचे, जहां देर शाम गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया। सात साल का बेटा कार्तिक माता-पिता के न लौटने की बात कुछ हद तक समझ रहा है, लेकिन पांच साल की हिमांशी के लिए यह सब अब भी अनजाना है। उसे लगता है कि उसके मम्मी-पापा कहीं चले गए हैं और लौट आएंगे।
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रात में जब हिमांशी को माता-पिता की याद आती है तो वह उन्हें खोजने लगती है। घर में न मिलने पर वह दादा से पूछती है कि मम्मी-पापा कहां हैं। जवाब न मिलने पर वह घर के दूसरे हिस्सों में भी उन्हें तलाशती है। इसके बाद रोने लगती है। परिजन किसी तरह उसे समझाकर चुप कराते हैं और सुलाते हैं।
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अनेक के भाई विशाल उर्फ राहुल ने बताया कि शनिवार सुबह हिमांशी फिर माता-पिता के पास जाने की जिद करने लगी। घर के लोग उसे गोद में उठाकर दुकान पर ले गए और टॉफी-बिस्कुट दिलाकर उसका ध्यान बंटाने का प्रयास किया। कुछ देर के लिए बच्ची चुप हो गई, लेकिन उसके सवाल परिवार के लोगों को भीतर तक झकझोर रहे हैं।

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एक ओर बेटे-बहू को खोने का गम, दूसरी ओर बच्चों के भविष्य की चिंता
जिस उम्र में बच्चों को मां की गोद और पिता के सहारे की जरूरत होती है, उस उम्र में कार्तिक और हिमांशी के सिर से दोनों का साया उठ गया। परिवार के लिए इस दुख को सहना आसान नहीं है। अनेक के पिता जानकी एक ओर बेटे और बहू को खोने के गम से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर दोनों बच्चों की परवरिश और भविष्य की जिम्मेदारी भी उनके सामने है। मासूमों को संभालते हुए उन्हें खुद को भी संभालना पड़ रहा है।
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